जीवन में आवश्यक है संतुलन

जीवन में आवश्यक है संतुलन

मनुष्य को अपनी ढलती उम्र के साथ जीवन में हर प्रकार से संतुलन बनाये रखने की आवश्यकता होती है। हम अपने मन-मस्तिष्क को काबू में रखकर ही सुखमय जीवन का आनन्द ले सकते हैं। भावनाओं के वेग को भी मन की मजबूत डोर से जकड़ कर अपने वश में ही रखना होता है। फिर चाहे जीवन में कितनी ही मुश्किलें आएं या विपदाएं राह रोकने का प्रयास करें परंतु आप निरंतर आसानी से जीवन के पथ पर अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते ही चले जायेंगे।
अति आवश्यक है, स्वयं को मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ व तंदुरूस्त रखना। निम्न प्रकार से हम स्वयं के जीवन की देखभाल कर सकते हैं।

मानसिक:-
- सोच को हमेशा ही सकारात्मक रखें और निर्माणात्मक कार्यों को ही करने का प्रयास करें।
- जो कार्य हमेशा करते हैं उनमें बदलाव लाएं। अर्थात दाहिने हाथ से किए जाने वाले कार्यों को बाएं हाथ से करने का प्रयास करें।
- बच्चों के बीच में उनके खेलों व अन्य कृत्यों में समय बिताएं ताकि उम्र ढलने का ख्याल मन से गायब सा हो जाए।
- सकारात्मक व रचनात्मक साहित्य और जीवनियां पढऩे का प्रयास करें ताकि विचारों को सीख व कर्मों को दिशा मिलती रहे।
- कभी-कभी घूमने-फिरने का कार्यक्रम भी निश्चित करना चाहिए जिससे कि नई चीजों को देखकर मन नये विचार बुने।
- चिंताओं को एकत्रित करके रोने की बजाय उनसे जूझकर, उनका निवारण करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए।
- खुद से प्रेम करने की कला अपनानी चाहिए क्योंकि जो इंसान खुद से प्रेम करता है वही दूसरों को प्रेम देकर, उनकी भावनाओं का आदर करके अपने चित्त को व्यर्थ भटकने से रोक सकता है।
शारीरिक:-
- भोजन अपने कार्य के अनुसार ही ग्रहण करें। तभी खाएं जब भूख लगी हो। ज्यादा भोजन करने से बीमारियों के सिवाय और कुछ भी हाथ नहीं लगता है।
- प्रतिदिन 30-30 मिनट सुबह और शाम अपने शरीर के लिए रखें। जिसमें व्यायाम, घूमना-फिरना या खेलना शामिल करें।
- सप्ताह में एक दिन 10-12 किलोमीटर दौडऩे का कार्यक्रम निश्चित ही रखें।
- अपने शरीर के वजन पर विशेष ध्यान दें। अपने खान-पान की शैली में नियंत्रण करके यह आसानी से किया जा सकता है। किसी भी कार्य को करते समय अपने शरीर का आकार सही रखें। उसमें किसी भी प्रकार की बेडौलता न आने दें। अपने शरीर से प्रेम करें। उसे सही सुडौल बनाये रखने का प्रयत्न हमेशा ही करते रहें।
खान-पान:-
शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखें ताकि प्रत्येक मांसपेशी सही प्रकार से अपना कार्य करने में लगी रहे। हमेशा मौसमी साग-सब्जियों और फलों का ही सेवन करें ताकि उनके प्राकृतिक लाभकारी गुण पूर्ण रूप से शरीर को मिल सकें। बढ़ती उम्र के साथ-साथ तले हुए खान-पान में कमी कर देनी चाहिए। मसालों का सेवन भी कम ही करना चाहिए।
- नरेशसिंह नयाल 'राज'

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