पति की मित्र बनें, शासक नहीं

पति की मित्र बनें, शासक नहीं

अधिकतर परिवारों में देखा जाता है कि पत्नी या तो पति से दब कर रहती है या उस पर शासन करती है जबकि ये दोनों स्थितियां ही उसके जीवन को अंधकारमय बनाती हैं। अगर पत्नी सदा पति को ताने देगी, उसकी परेशानियों को समझने का प्रयत्न नहीं करेगी तो ऐसे में कौन-सा पति घर में रहना पसन्द करेगा? वह सच्चे सुख की तलाश में इधर-उधर भटकना आरंभ कर देगा। जरा सोचिए, अगर पति थका-मांदा शाम को घर लौटे और पत्नी उसका मुस्कुराकर स्वागत करने की बजाय अपनी फरमाईशें पूरी न करने के लिए ताने देने लगें तो क्या पति का मन क्षुब्ध नहीं हो उठेगा?
बहुत कम पत्नियां ऐसा समझ पाती हैं कि उनके पति उनसे क्या चाहते हैं। वे तो बस उन्हें खाना खिलाकर व अन्य कार्य करके ही अपना कर्तव्य पूरा कर लेती हैं जबकि उनके पति चाहते हैं कि वह मानसिक तौर पर भी उनके साथ जुड, उनके सुख-दुख को समझने का प्रयत्न करें व एक सच्चे मित्र की भांति सौहार्दपूर्ण व्यवहार करें।
एक शिक्षिका का कहना है, 'मैं न तो अपने पति पर फालतू रौब झाड़ती हूं और न ही मुझ पर किसी किस्म का दबाव है उनका। मैंने वैवाहिक जीवन का हर दिन उनकी मित्र बनकर जिया है। मैं उनकी परेशानियों को समझ कर उनको हल करने का प्रयास करती हूं। कभी उनके आगे बड़ी-बड़ी फरमाइशें नहीं रखती। यही कारण है कि विवाह के दस वर्ष बाद भी हम दोनों के मनों में वही चाहत है। फिर वे आगे कहती हैं, 'पति के दुख-सुख को समझना हर पत्नी का कर्तव्य है। एक अच्छे मित्र की भांति सौहार्दंपूर्ण व्यवहार करके ही वह पतिप्रिया बन सकती है। अगर पत्नी उन्हें नहीं समझेगी तो उनके कदम बहक सकते हैं।
जब पति को पत्नी के रूप में एक अच्छा मित्र मिलेगा तो वे बाहर क्यों जाएंगे। यह कहना अनुचित न होगा कि अधिकतर मामलों में पति के भटकाव का कारण घरेलू कलह ही होता है।
पति का दिल जीतने व उनका प्यार पाने के लिए उनसे एक सच्चे मित्र की भांति व्यवहार करें। फिजूलखर्ची से बचें व उन्हें सामर्थ्य से अधिक खर्च करने को न उकसाएं। उनकी परेशानियों को समझने का प्रयत्न करें व मानसिक तौर पर उनके साथ जुड़ें।
-भाषणा बांसल

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