बाल कहानी: गंदे सूअर

बाल कहानी: गंदे सूअर

एक घने जंगल में अनेक पशु-पक्षी रहते थे। जंगल का राजा था एक बाघ जो बहुत शक्तिशाली और बुद्धिमान था। वह भूख लगने पर ही पशुओं का शिकार करता था। अकारण ही पशुओं को नहीं मारता था। इसी वजह से जंगल के सभी पशु उस से डरते भी थे और उस का आदर भी करते थे।

एक दिन जब वह भरपेट आहार ले चुका तो पानी पीने के लिए नदी की ओर चल पड़ा।

एक सूअर पहले से ही नदी में पानी पी रहा था। उस की निगाह जैसे ही बाघ पर पड़ी तो उस के होश उड़ गए।

सूअर सोचने लगा, आज मौत आ गई, यह बाघ मुझे छोडऩे वाला नहीं। यह जरूर मुझे मार कर खा जाएगा।

लेकिन बाघ का पेट भरा हुआ था। उस ने सुअर की तरफ कोई ध्यान न दिया। नदी से पानी पी कर वह चुपचाप चला गया। बाघ के जाने के बाद सूअर की जान में जान आई। बाघ के जाने के बाद सूअर सोचने लगा, बाघ ने मुझे छोड़ क्यों दिया? मुझ पर आक्रमण क्यों नहीं किया?

फिर उस ने सोचा, शायद बाघ ने मुझ पर आक्रमण इसलिए नहीं किया, उस ने सोचा होगा कि मैं भी एक बलशाली पशु हूं। यह भी हो सकता है कि यह बाघ बूढ़ा हो गया हो, इसीलिए मुझ से भिडऩे का विचार त्याग कर या डर कर चुपचाप चला गया।

ऐसी बातें सोचते हुए सूअर के मन में घमंड पैदा हो गया। उस ने बाघ को चुनौती देने का निश्चय कर लिया और दौड़ता हुआ उस दिशा में चल पड़ा, जिधर बाघ गया था।

उस के निकट पहुंचने पर उस ने चिल्ला कर बाघ से कहा, अरे बाघ, क्या तुम मुझ से डरते हो? क्या यही कारण है कि तुम नदी से पानी पी कर इतनी जल्दी वहां से खिसक आए हो?

बाघ ने सूअर की बात का कोई उत्तर न दिया। वह अपनी मस्त चाल से आगे बढ़ता रहा परंतु सूअर के दिमाग में तो फितूर समाया हुआ था। वह बाघ को चुनौती देने पर तुला हुआ था।

उस ने फिर से चिल्ला कर कहा, अरे बाघ, तुम शायद इसलिए मुझ से दूर भाग रहे हो क्योंकि तुम्हें डर है कि कहीं मेरे साथ युद्ध में तुम हार न जाओ।

सूअर की घमंड भरी बातें सुन कर बाघ को गुस्सा आ गया। उस ने जोर से गर्जना की और कहा, अरे, ओ घमंडी सूअर, मैं तुम्हारी ललकार को चुनौती देता हूं। अब इस बात का फैसला नदी किनारे 3 दिन बाद होगा कि हम दोनों में कौन ज्यादा शक्तिशाली है? अच्छा होगा यदि तुम मुकाबले वाले दिन अपने सभी रिश्तेदारों को बुला कर ले आओ क्योंकि वह दिन तुम्हारी जिंदगी का आखिरी दिन होगा।

सूअर घमंड के नशे में चूर था। उस ने बाघ की बात पर कोई ध्यान न दिया और अपने परिवार वालों तथा मित्रों को बताने के लिए दौड़ गया।

जब यह बात सूअर के भाइयों और संबंधियों को पता चली तो वे डर के मारे थर थर कांपने लगे।

वे सूअर से बोले, अरे मूर्ख, तू ने क्या सोच कर बाघ जैसे ताकतवर पशु को मुकाबले के लिए ललकारा है। क्या तुझे इतना भी नहीं मालूम कि वह तुझे चुटकी बजाते चीर फाड़ कर रख देगा।

