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  • बाल कहानी: धन से बढ़कर नाम

    प्राचीन काल में भारत के एक नगर में शिवरतन नामक एक पंडित रहते थे। वह बहुत विद्वान थे। लेखन उनका व्यवसाय था। उन्होंने अपनी रचनाओं के द्वारा धन ही नहीं, यश भी कमाया था। उनकी रचनाएं देश प्रेम, चरित्र निर्माण और मानवता आदि गुणों से ओतप्रोत थीं। उस समय वीरसिंह नामक एक भयंकर डाकू का आतंक चारों तरफ छाया...

  • बाल जगत/जानकारी: बहुत उपयोगी है बांस

    कहने के लिए तो बांस एक रूखा-सूखा और फल से विहीन, पतला और लम्बा वृक्ष भर है। इसकी पत्तियां 5 से.मी. से लेकर 30 से.मी. तक लंबी होती हैं, जो आरम्भ में चौड़ी एवं आखिर में पतली व नुकीली होती हैं। बांस में प्राय: 30 से.मी. के अन्तर पर गांठें होती हैं जिनमें से पतली टहनियां निकली होती हैं। बांस के...

  • बाल कहानी: टूट गईं जंजीरें

    राजगढ़ नामक राज्य में राजा वीर सिंह राज्य करते थे। राजा जनता का भला चाहने वाले थे। राजा कलाकारों, लेखकों, कवियों व वीरों की कद्र करते थे। उनके दरबार से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता था। राजा को कुश्ती देखने का बड़ा शौक था। इसके लिए वह अपने राज्य में कुश्ती प्रतियोगिता भी करवाते थे। दूर-दूर से पहलवान...

  • बाल कहानी - दीवाली विशेष: अधजला बम फूट गया

    सोनबरसा जंगल में एक खरगोश रहता था। उसके पिता नहीं थे। एक सड़क दुर्घटना में उन की मृत्यु हो गई। खरगोश की मां दूसरे जानवरों के घरों में बर्तन वगैरह साफ कर उसे पाल रही थी। खरगोश होशियार था। वह सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ता था। कक्षा में वह हमेशा प्रथम आता। उस की किताब कापियों का इंतजाम मुश्किल से हो...

  • बोध कथा: बुद्धिमान की मूर्खता

    समारोह या सामाजिक गतिविधियों में प्राय: बुद्धिमान व्यक्ति भी भ्रमवश भूल कर देता है जो मूर्खता की कोटि में आता है, अतएव अपने व्यवहार में सदैव सतर्क रहना चाहिए जिससे मूर्ख बनने की स्थिति नहीं आये। ऐसे संदर्भ में यह विचार करना आवश्यक है कि कौन सा व्यवहार किसी व्यक्ति को मूर्ख कहला देता है। इस प्रसंग...

  • बोध कथा: मन की अपवित्रता

    कबीरदास जांति-पाति, छुआछूत और समाज की दूसरी कुरीतियों के खिलाफ थे। उन्होंने अपने दोहों में हिन्दू-मुसलमान दोनों पर कटाक्ष करके उन्हें आड़े हाथों लिया है। रोज की तरह एक दिन कबीरदास सुबह सवेरे गंगा के किनारे स्नान कर रहे थे। उसी समय तीन ब्राह्मण जो तीर्थयात्र पर आये थे, गंगा में स्नान करने के लिये...

  • बोध कथा: समय की कीमत पहचानें

    संसार में सबसे अमूल्य चीज समय है। बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। हर दिन हमारे लिए एक नया दिन होता है जो हमें आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। हमारे पास बुद्धि है। फिर क्यों न हम समय का उचित उपयोग करें? प्रकृति के सब कार्य समय पर पूर्ण होते हैं जैसे कि समय पर फसलें खेतों में लहलहाती हैं। समय पर ऋतु...

  • बाल कथा: अभिभावकों की मुसीबत बनता जा रहा है टीवी

    आज बच्चे जितना समय स्कूल में व्यतीत करते हैं उससे भी कहीं अधिक समय टीवी के सामने बैठे रहते हैं। कई शोधों से सामने आया है कि जो बच्चे अधिक टी. वी देखते हैं वे शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय नहीं होते। यही नहीं, उनमें अच्छी किताबें पढऩा आदि जैसी अच्छी हॉबी भी नहीं होती जिससे उनका सामान्य ज्ञान भी...

  • बाल कहानी: सिराज की अक्लमंदी

    मुगलगढ़ के एक शाही मेहमानखाने में तीन युवक आकर ठहरे- मूसा, अहमद और सुल्तान। तीनों एक ही उम्र के थे, तो जल्द ही उनकी दोस्ती हो गई। एक दिन उन्होंने मिलकर शहर घूमने का मन बनाया और सुबह से ही शहर की खास जगहों पर घूमने के लिए निकल पड़े। कई जगह देखने के बाद वह तीनों शाही बाग में पहुंचे जहां एक बड़ा...

  • बाल कथा: आशाराम और निराशाराम

    एक गांव में बहुत से ग्वाले रहते थे। गाय-भैंस पालना उनका प्रमुख व्यवसाय था। गांव में एक तालाब था, जिसमें बहुत से मेंढक रहते थे। उन्हीं मेंढकों में आशाराम और निराशाराम नाम के दो जुड़वां भाई भी थे। निराशाराम की आदत थी कि वह किसी भी कठिनाई से घबराकर बहुत जल्दी हार मान लेता था। इसी कारण वह निरंतर दुखी...

  • बाल कथा: सैनिकों के कदम

    एक दिन राजेश के पापा सपरिवार पिकनिक मनाने पहाड़ पर आए थे। सभी खुश नजर आ रहे थे। उछल कूद करते-करते राजेश अपनी बड़ी बहन सोनी और रूमा के साथ खेलते-खेलते दूर निकल गया। अचानक उसकी नजर बहुत दूर एक नदी के ऊपर बने पुल से गुजरती सैनिक टुकड़ी पर पड़ी। राजेश ने इसे बहन को दिखाने के लिए कहा, 'दीदी, वह देखो,...

  • बाल कथा: कहानी एक पत्ते की

    एक था पत्ता। वह एक पेड़ पर रहता था। पेड़ का तना बहुत मोटा था। पत्ते का घर पेड़ की एक डाल पर था। उस पेड़ पर और भी बहुत से पत्ते रहते थे। सभी के घर डालों पर थे। कुछ पत्ते बूढ़े थे। कुछ अभी नन्हे बच्चे थे। तेज हवा चलती तो बूढ़े पत्ते नीचे गिर जाते परंतु नन्हे पत्ते हमेशा डाल से चिपके रहते थे। पत्तों...

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