स्त्री-पुरूष मित्रता की मर्यादा

स्त्री-पुरूष मित्रता की मर्यादा

आजकल अधिकांश लोगों में दोस्ती का अर्थ है 'डेट' पर जाना, फिल्म देखना, बांहों में बांहें डालकर घूमना, क्या यह दोस्ती है? यह एक टाइम पास दोस्ती होती है। थोड़े ही दिनों में ऐसी दोस्ती टूट जाती है और फिर नये दोस्त के साथ यही सब कुछ होता है। ऐसे लोग आधुनिकता के नाम पर दोस्ती के अर्थ को बदल रहे हैं। यह उचित नहीं है।
दोस्ती की सीमाएं कहां समाप्त होती हैं इस संबंध में सभी के अपने विचार हैं। कुछ तो इसकी कोई सीमा नहीं मानते। कुछ समाज के दायरे में रहकर निभाना चाहते हैं। कुछ लोग तो 'दोस्ती में सब जायज है' का फार्मूला अपनाते हैं तो कुछ छोटे-मोटे सलाह-मशवरे लेने तक सीमित रहना चाहते हैं।
वैसे तो आधुनिकता में लिप्त युवाओं में मित्रता की कोई सीमा नहीं है परन्तु फिर भी मित्रता के संबंध में सभी के मापदण्ड भिन्न-भिन्न हैं। कुछ स्त्रियां अपने दोस्तों के साथ सिगरेट-शराब का सेवन करना, देर रात तक क्लबों और होटलों में घूमना, उनके साथ संबंध स्थापित करने को दोस्ती मानती हैं तो कुछ को दोस्ती का अर्थ एक दूसरे के सुख-दुख में काम आना और समाज के बंधनों में ही मित्रता निभाना अच्छा लगता है। वस्तुत: आधुनिक होने का यह अर्थ नहीं है कि दोस्ती के नाम पर ऐसे कार्य किए जाएं जो अशोभनीय हों।''
स्त्री-पुरूष में मित्रता का अर्थ यह बिलकुल नहीं है कि वे एक दूसरे से प्रेम करते हैं। वास्तव में अगर स्वार्थ नहीं है तो प्रेम से अच्छी कोई चीज नहीं है। आजकल स्त्री के लिए प्रेम करना या उसे पा लेना, उसी तरह आसान हो गया है जिस तरह पुरूष के लिए था।
प्रेम पर सबका हक होता है। प्रेम विवाह के बाद भी हो सकता है, इसमें कोई बंधन भी स्वीकार्य नहीं। अगर प्रेम मनुष्यता के खिलाफ पड़ रहा हो तो सोचने की जरूरत है। औरत प्रेम नहीं करेगी तो आगे भी नहीं बढ़ सकती है। प्रेम बुरी चीज नहीं है। जिस प्रेम से किसी की संपत्ति पर आंच आती है तब वह स्वामी की आंखों में खटकने लगता है। स्त्री की देह उसके पति की सम्पत्ति है। जिस दिन उसके ऊपर से वह स्वामित्व हटा लेगा, उस दिन वह मुक्त हो जाएगी।
अपनी दोस्ती की एक सीमा बनाएं और यदि आपका मित्र उसे तोडऩे का प्रयास करे तो उसे तो सावधान करें ही, स्वयं भी सावधान हो जाएं। यह सच है कि एक अच्छा पुरूष मित्र न केवल आपका शुभचिंतक होता है बल्कि उचित मार्गदर्शन भी करता है परंतु कई बार ऐसे रिश्तों में शारीरिक आकर्षण के कारण दरार भी आ जाती है।
जब मित्रता सिर्फ मित्रता के दायरे में न रहकर उससे कुछ गहरे रिश्ते में पनपने लगती है तो इस परिस्थिति को संभालना कठिन हो जाता है। स्त्री पुरूष मित्रता में कोई बुराई नहीं है पर अपनी मर्यादा की रेखा तय करना आप पर निर्भर है। ऐसी मित्रता उचित दूरी और आपसी सामंजस्य पर ही टिकी रहती है, अत: समाज के दायरे में रहकर मित्रता करें।
- राजा तालुकदार

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