अपने भाइयों की बातें सुन कर सूअर को भी लगने लगा कि उससे बड़ी मूर्खता हो गई है। बाघ उसे निश्चित रूप से मार देगा। उसे अपनी भूल का अहसास होने लगा। बाघ के रूप में साक्षात मौत उसे अपने सिर के ऊपर नाचती दिखाई देने लगी। मौत की कल्पना से उस का पूरा शरीर थरथराने लगा।

उस ने घबराए हुए अंदाज में अपने परिजनों से पूछा, गलती तो मुझ से हो चुकी है अब आप मुझे यह बताएं कि मैं किस प्रकार अपनी जान बचाऊं? क्या मैं यहां से कहीं दूर भाग जाऊं।

भाग कर भी तुम्हें मुसीबत से छुटकारा नहीं मिलने वाला, परिजनों ने कहा, क्योंकि तुम जहां भी जाओगे, बाघ तुम्हें खोज निकालेगा और तुम्हें मार डालेगा और यदि तुम नहीं भी मिले तो उस का कोप हम सब पर टूटेगा। वह हम सब को मार डालेगा, इसलिए अब तुम ने उसे चुनौती दी है तो उसे पूरी भी करो।

परिजनों की ऐसी बातें सुन कर सूअर फूटफूट कर रोने लगा। उस का रोना सुन कर एक बूढ़े सूअर को उस पर तरस आ गया। वह अपने दल का सबसे बुद्धिमान और अनुभवी सूअर था।

बूढ़े सूअर ने कहा, अरे मूर्ख, जी तो करता है कि तुझे मर जाने दूं किंतु तेरी हालत देखी नहीं जाती। सुन, तेरे बचने की एक तरकीब मेरे दिमाग में है उस तरकीब से तेरी जान बच सकती है और बाघ के गुस्से से हम सब भी बच जाएंगे।

यह सुनकर सूअर उस के सामने गिड़गिड़ाता हुआ बोला, मेहरबानी कर के जल्दी से मुझे वह तरकीब बता दो।

तो सुन, मुकाबले वाले दिन तुम पास के दलदल की ज्यादा से ज्यादा गंदी मिट्टी अपने शरीर पर लपेट लेना। तुम्हारा सारा शरीर कीचड़ से इतना सन जाए कि तुम्हें देखते ही उबकाई आने लगे। अपने दुर्गंध से भरे शरीर को ले कर बाघ के पास पहुंचना और फिर देखना तमाशा, वृद्ध सूअर ने कहा।

सूअर ने ठीक वैसा ही किया। मुकाबले वाले दिन वह सुबह से ही कीचड़ में लथपथ होने लगा। उस ने अपना सारा शरीर दुर्गंध युक्त कीचड़ में डुबो लिया और निर्धारित समय पर बाघ के सामने जा पहुंचा।

बाघ उसी का इंतजार कर रहा था। उस ने सूअर को कीचड़ में लिपटा देखा। सूअर के शरीर से छूटती दुर्गंध के कारण बाघ पीछे हट गया।

कौन हो तुम? तुम्हारे शरीर से तो बहुत ही दुर्गंध आ रही है, बाघ ने सूअर से कहा।

जब सूअर ने उसे अपना परिचय दिया तो बाघ ने घृणा भरे स्वर में कहा, दूर हो जाओ मेरी नजरों से। लौट जाओ जहां से आए हो। मैं तुम्हारे शरीर से उठती दुर्गंध को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हूं।

बाघ के मुंह से यह बात सुन कर सूअर की जान में जान आई। वह तत्काल वहां से रफूचक्कर हो गया।

जब वह शाम को अपने ठिकाने पर वापस पहुंचा तो उस के परिवार वाले उसे जीवित देख कर बहुत खुश हुए। उस दिन से सब ने मिलकर यही निर्णय किया कि वे सब भविष्य में भी इसी तरह की गंदगी में रहा करेंगे जिस से किसी बाघ या शेर द्वारा उन्हें मारे जाने का खतरा न रहे।

और तब से आज तक इसीलिए सूअर गंदगी को अपने शरीर पर लपेटे रहते हैं।

- नरेंद्र देवांगन

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