मध्य प्रदेश का राज्य पक्षी-दूधराज

मध्य प्रदेश का राज्य पक्षी-दूधराज

भारत का राष्ट्रीय पक्षी है मोर, यह हम सभी जानते हैं। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत के सबसे बड़े प्रदेश मध्य प्रदेश के राज्य पक्षी से आप परिचित नहीं होंगे। मध्य प्रदेश के राज्य पक्षी का नाम है दूधराज। जैसा नाम वैसा ही रंग रूप। देखने में बहुत ही खूबसूरत परन्तु कर्कश गले का स्वामी, तब भी मनभावन है यह।

दूधराज बुलबुल के समान दिखलाई देता है। इसका सिर, गर्दन और चोटी का रंग चमकीला काला होता है। इसकी चोंच के किनारे सुर्ख नीले रंग के होते हैं। आंख की पुतली भूरे रंग की होती है और पैरों का रंग स्लेटी होता है। इस प्रकार कई रंगों का संयोजन दूधराज के सौन्दर्य में वृद्धि करता है।

मादा दूधराज की औसत लम्बाई लगभग नौ इंच होती है लेकिन नर दूधराज क्रमश मादा दूधराज से दुगुना लम्बा होता है, क्योंकि नर दूधराज की पूंछ उसके शरीर से भी अधिक लम्बी होती है अर्थात् केवल पूंछ की ही लंबाई दस इंच तक होती है इसलिए नर दूधराज 18-19 इंच लंबा होता है। जिस प्रकार मोर, मोरनी से अधिक सुंदर होता है उसी प्रकार नर दूधराज मादा से अधिक सुन्दर दिखलाई देता है। यह पक्षी दिखने में जितना सुन्दर है, प्रकृति ने उसके अनुरूप आवाज नहीं दी है। यह ची चिंब चीं चिंब की कर्कश आवाज करता है जो कर्णप्रिय नहीं लगती।

दूधराज बस्ती के निकट कम घने जंगल में निवास करता है। यह भारत के कई क्षेत्रों में पाया जाता है। इसका भोजन है कीट पतंगे। हवा में कला बाजियां खाते हुए कीट भक्षण करके यह उदर पोषण करता है।

दूधराज अत्यंत चंचल प्रवृत्ति का पक्षी है। यह यहां वहां उड़ता रहता है। बहुत ही कम कहीं बैठता है। यह अपना घोंसला सदा दो डालों के मध्य बनाता है। इसका घोसला शंक्वाकार होता है। मादा एक बार में दो तीन अंडे देती है।

भोपाल के निकट होशंगाबाद बुदनी क्षेत्र के जंगल में से रेल या बस मार्ग से गुजरते समय दूधराज कीट भक्षण करते दिख जाता है। जिस प्रकार वन विहार में साइबेरियन सारसों के लिए एक स्थान विकसित किया गया है, उसी प्रकार यहां राज्य पक्षी दूधराज को भी प्राथमिकता देते हुए बसाया जाना चाहिए। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के वन विहार में राज्य पक्षी दूधराज का अभाव खलता है।

- संजय हिन्ना

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