महिलाओं में विवाहेत्तर संबंधों का बढ़ता चलन

महिलाओं में विवाहेत्तर संबंधों का बढ़ता चलन

पहले अक्सर यह सुना जाता था कि उक्त पुरूष के उक्त औरत के साथ नाजायज संबंध हैं। इन अवैध संबंधों की त्रासदी की शिकार मुख्य रूप से पत्नी ही होती थी परंतु आज बदलते जमाने में जहां काफी कुछ बदल गया है, वहीं विवाहेत्तर संबंधों में महिलाएं भी पुरूषों से पीछे नहीं रहीं।
जिस तरह पति, दूसरी औरत से ताल्लुकात बनाए रखने के लिए उसके समक्ष अपनी पत्नी की बुराइयां करता रहता है, उसे यह अहसास करा कर कि वह अपने दांपत्य जीवन में किस कदर दुखी है, उसकी सहानुभूति बटोर लेता है, कुछ इसी तरह का तरीका ऐसी महिलाएं अपनाती हैं।
यदि पति उनकी कद्र नहीं करता या किसी अन्य कारण से वे पति को पसंद नहीं करती तो अपने आस पास मसलन पति की रिश्तेदारी में, पड़ोस में या किसी अन्य जगह वे अपनी पसंद के पुरूष के आकर्षण में बंधी उसके समक्ष स्वयं को बहुत दुखी दर्शाती हैं। धीरे-धीरे वे एक-दूसरे के प्रति पूरी तरह समर्पित हो जाते हैं।
आज की नारी, पुरूषों की बराबरी करते-करते ऐसे कार्यों में भी उसकी बराबरी कर रही है जो कभी भी उसके घर में आग लगा सकते हैं। वैसे भी यदि पति आपको पसंद न हो तो इसका मतलब यह तो नहीं कि आप किसी दूसरे पुरूष के आकर्षण में बंधकर अपना सब कुछ दांव पर लगा दें। ऐसा करते वक्त आप यह क्यों भूल जाती हैं कि जिस पुरूष के लिए आप अपना सर्वस्व न्यौछावर कर रही हैं, वह न तो आपको भावनात्मक सुरक्षा दे पाएगा व न ही सम्मान।
विवाहेत्तर संबंधों का दूसरा बड़ा कारण है पति-पत्नी में आपसी तालमेल की कमी। जब पति अपनी पत्नी की भावनाओं की कद्र नहीं करता, उसके साथ तालमेल बिठाने का प्रयास नहीं करता तो पत्नी क्षुब्ध हो उठती है। वह अपनी सहेलियों के वैवाहिक जीवन के किस्से सुनती है तो उसे लगता है कि उसका पति इस काबिल ही नहीं है कि उसे प्यार किया जाए। ऐसी सोच के पनपते ही उसे पति में केवल कमियां ही दिखाई देती हैं और उसका मन करता है कि वह उसे छोड़कर कहीं अन्यत्र चली जाए।
ऐसे में जब उसे किसी अन्य पुरूष में वह सब दिखाई देता है जिसकी अपेक्षा वह अपने पति से करती है तो वह अनायास ही उसकी ओर आकर्षित हो जाती हैं। उन दोनों के बीच अंतरंग संबंध कायम हो जाते हैं जो अवैध संबंधों को जन्म देते हैं।
यदि पत्नी, पति से अधिक पढ़ी-लिखी हो तो वह या तो हीन भावना से ग्रस्त हो जाता है या फिर शुरू से ही सिर्फ इस सोच के अधीन पत्नी पर रौब जमाने लगता है कि कहीं वह उस पर हावी न हो जाए जबकि पढ़ी-लिखी पत्नी को अपनी पति की ये दोनों बातें पसंद नहीं आतीं।
आज के जमाने की अधिकांश लड़कियां ऐसा पति चाहती हैं जो भावनात्मक सुरक्षा के साथ-साथ उनके हर कार्य में उन्हें सहयोग दे सके, इसलिए अपनी पत्नी को भटकने से बचाने के लिए पति के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह उसे पूर्णरूप से समझने का प्रयास करे, उसके दिल की गहराइयों में उतरकर झांकने की कोशिश करे व जाने कि वह उनसे क्या अपेक्षा रखती है।
पति का यह दायित्व बनता है कि वह पत्नी पर पूर्ण विश्वास करे व उसे भरपूर प्यार दे। आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत न होने पर पत्नी को प्यार से समझाने का प्रयास करें। उसकी किसी मांग पर उसे ताने देने की भूल कदापि न करें। उसके सुख-दुख में उसके साथी बनें। जीवन में उत्साह बनाए रखने के लिए परिवर्तन को अहम् स्थान दें। शारीरिक संबंधों में नवीनता लाते रहें।
पत्नी को भी यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि किसी गैर पुरूष के साथ उसके संबंध समाज में उसकी छवि तो बिगाड़ते ही हैं, साथ ही बच्चों पर भी इसका काफी बुरा असर पड़ सकता है।
यह सदैव याद रखें कि जिस पुरूष को पति से बेहतर मानकर आप उसके साथ ऐसे संबंध कायम करती हैं, वह आपको न तो दिल से प्यार करता है व न ही उसके मन में आपके लिए कोई सम्मान है। वह तो बस आपकी कमजोरी का फायदा उठाकर आपको इस्तेमाल कर रहा है इसलिए पति में खामियां ढूंढने की बजाय उनमें खूबियां ढंूढें।
बस जरूरत है तो थोड़े धैर्य व विश्वास की। फिर देखिए कैसे खुशियों से महकता है आपका घर-आंगन।
- भाषणा बांसल गुप्ता

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