बाल जगत: चिन्टू की चतुराई

बाल जगत: चिन्टू की चतुराई

आज फिर चिन्टू खरगोश की बारी थी, शेर राजा के पास जाने की। मां बेचारी सुबह से ही उदास थी कि होली के दिन प्यारा सा चिन्टू, नन्हा सा चिन्टू, गोरा-गोरा, गोल मटोल चिन्टू शेर राजा के पेट का हिस्सा बन जाएगा।

जंगल में हुई पंचायत के फैसले के अनुसार हर दिन एक जानवर शेर के भोजन हेतु भेजा जाना तय था। चिन्टू को कोई भय-चिन्ता नहीं थी। मां का तो दिल भरा हुआ था। बार-बार आंसू छलक आते। किसी तरह खुद को सामान्य दिखाने की जबरन कोशिश करती।

जब चिन्टू घर से निकला तो मां ने कहा-अच्छा बेटा। वह इतना ही कह सकी और उसकी आंखें भर आई। चिन्टू ने मां की आंखों से बहते आंसू पोंछे और बोला-मां रो मत, मैं शाम तक आ जाऊंगा। देखना अपने चिन्टू का कमाल। याद है हमारे दादा जी ने एक शेर को अपनी चतुराई से कुंए में कुदवा दिया था। अरे, मां तुमने ही तो मुझे दादा जी की बहादुरी की कहानी सुनाई थी।

अब चिन्टू अपनी योजना पर विचार करते हुए शेर राजा के घर की तरफ जा रहा था। जंगल में होली का माहौल था। जानवर एक-दूसरे को रंग लगा रहे थे। गले मिल रहे थे। भोलू- हाथी ने अपनी सूंड को ही फव्वारे वाली पिचकारी बना रखा थ। रंगीली हिरनी दौड़-दौड़ कर जानवरों को रंग लगा रही थी किन्तु कोई जानवर उसे पकड़ पा रहा था। इसलिए उसके रंग भी नहीं लगा था।

तभी सामने से भोलू हाथी आ गया। उसकी सूंड से चले फव्वारे ने रंगीली को सचमुच रंगीन कर दिया।

यह सब देखने होली खेलने के चक्कर में चिन्टू भूल गया कि उसे शेर के पास जाना है। शाम हो गई। जब जानवर अपने-अपने घरों की ओर चले तो चिन्टू को याद पड़ा कि शेर इंतजार कर रहा होगा।

दिन ढले वह शेर के पास जा पहुंचा। भूखे शेर राजा ने दहाड़ लगाई चिन्टू आओ, इधर आओ। कहां थे अब तक?

महाराज मैं आ ही रहा था कि कुछ जानवरों ने बुला लिया। होली खेली। अब आ रहा हूं। चिन्टू ने कहा।

शेर राजा ने देखा कि चिन्टू का शरीर कीचड़-रंग में सना हुआ है। उसने चिन्टू से नहाकर आने को कहा। चिन्टू नहाने चला गया। कुछ घण्टे बाद चिन्टू शेर के पास पहुंचा और बोला महाराज आज होली है। त्यौहार का मौका है। मुझे खाने से पहले यह लड्डू खा लीजिएगा। चिन्टू ने एक बड़ा सा लड्डू शेर के सामने रख दिया।

सफेद-गोल लड्डू को देखकर शेर के मुंह में पानी आ गया। उसने दोनों हाथों से लड्डू पकड़ कर मुंह में रखा। यह क्या? उसके हाथ लड्डू से चिपके रह गये। मुंह भी लड्डू से चिपक गया। शेर गुर्राने की कोशिश करता लेकिन मिमियाने में भी सफल नहीं हुआ। लड्डू से हाथ-मुंह छुड़ाने की कोशिश करते हुए शेर राजा को वहीं छोड़कर चिन्टू अपने घर आ गया।

मां ने चिन्टू से पूछा-बेटा तुम शेर राजा से कैसे बच आये? तो चिन्टू बोला-मां मैंने उसे ग्रेट क्यू फिक्स गम का लड्डू खिला दिया। उसके मुंह-हाथ तो लड्डू से बुरी तरह फिक्स हो गए हैं।

अगली सुबह जब जंगल के जानवरों को चिन्टू के कारनामे का पता चला तो उन्होंने चिन्टू को कंधों पर बिठाकर जंगल में जुलूस निकाला। अब कोई भी जानवर चिन्तित नहीं था कि उसे शेर राजा का भोजन बनने जाना पड़ेगा।

-अनिल शर्मा 'अनिल'

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