Read latest updates about "कहानी" - Page 1

  • बाल कथा: सुधर गया नीरज

    नीरज कॉलेज से आने के बाद राजू के साथ घूमने चला जाता था। यह बात नीरज की मां को पसन्द नहीं थी। वह जानती थी राजू एक अच्छा लड़का नहीं है। इसलिए वह नीरज को उसके साथ घूमने से मना करती थी परन्तु उस पर मां की बातों का कोई असर नहीं पड़ता था। एक दिन नीरज जब राजू के साथ घूमने गया, तब एक जगह कुछ लड़कों ने उन...

  • बाल जगत / जानकारी: कोयल: कुछ रोचक जानकारी

    कोयल रूप और रंग से तो कौवे से बिल्कुल मिलती-जुलती ही होती है, किंतु बोली और स्वभाव में कौवे से भिन्न होती है। कौवा पक्षियों में नीच प्राणी माना जाता है क्योंकि वह सड़े-गले को अपना भोजन बना लेता है। बसन्त ऋतु के समय आम की अमराइयों में तथा अन्यत्र वृक्षों पर बैठी कोयल अपनी मीठी-कूक से सबका ध्यान...

  • बाल कथा: तलवार की खोज

    चंद्रगढ़ के राजा असित सेन के पास एक सोने की तलवार थी। असित सेन उसे बहुत संभाल कर रखते थे। उस तलवार से राजा असित सेन ने कई लड़ाइयां जीती थीं। तलवार की कीमत भी लाखों में थी। एक रात राजा की वह तलवार चोरी चली गई। तलवार के चोरी जाने से राजा परेशान हो गए। उन्होंने काफी तलाश करवाई, लेकिन तलवार न मिली। ...

  • बाल जगत / जानकारी: चतुर लकड़हारा

    एक गांव में एक लकड़हारा था, जो लकडिय़ां काटकर अपने परिवार का भरण पोषण करता था। वह रोज सुबह जंगल में जाता और दिन भर लकडिय़ां काटता। शाम को लकडिय़ों का ग_र बांधता व शहर बेचने चल देता और फिर खाने का राशन लेकर घर लौटता। जंगल में जाते वक्त उसे काफी राहगीर मिलते, जो जंगल के रास्ते दूसरे गांव जाते थे। रोजाना...

  • मुझे समझौता स्वीकार नहीं

    ''मान जा जीत मान जा, तू क्यों इस तरह जिद पर अड़ी हुई है। आखिर क्या बुराई है उस लड़के में। लड़का जात-बिरादरी का है, कमाता-खाता है, देखने भालने में भी कोई बुरा नहीं है फिर क्या आपत्ति है तुझे उससे शादी करने में। और फिर हम उन लोगों से तेरा रिश्ता पहले ही तय कर चुके हैं हम क्या जवाब देंगे उन लोगों को।...

  • बाल कथा: पहचान

    बहुत पहले की बात है। माघ पंडित को साथ ले कर राजा भोज निरूद्देश्य घूमने निकले और घूमते-घामते काफी दूर निकल गए। अब तो वे अपना रास्ता भी भूल गए थे। काफी सिर मारा, पर सही रास्ता नजर नहीं आया। हार कर दोनों एक बुढिय़ा के पास पहुंचे। हाथ जोड़ कर माघ पंडित ने कहा, 'मां, पांव लागूं।' 'जीते रहो बेटे।'...

  • बाल कथा: पश्चाताप

    यह कहानी बसन्तपुर नामक गांव की है जहां राधा अपने माता-पिता और अपने तीन भाइयों के साथ रहती थी। तीन भाई होने के बावजूद भी स्वयं को वह बेहद अकेला महसूस करती थी। पशु-पक्षियों से उसे बेहद लगाव था। घर के आंगन में पेड़ की छांव में चारपाई डालकर बैठे रहना तथा घन्टों फूल-पौधों, पक्षियों को निहारते रहना उसे...

  • बाल जगत: चिन्टू की चतुराई

    आज फिर चिन्टू खरगोश की बारी थी, शेर राजा के पास जाने की। मां बेचारी सुबह से ही उदास थी कि होली के दिन प्यारा सा चिन्टू, नन्हा सा चिन्टू, गोरा-गोरा, गोल मटोल चिन्टू शेर राजा के पेट का हिस्सा बन जाएगा। जंगल में हुई पंचायत के फैसले के अनुसार हर दिन एक जानवर शेर के भोजन हेतु भेजा जाना तय था। चिन्टू को...

  • बाल जगत: महिलाएं और आजादी की लड़ाई

    इस कहानी को लिखने में इतिहास बनाने में अनेक औरतों का अनेक प्रकार से योगदान रहा है। इसके लिए इन वीर महिलाओं ने कई तरह की यातनाएं भुगती हैं। आधुनिक समय में जो नाम सामने आये हैं उनमें से अनेक ने भारत की आजादी में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया तथा अपना नाम अमर कर दिया। उन्होंने घर-बार छोड़ा, गृहस्थी छोड़ी,...

  • जानकारी: क्या आप जानते हैं?

    लाजवंती का पौधा स्पर्श के साथ ही क्यों मुरझा जाता है? लाजवंती के पौधे के डंठल में पत्तियों के जोड़ों के नीचे छोटे-छोटे दाने होते हैं जिनमें अनेक पतली कोशिकाएं होती हैं। पौधे द्वारा जल ग्रहण किए जाने के कारण ये दाने जल से भर जाते हैं। जब लाजवंती के पौधे को स्पर्श किया जाता है तो इनका जल बहकर डंठल...

  • बाल कथा: प्यासा गांव

    रामनिधि बंगाल के प्रख्यात पंडित थे। आसपास के जिलों में उनके बहुत से शिष्य थे। एक दिन रामनिधि अपने एक शिष्य के घर गए। लौटते-लौटते दोपहर ढलने लगी। वह जंगल के पास ही एक सुनसान मैदान के रास्ते से आ रहे थे। शिष्य द्वारा दी हुई चीजों से भरी पोटली ले, एक आदमी उनके साथ चल रहा था। पांच-सात लुटेरों ने...

  • बाल कथा: फैली जग में रोशनी

    बात उन दिनों की है, जब पृथ्वी का निर्माण हुए ज्यादा समय नहीं बीता था। तब न तो सूर्य का प्रकाश ही इतना तेज था और न चांद-तारे ही प्रकाश देते थे। धरती के सारे प्राणी बहुत दुखी थे और अंधेरे तथा ठंड से तंग आ चुके थे। उस समय पृथ्वी पर एक कौआ भी रहता था। वह अंधेरे के कारण बहुत दुखी रहता था और कहीं भी...

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