राष्ट्रमंडल और ओलंपिक अगला लक्ष्य : सुधा

राष्ट्रमंडल और ओलंपिक अगला लक्ष्य : सुधा

रायबरेली। भुवनेश्वर में 22वीं एशियाई एथलेटिक्स चैम्पियनशिप मे 3000 मीटर स्टीपलचेज मे स्वर्ण पदक विजेता सुधा की निगाहें अब 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों और 2020 के ओलंपिक खेलों पर टिक गयी है। गोल्डल गर्ल के नाम से मशहूर रायबरेली की इस बाला ने जून के पहले सप्ताह में 21वें फेडरेशन कप नेशनल सीनियर एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल हासिल किया था जबकि शनिवार को अपने पिछले प्रदर्शन के दोहराते हुये उन्होंने यह कामयाबी हासिल की। सफलता से उत्साहित सुधा ने फोन पर कहा अपनी इस कामयाबी का श्रेय प्रशिक्षक डाक्टर निकोलाई और रेनु कोहली को देना चाहती हूं। उनका मेरी सफलता में बड़ा योगदान रहा है। मैदान में उतरने के पहले मैं पूरी तरह से आश्वस्त थी कि इस बार गोल्ड जीतना है। वैसे भी होम ग्रांउड पर गोल्ड न जीतती तो काफी निराश होती। अब मेरी निगाहें कामनवेल्थ गेम पर और ओलम्पिक पर जम गयी हैं। इस जीत के लिए सभी का शुक्रिया। उधर, सुधा सिंह के गृहनगर रायबरेली में खेल प्रेमियों के बीच जश्न का माहौल है। गोल्ड मेडल जीतने की सूचना मिलते ही सुधा के घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। रविवार को सारा दिन गोल्डन गर्ल के माता पिता शुभचिंतकों और खेल प्रेमियों की बधाई स्वीकार करने में व्यस्त रहे। लोगों ने एक दूसरे का मुंह मीठा कराकर अपनी खुशी का इजहार किया। प्रतियोगिता शुरू होने से एक दिन पहले यूथ एक्टिविटी फोरम ने सुधा की कामयाबी के लिए दक्षिणमुखी हनुमान मदिर में हवन पूजन का आयोजन कराया था। बेटी की इस उपलब्धि पर खुशी से फूले नहीं समा रहे सुधा के पिता एच एन सिंह ने कहा कि लगभग तीन साल के अंतराल के बाद एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण लाना एक बड़ी उपलब्धि है। पिछले सात महीनों से वह लगातार शिमला में अभ्यास कर रही थी आज उसकी तपस्या सफल हो गयी।

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