पढ़ाई से बचने के लिए भागने की आदत ने मुझे बनाया एथलीट:सुधा

पढ़ाई से बचने के लिए भागने की आदत ने मुझे बनाया एथलीट:सुधा



अमेठी। इंडोनेशिया में चल रहे एशियन गेम्स में रजत मैडल जीतने वाली उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव की एथलेटिक्स सुधा सिंह ने कहा कि पढाई से बचकर भागने की आदत ने मुझे एथलीट बना दिया।

सुधा ने मंगलवार को यहां टेलीफोन पर बातचीत में कहा "मैं तो सबको पीछे करने का लक्ष्य लेकर दौड़ती हूं। मैडल मिलेगा या नहीं इस बात पर ध्यान नहीं रहता है।" उन्होने कहा कि बचपन से ही उसका मन पढ़ाई से ज्यादा स्पोर्ट्स में लगता था। गांव में बच्चों से रेस लगाना, पत्थर फेंकना, पेड़ों से कूदना उन्हें पसंद था। इस आदत से कभी-कभी तो घर में सब परेशान हो जाते थे, फिर भी वे उनके स्पोर्ट्स को बढ़ावा देते थे। सुधा सिंह ने महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज़ स्पर्धा में रजत पदक जीता है।

उन्होने कहा कि मुझे अपने देश के लिए दौड़ना अच्छा लगता है। खास तौर पर जब देश के बाहर बुलाया जाता है। 'सुधा सिंह फ्रॉम इंडिया', सुनाई पड़ने से लगता है कि मैं वाकई स्पेशल हूं। बस यही सुनने के लिए बार-बार खेलने का मन करता है। मेरा परिवार बहुत बड़ा है। हम चार भाई-बहन हैं। घर में सभी मुझे टीवी पर देखकर खुश होते हैं।

सुधा ने कहा कि मेरी ख्वाहिश यूपी के बच्चों को ट्रेनिंग देने की है। इसके लिए मैंने कोशिश भी की है, लेकिन इसके लिए कि‍सी और विभाग में नौकरी करने के लिए मुझे यूपी आना पड़ेगा। कई बार वन विभाग और अन्य जगहों से कॉल आई, लेकिन मैंने मना कर दिया। मुझे सिर्फ खेल विभाग में ही आना है। जिससे बच्चों को सही गाइड कर सकूं। उसने कहा कि अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उम्मीद है।

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