भारत खेल ताकत बनने की सही दिशा में: बत्रा

भारत खेल ताकत बनने की सही दिशा में: बत्रा

नयी दिल्ली। भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष डॉ नरेंद्र ध्रुव बत्रा ने गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा है कि भारत खेलों की ताकत बनने की सही दिशा में अग्रसर है। भारत ने अपने खिलाडियो के शानदार और दमदार खेल की बदौलत 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य सहित कुल 66 पदक जीतकर 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में अपने इतिहास का तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। भारत ने इन 66 पदकों के साथ राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में 500 पदक भी पूरे कर लिये। भारतीय एथलीटों ने इन खेलों के दौरान 11 राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड भी तोड़े। बत्रा ने कहा, आईओए की तरफ से मैं हर उस एथलीट को बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने इन खेलों में भाग लिया और देश को गौरवान्वित किया। खिलाडिय़ों की कड़ी मेहनत का फल सामने आया है और मैं यह बात गर्व से कह सकता हूं कि एक राष्ट्र के रूप में हम खेलों की ताकत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। भारत ने 2014 के ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों की 15 स्वर्ण सहित 64 की कुल पदक संख्या को कहीं पीछे छोड़ दिया। भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अपनी मेजबानी में 2010 दिल्ली में दूसरा स्थान रहा था जहां उसने 38 स्वर्ण सहित कुल 101 पदक जीते थे। भारत ने 2002 के मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में 30 स्वर्ण सहित 69 पदक जीते थे और उस समय वह चौथे स्थान पर रहा था।
आईओए के अध्यक्ष ने कहा, राष्ट्रमंडल खेलों का यह संस्करण भारतीयों के लिए $खास रहा है विशेष रूप से युवा खिलाडियों के लिए जिन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से देश को गर्व प्रदान किया। मैं खास तौर पर महिला खिलाडिय़ों का जिक्र भी करना चाहूंगा जिन्होंने खेलों में उच्च स्तर के नए मापदंड स्थापित किये। ये महिला खिलाड़ी देश की लड़कियों के लिए निस्संदेह प्रेरणा स्त्रोत बन गयी हैं। बत्रा ने साथ ही कहा, Þमैं सभी एथलीटों को ओलम्पिक चक्र के लिए शुभकामनाएं देता हूं और उम्मीद करता हूं कि वे अपने प्रदर्शन में और सुधार करेंगे ताकि हम आगामी एशियाई खेलों तथा 2020 ओलम्पिक खेलों में इसी तरह शानदार प्रदर्शन कर सकें।भारत ने इन खेलों में कई प्रतियोगिताओं में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। खासतौर पर मुक्केबाजी, भारोत्तोलन, निशानेबाजी, टेबल टेनिस, कुश्ती और बैडङ्क्षमटन में भारत का प्रदर्शन चरम पर रहा और भारत ने अपने सर्वाधिक पदक इन्हीं खेलों में जीते। निशानेबाजी में भारत ने सबसे ज्यादा पदक हासिल किये। युवा निशानेबाजों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने सात स्वर्ण, चार रजत और पांच कांस्य पदक कुल 16 पदक जीते। इसके बाद कुश्ती का नंबर रहा जहां भारत ने पांच स्वर्ण, तीन रजत और चार कांस्य सहित कुल 12 पदक जीते। मुक्केबाजी और भारोत्तोलन में भारतीय खिलाडियो ने नौ नौ पदक जीते। भारोत्तोलन में भारत को पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य तथा मुक्केबाजी में तीन स्वर्ण, तीन रजत और तीन कांस्य पदक मिले। टेबल टेनिस की कामयाबी हर लिहाज से हैरतअंगेज रही जिसमें भारतीय खिलाडियो ने तीन स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य सहित कुल आठ पदक जीते। बैडमिंटन में भारत ने दो स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य सहित छह पदक हासिल किये। एथलेटिक्स में भारत को एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक मिला। स्क्वैश में भारत के हिस्से में दो रजत पदक आये। पैरा पावरलिफ्टिग में भारत को एक कांस्य पदक मिला।

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