पिता से बोली हिमा दास, बापू ... मैंने पृथ्वी को जीत लिया है

पिता से बोली हिमा दास, बापू ... मैंने पृथ्वी को जीत लिया है

गुवाहाटी। विश्व एथलेटिक्स के 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने के बाद हिमा दास ने अपने पिता रंजीत दास को फोन लगाया और कहा कि देवता, माय पृथ्वी फाली दिलों | अर्थात बापू, मैंने आज पृथ्वी को जीत लिया है| नींद से जगे रंजीत दास को पहले तो समझ नहीं आया कि बिटिया क्या कह रही है और जब बात समझ में आई तो फूट-फूटकर रोने लगे| ... यह खुशी के आंसू थे | बगल में बैठी हिमा की मां जोनाली देवी हक्का-बक्का थीं | बाद में रंजीत दास ने पत्नी और परिवार के लोगों को लाडली की सफलता की गाथा बताई तो न सिर्फ घर-बार बल्कि समूचा कांदलीमारी गांव जश्न में डूब गया| खुशी का दौर देर रात तक चलता रहा | बच्चे, बूढ़े सबकी जुबान पर एक ही चर्चा थी कि गांव-गली में खेलने -दौड़ने वाली हिमा दुनिया की उड़नपरी बन गई|
हिमा की कामयाबी की खबर आने के बाद से पूरे असम में जश्न का माहौल है। विख्यात धावक पीटी उषा का सपना था कि वह विश्व एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक हासिल करें। हालांकि, पीटी उषा ने एशियाई स्तर के एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक हासिल किया था, लेकिन असम की हिमा दास ने अंडर-20 अट्रीय स्तर के एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक हासिल करके न सिर्फ अपने परिवार, असम बल्कि पूरे भारत का नाम दुनियाभर में रोशन किया है। एथलेटिक्स की दुनिया में हिमा दास का नाम आज जिन बुलंदियों को छूआ है उससे हिमा दास के परिवार वाले, उनके प्रशिक्षक के साथ ही आज पूरा असम और पूरा भारत वर्ष गौरव महसूस कर रहा है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने हिमा को बधाई दी तो मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने सराहा | सियासी गलियारों में पक्ष- विपक्ष के नेताओं में हिमा को अपना बताने की मानों होड़ लग गई | सुपरस्टार अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर समेत अनेक नामी-गिरामी हस्तियों ने शुभकामनाएं दी और मुक्तकंठ से उनकी प्रशंसा की है।
उल्लेखनीय है कि हिमा दास ने फिनलैंड में आयोजित अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 51.46 सेकंड में 400 मीटर दौड़ के लक्ष्य को पूरा करके एथलेटिक्स की दुनिया में पूरी दुनिया में अपना परचम लहरा दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आज तक के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली धावक हिमा दास का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है। हिमा ने वह कर दिखाया जो न तो मिल्खा सिंह कर सके थे न ही पीटी उषा | उन्होंने सबसे लंबी लकीर खींच दी |
समय से एक कदम आगे चलने की आकांक्षा रखने वाली हिमा बचपन से ही काफी मेधावी थी। खेलकूद के क्षेत्र में उनकी काफी रुचि थी। शुरुआती दिनों में वह फुटबॉल खेला करती थी। लेकिन उनके दौड़ने का तरीका कुछ अलग ही था | उनके अंदर की प्रतिभा को समझते हुए पिता रंजीत दास ने उन्हें नवजीत मालाकार और निपन दास जैसे प्रशिक्षकों के पास भेजा। सबसे पहले उसने खेलो इंडिया के जरिए एथलेटिक्स में अपना कदम रखा। बाद में राष्ट्रीय स्कूल गेम्स में उनका पदार्पण हुआ। इन दोनों में ही हिमा दास चैंपियन रही। दोनों चैंपियनशिप जितना हिमा दास के करियर का टर्निंग पॉइंट रहा। वर्ष 2017 के मई में बैंकॉक में आयोजित एशियाई यूथ चैंपियनशिप में सातवां स्थान हिमा दास ने प्राप्त किया। इसके बाद कुछ दिनों तक उन्हें कोई पदक तो नहीं मिला, फिर भी एक से एक सफलता उन्हें प्राप्त होती रही। खासकर अप्रैल में आस्ट्रेलिया में संपन्न हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में 51.32 सेकेंड के समय के साथ छठा स्थान हिमा दास ने प्राप्त किया। जहां से उनकी प्रतिभा के बारे में पूरी दुनिया को जानकारी मिल गई थी।
वर्ष 2000 के 09 जनवरी को नगांव जन्म लेने वाली हिमा अभी हाल ही में गुवाहाटी में संपन्न हुए 58वें सीनियर नेशनल एथलेटिक्स राष्ट्रीय चैंपियन शिप में निर्मला को पीछे छोड़कर 51.88 सेकंड में नया रिकॉर्ड बनाने के साथ ही स्वर्ण पदक भी हासिल किया था। साथ ही 200 मीटर में ओलंपिया दुर्ती चांद को हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया। प्रबल आत्मविश्वास की धनी हिमा ने सोच रखा था कि वह फिनलैंड जाएंगी और वहां श्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगी। यह कार्य उन्होंने कर दिखाया। सचमुच हिमा एक ऐसी कन्या रत्न है जिसके रहते हुए कोई भी मां-बाप पुत्र नहीं होने को लेकर मायूस नहीं हो सकता।

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