नीरज चोपड़ा की ट्रैक वापसी पर रहेगी सभी निगाहें

नीरज चोपड़ा की ट्रैक वापसी पर रहेगी सभी निगाहें

रांची। भारत के स्टार भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा एक साल से अधिक समय के अंतराल के बाद ट्रैक पर लौट रहे हैं और यहां बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम में गुरुवार से होने वाली 59वीं राष्ट्रीय ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में नीरज के प्रदर्शन पर सभी निगाहें रहेंगी।

नीरज के अलावा देश के अन्य बड़े एथलीट मोहम्मद अनस याहिया और वीके विस्मया, लोंग जंपर श्रीशंकर, धावक जिनसन जॉनसन, भाला फेंक एथलीट अनु रानी, फर्राटा धाविका दुती चंद और अर्जुन अवार्डी शॉटपुटर तजिंदर पाल सिंह तूर भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

हाल में दोहा में हुई विश्व एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भारत ने 27 सदस्यीय दल उतारा था जिसमें भारत को दो ओलंपिक कोटा मिले थे और भारत तीन स्पर्धाओं के फाइनल में पहुंचा था। ओवरआॉल इस चैंपियनशिप में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। अगले साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक खेलों के लिए नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है और भारतीय एथलीटों के पास अपने प्रदर्शन को सुधारने, रैंकिंग हासिल करने और आईएएएफ के क्वालीफिकेशन मापदंडों तक पहुंचने का मौका रहेगा।

इन सभी एथलीटों में नीरज का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र होगा। नीरज पिछले साल 19 सितंबर को जालाहाली में सर्विसिस एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 83.90 मीटर की थ्रो के बाद से चोट के कारण प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा नहीं ले पाए थे। वह दक्षिण अफ्रीका के पोचेफस्ट्रूम में ट्रेनिंग कर रहे थे कि उनकी कोहनी में चोट का पता चला और मई में उनकी सर्जरी करायी गयी।

टोक्यो ओलंपिक अब से 10 महीने दूर है और नीरज की वापसी भारतीय एथलेटिक्स के लिए उत्साहजनक है और राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उनके प्रदर्शन से पता चलेगा कि उनका रिहैबिलिटेशन सही दिशा में चल रहा है। पिछले साल राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले 21 वर्षीय नीरज ने पटियाला से कहा, ''मैं प्रतिस्पर्धा में लौटने के लिए बेताब हूं। मुझे प्रतियोगिता में हिस्सा लिए एक लंबा समय गुजर चुका है और मैं राष्ट्रीय चैंपियनशिप से प्रतियोगिता का एहसास लेना चाहता हूं। मैंने डॉक्टरों से बात की थी जिन्होंने मुझे मंजूरी दे दी है। इस बीच भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने 37 पुरुषों और नौ महिलाओं सहित 46 एथलीटों की प्रविष्टियों को खारिज कर दिया है जो मणिपुर का प्रतिनिधित्व करना चाहते थे जबकि वह उस राज्य का हिस्सा नहीं थे।

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