क्यों होता है प्यार बड़ी उम्र की महिलाओं से

क्यों होता है प्यार बड़ी उम्र  की महिलाओं से

यह इंसानी फितरत है कि वह हमेशा कुछ नये सुख व आकर्षण की खोज में रहता है। अब इस नये टे्रंड को ही लें जहां एक ग्रेसफुल सलीकेदार मृदुभाषिणी स्त्री उम्र के चौथे पांचवें दशक में अपने से बरसों छोटे युवकों को अपने आकर्षण में बांधने लगी हैं।
समाज में ऐसी अनगिनत औरतें हैं जो खेली खाई होने के कारण बड़ी आसानी से निपट अनाड़ी किशोर, युवकों को उम्र के इस पड़ाव के एकाकीपन का फायदा उठाते हुए कभी जिस्म तो कभी पैसे की हवस पूरी करती हैं।
यह मेल साइकोलॉजी पर निर्भर करता है। वह अगर मदर फिक्सेशन से ग्रसित है तो प्रेमिका में वह मां की छवि ढंूढेगा। यही उसके महिला प्रेमिका की ओर आकर्षित होने का कारण है। इस संबंध को लेकर वह कितना गंभीर और वफादार बना रहता है, यह उसकी फितरत और महिला की उसे बांधे रखने की कला पर निर्भर है, या फिर वह एक चंचल भ्रमर की तरह बेवफा साबित हो सकता है। खूबसूरत जवान औरत पत्नी के रूप में मिलने पर वह बड़ी उम्र की प्रेमिका को भुला बैठता है।
अब अगर इस विषय कि क्यूं होता है बड़ी उम्र की महिला से प्यार पर विचार किया जाए तो जो सबसे अहम् बात नोटिस में आती है, वह है पुरूष का पहला प्यार जो निस्संदेह उसकी मां ही है।
पुरूष का पहला प्यार मां होने के कारण सारी जिंदगी वह इस अहसास से मुक्त नहीं हो पाता। अब इसी तरह लड़कियां पिता की छवि मन में संजोये प्रेमी और पति में उसे खोजती हैं। इसीलिए शायद कई लड़कियों को बड़ी उम्र के पुरूष ही प्रेमी और पति के रूप में पसंद आते हैं। सायरा बानो, दिलीप कुमार, मीना कुमारी, कमाल अमरोही, कबीर बेदी और उसकी दूसरी पत्नी, विनोद खन्ना और कविता, किशोर कुमार और लीना चन्दावरकर ऐसे कुछ फिल्मी जोड़े हैं और थे।
पुरूष की उम्र पत्नी से अधिक होनी चाहिए, समाज इसी थ्योरी को मान्यता देता है। पुरूष प्रधान समाज के लिये यही ठीक भी है। इसमें कुदरती तौर पर पत्नी पति को वह आदर देगी जो वह चाहता है जिससे उसका अहम् संतुष्ट होता है। सफल सुखी दांपत्य के लिए यह आवश्यक भी है। यहां मनमुटाव के चांस कम होते हैं।
हर स्त्री कहीं न कहीं अपने को असुरक्षित महसूस करती है, कुछ बिंदास प्रकृति वालियों को छोड़कर। बड़ी उम्र के पुरूष के साथ वे अपने को सुरक्षित पाती हैं क्योंकि अक्सर उम्र के इस पड़ाव पर वे परिपक्वता के साथ आर्थिक रूप से भी सुदृढ़ होता है। कुछ यही बातें युवकों के किये भी अपने से बड़ी उम्र की स्त्री के प्रति रूझान का कारण होता है।
अपोजिट सेक्स की कौन सी क्वालिटी, कौन सी अदायें, कौन से गुण किसी का मन मोह लेते हैं, कुछ कहा नहीं जा सकता। प्यार में कोई सीमा, कोई बंधन नहीं होता।
जहां नैतिक मूल्यों में आज इतना फेरबदल हुआ है वहीं पुराने सामाजिक नियम भी बदले हैं। अब उनमें वो कसाव नहीं रहा। आज समलैंगिक होना भी सामाजिक मान्यता प्राप्त करने की ओर अग्रसर है तो उम्र का फर्क बेमानी होकर रह गया है। इंटरनेटी इश्क और मोबाइल पर भेजे जाने वाले एस.एम.एस. ने तो मानो इश्क का रूप ही बदल दिया है।
महत्त्वाकांक्षाओं के बढ़ते दौर में आज सभी रातों रात धनाढ्य बनने के सपने संजोते हैं। जब ऐसा संभव नहीं होता, तब दूसरे विकल्प खोजे जाते हैं। उसमें एक विकल्प है किसी वैल सैटल्ड महिला से शादी। तब उसकी सारी कमाई व प्रापर्टी स्वत: ही किसी महत्त्वाकांक्षी रोजी रोटी के लिए जूझ रहे युवक की हो जाती है जैसे कि हमने राजन और रितु के केस में देखा।
ऐसा भी है कि सभी व्यक्ति इस तरह की मानसिकता लिये नहीं होते। वे एक संभ्रात सम्माननीय महिला के तेज को देख परवाने की तरह उस शमां पर निसार हो जाने को तैयार हो जाते हैं। यहां पैसा मुद्दा नहीं होता। सिर्फ एक जबर्दस्त आकर्षण होता है। युवक स्वयं पैसे वाला हो सकता है जिसे महिला के पैसे में कोई दिलचस्पी नहीं होती।
सम्मानित महिला को अब देवी का स्थान देकर दिल में बिठाकर पूजने का जमाना नहीं रहा। आज के प्रेमी प्रैक्टिकल ज्यादा हैं। वे प्यार का इजहार मानवीय तरीके से मानवीय रूप में यथार्थ धरातल पर करने में विश्वास रखते हैं क्योंकि जब रूह का सफर सेज तक होता है, वह मूर्ति खंडित करने जैसा होता है। किसी हिप्पोक्रेसी में जीने से क्या फायदा। आज की पीढ़ी 'इट्स माई लाइफ' में विश्वास रखती है। बड़ी उम्र की स्त्री से प्यार उनके लिए तर्कहीन है। 'जब प्यार करे कोई, तब देखे केवल मन' वे कहते हैं।
-उषा जैन 'शीरीं'

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