Read latest updates about "संबंध" - Page 4

  • प्यार पाने के लिए प्यार करो

    प्यार पाने के लिए आवश्यक है कि प्यार किया जाए। कौन है भला जो प्यार नहीं पाना चाहता और मिलने पर बदले में प्रेम का उत्तर प्रेम से न दे। प्यार तो पशु-पक्षी तक भी पाना चाहते हैं और बदले में प्यार देते भी हैं। घर में पाले हुए किसी पशु-पक्षी का अपने प्रति व्यवहार देखिए कि किस प्रकार वह आप से...

  • दांपत्य जीवन को बनायें खुशहाल

    विवाह के पूर्व प्रत्येक युवती का सपना होता है कि उसका दांपत्य जीवन सुखद रहे और उसे प्यार और सम्मान देने वाला पति मिले। परिवार में सभी लोग चाहने वाले हों और उसकी बड़ाई हो। इसी प्रकार युवक चाहते हैं कि पत्नी सभ्य-सुशिक्षित और मधुर व्यवहार करने वाली हो। संयोग से ऐसा जीवन-साथी मिल जाय तो इसे सौभाग्य ही...

  • दामाद जब प्रथम बार ससुराल जाये

    हर पुरूष के जीवन में वह दिन आता है जब वह विवाहोपरान्त अपनी पत्नी के साथ अपनी ससुराल या पत्नी के मायके जाता है। वैसे यह एक यादगार दिन होता है ससुराल वालों और दामाद दोनों के लिए। यदि दामाद अधिक नाज नखरों वाला हो तो ससुराल वालों को अधिक ध्यान देना पड़ता है। जैसे कांच की नाजुक चीज़ों पर...

  • आरोप-प्रत्यारोप दांपत्य कटु बताते हैं

    यह एक निर्विवाद सत्य है कि सुखद दांपत्य जीवन ही सुखी परिवार की नींव है। जिस घर में पति पत्नी हर समय आपस में उलझते लड़ते-भिड़ते रहते हों, वहां का वातावरण तनावपूर्ण हो उठता है जिससे घर में रहनेवाले दूसरे सदस्य भी सहमे से रहते हैं चाहे वे बच्चे हो या बूढ़े मां बाप। इंसान को अपनी गलतियां...

  • रिश्तेदारों में रिश्तेदारी: उचित या अनुचित

    ममेरे, फुफेरे, चचेरे भाई-बहनों, मामा-भांजी, फूफा भतीजी में रिश्ते ज्यादातर मुस्लिम समाज में होते हैं जिसे बिलकुल बुरा नहीं माना जाता किन्तु हिंदू समाज ने ऐसे संबंधों/रिश्तों को असहज और अप्राकृतिक माना है और वैज्ञानिकों ने ऐसे संबंधों के विपक्ष में ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए हैं। असल में...

  • अधेड़ावस्था में पति-पत्नी ऊब से बचें?

    कुछ दशक पहले पति पत्नी के लिए अधेड़ावस्था अपने साथ आज की तरह समस्याएं लेकर नहीं आती थी। तब उनके पास अपने को व्यस्त रखने के लिये एक भरा पूरा परिवार होता था जिसमें बेटे, बहू, पोते-पोतियां, विधुर चाचा, मामा या कोई विधवा मौसी, बुआ वगैरह भी हुआ करती थीं। इसके अलावा तीज त्योहार विशेष अवसर आदि मनते ही...

  • संकल्पों की रात

    सुहागरात भावी जीवन की शुरूआत की रात होती है क्योंकि सुहागरात के रूप में सैक्स का तूफान इतना तीव्र होता है कि उसे जीवन में सब से ज्यादा मजबूत संवेग के रूप में स्वीकार किया जाता है। कुछ युवक युवतियां कॉलेज में एक दूसरे से प्रेम करते हुए विवाह कर लेते हैं लेकिन सुहागरात से पहले उन में इतना अंतरंग...

  • स्थायी संबंधों का आधार है सीमित व्यवहार

    समाज का एक सनातन नियम है परस्पर संबंध, सामंजस्य और एक दूसरे को सहन करने और निभाने की प्रवृत्ति। समाज में रहना है तो आस-पड़ोस, रिश्ते-नाते, मित्रता आदि संबंधों को बनाना और निभाना अति आवश्यक है। समाज से कट कर मनुष्य का सुखी रह पाना अत्यंत ही कठिन है। हर व्यक्ति को किसी न किसी दूसरे...

  • क्यों होते हैं वो इतने बहानेबाज़

    बहानों का क्या है। कैसे भी कितने भी कभी भी बनाए जा सकते हैं। बनाते-बनाते अब वो खून में शामिल हो गए हैं। अब भले ही जरूरत हो न हो, चट से जुबान से कोई भी एक पेटेंट बहाना फिसल जाता है। कभी अगर बहाने जान बचाते हैं तो उलटे भी पड़ जाते हैं याने कि जान पर ही बन आती है। यू एस में हुए एक सर्वे के अनुसार...

  • आप और आपका सहकर्मी

    प्रत्येक कार्यालय में कार्यकर्ता होते हैं। इनमें वाद विवाद रहता है क्योंकि हरेक इंसान के विचार अलग होते हैं। हमें किसी कार्य क्षेत्र में काम करते हुए संयम, सहनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए। इसके लिए निम्न बातों का रखें ख्याल:- - व्यर्थ के वाद विवाद में न पड़ कर अपने काम से मतलब रखें।-...

  • अति घातक हैं झूठ और बेईमानी

    मनुष्य की जरूरतें बहुत थोड़ी सी हैं, भोजन, वस्त्र और आवास, साथ में स्वस्थ मनोरंजन, चिकित्सा सुविधा और न्याय के लिए सुरक्षा की व्यवस्था तो प्रशासनिक जिम्मेदारी है। समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति मनुष्य थोड़े से मनोयोग और शारीरिक श्रम द्वारा कर सकता है फिर भी मनुष्य झूठ-प्रपंच और बेईमानी का सहारा क्यों...

  • समय की मांग है स्त्री-पुरूष मित्रता

    पिंकी को अपने दोस्त अनुराग पर नाज़ है। उसने न सिर्फ आगे पढऩे के लिए प्रेरित किया अपितु परीक्षा के लिए स्तरीय नोट्स भी उपलब्ध कराए जिसके कारण वह प्रथम श्रेणी से बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण कर पाई। वहीं मीना और अभिलाषा जैसी उसकी सहेलियां पाठ्यक्रम की पुस्तक देने में हमेशा ना-नुकुर करती। मनोविश्लेषकों...

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