बाल कथा: कुत्ता कुत्ते का वैरी

बाल कथा: कुत्ता कुत्ते का वैरी

कुत्ता शेरू और कुत्ता वीरू, दोनों लंगोटिया यार थे। जहां भी जाते, दोनों साथ जाते। दोनों मुहल्ले के दादा थे। दोनों साथ-साथ अपने मुहल्ले में घूम रहे थे कि शेरू ने कहा, 'यार वीरू, बहुत दिनों से भौंकने का मौका ही नहीं मिला क्या करें?'

'मेरा तो मौन व्रत हो गया' वीरू ने जवाब दिया। 'यार वीरू, चल आज दूसरे मुहल्ले में चलते हैं, पत्तल चाटने', शेरू कहने लगा, 'सुना है, वहां किसी की शादी हो रही है। बढिय़ा दावत हो रही है। पेट भर जायेगा'। 'नहीं यार, हम नहीं जायेंगे,' वीरू ने पिछले दोनों पैरों पर बैठते हुए कहा, 'पत्तल चाटने में मजा नहीं आता। कहीं तगड़ा हाथ लगे तो बोले'।

'लेकिन, मुझे तो पत्तल चाटने में ही मजा आता है, शेरू ने कहा, 'हो सकता है तगड़ा हाथ भी लग जाये।'

वीरू कहने लगा, 'शादी-ब्याह को दावत का मामला है। वहां बड़े-बड़े दादा लोग भी आये होंगे। हम दोनों टिक पायेंगे कि नहीं, ये तो सोचो।' 'अरे यार, कम-से कम तुम्हारा मौन व्रत तो टूट जायेगा'

'सो, तो ठीक है पर वहां अगर किसी को पटक कर काट नहीं सका तो बड़ी बेइज्जती होगी। किसी ने हमें ही उठाकर पटक दिया तो हमें दुम दबाकर भागना पड़ेगा' वीरू ने जवाब दिया और जमीन पर लेट गया।

शेरू कुछ देर तक इधर-उधर देखता रहा और वह भी वहीं जमीन पर बैठ गया। शेरू जीभ निकालकर हांफने लगा, फिर शेरू ने ही मौन तोड़ते हुए कहा, 'यार वीरू, लगता है तुमने कहीं कुछ-न-कुछ खा लिया है, इसीलिए, दावत में नहीं जा रहे हो?'

'हां यार, उधर सामने के मकान में मालिक लोगों ने मुर्गी मारी थी। वहीं कुछ हड्डियां चबाने को मिल गई थी। कुछ खाना भी मिल गया', वीरू ने जवाब देते हुए कहा और उठकर बैठ गया।

'तो, यह बात है' शेरू कहने लगा, 'पर मैंने अभी तक कुछ नहीं खाया है। सुबह हमारे पड़ोस के मकान में थोड़ा खाना मिल गया था, वही खाया है। अब तो दोपहर होने लगी है। भूख भी लगी है।' तभी वीरू चौंककर मुहल्ले की सड़क की ओर देखने लगा, वीरू को चौंकते देखकर शेरू भी उठकर खड़ा हो गया और दो-तीन बार भौंकने के बाद पूछा, 'क्या हुआ वीरू दादा! कोई दुश्मन आ रहा है, क्या?'

उधर देख, हमारी जात-बिरादरी का कोई आ रहा है।

शेरू भौंकने लगा, तभी उधर से आ रहा एक कुत्ता उन दोनों के थोड़ा नजदीक पहुंचा तो वीरू ने शेरू से कहा, 'जा तो, देख के आ कौन है? कहां से आ रहा है हमारे मुहल्ले में?'

शेरू भौंकते हुए उसके पास पहुंचा और पूछा, 'कौन है बे तू? हमारे मुहल्ले में क्या कर रहा है?'

मेरा नाम शेरू है। पड़ोस के मुहल्ले से आ रहा हूं' उस शेरू नाम के कुत्ते ने जवाब दिया। शेरू तो मेरा नाम है शेरू ने भौंकते हुए कहा, फिर तेरा नाम शेरू कैसे हुआ?

'मेरा नाम ही शेरू है तो शेरू ही न बोलूंगा' उस शेरू नामक कुत्ते ने जवाब दिया। 'हमारे मुहल्ले में कोई दूसरा शेरू नहीं आ सकता, समझा, भाग जाओ, वरना' - शेरू उसे धमकाने लगा। वह शेरू भी गुर्राने लगा। तभी कुत्ता वीरू भी आ गया और पूछा, 'कौन है बे तू? और, हमारे मुहल्ले में क्या कर रहा है?'

नया शेरू नामक कुत्ता कुछ डर गया क्योंकि ये दो थे और वह अकेला, फिर भी हिम्मत लगाकर धीरे-धीरे भौंकने लगा, तभी शेरू ने वीरू से कहा, 'अपना नाम शेरू बता रहा है और कहता है, पड़ोस के मुहल्ले से आ रहा हूं।'

'ओह, तो ये बात है,' वीरू बोलने लगा, 'साले को अभी मजा चखाता हूं। तुम पीछे से हमला करो और मैं आगे से।' शेरू उसके पास गया और उसकी पूंछ को सूंघने लगा, वीरू आगे तरफ गया और बड़े जोर-जोर से भौंकने लगा। शेरू भी दोनों को आगे पीछे होते देखकर डर गया और वह भी जोर जोर से भौंकने लगा। शेरू को अपनी पूंछ सूंघते हुए देखकर उसने अपनी पूंछ नीचे कर ली आखिरकार, वीरू ने उस पर हमला कर ही दिया।

नया शेरू भी लडऩे को तैयार हो गया। वह अकेला था, इसलिए डर भी लग रहा था। पीछे शेरू ने हमला कर दिया। नया शेरू जमीन पर गिर पड़ा और दो तीन पलटी खा गया। वीरू और शेरू ने उसे बहुत जगह काटा और पटकनियां दी। शेरू के दिमाग में आया कि इन दोनों से लड़ाई में नहीं जीत पायेगा इसलिए, भागना पड़ेगा और मौका देखकर नया शेरू दुम दबाकर भाग खड़ा हुआ। उसके भागने पर दोनों ने कुछ दूर तक उसका पीछा किया, फिर दोनों लौट आये। अपने अड्डे पर दोनों हंसने लगे और बैठ कर सुस्ताने लगे। कुछ देर सुस्ताने के बाद कुत्ता शेरू ने वीरू से कहा, 'साला, अपने को शेरू बता रहा था, भाग गया।' 'हां, तुम ठीक कहते हो, कुत्ता वीरू ने जवाब दिया, मेरा व्रत भी टूट गया।' यह सुनकर कुत्ता शेरू जोर-जोर से हंसने लगा, हंसते हुए कहने लगा, 'तो इसी बात पर हो जाये दावत, क्यों वीरू?'

'तो ठीक है चलते हैं, दूसरे मुहल्ले में दावत खाने', यह कहकर वीरू चलने के लिए उठ खड़ा हुआ।

- प्रकाश भानू महतो

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