दांपत्य जीवन रसमय बनायें

दांपत्य जीवन रसमय बनायें

दांपत्य जीवन के सुखमय और आनंदयुक्त आधार के लिए जितना दांपत्य प्रेम आवश्यक है, उतना ही आवश्यक सेक्स संबंध भी हैं। इन दोनों में से किसी का भी संतुलन गडबड़ा जाने से दांपत्य जीवन में नीरसता का आना स्वाभाविक है।
जब कोई पति उम्र के चढ़ते दौर में पत्नी को अपनी बाहों में लेकर प्रेमगीत सुनाए बिना ही उससे सेक्स संबंध स्थापित कर लेता है तब न तो दोनों के तनों की तृप्ति हो पाती है और न मनों की। पूर्ण तृप्ति के लिए मन व शरीर, दोनों का जुडऩा आवश्यक है।
एक दूसरे को सहलाना, दुलारना और प्रेम भरी बातें करना भी जरूरी है, पर जब ऐसा नहीं हो पाता है तो पत्नी अपने पति के दिन पर दिन बदलते व्यवहार और पुरूषार्थ को शक के घेरे में खींचने लगती है। इस हालत में कभी उसे पति की शक्ति पर शक पैदा होता है तो कभी उसके विचार पर। ऐसे वैचारिक झंझावातों से पत्नी दुष्प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाती। लिहाजा वह खुद भी इसे उम्र का परिवर्तन मान कर अपने मन को समझाने लगती है। प्रसिद्ध यौन चिकित्सा वैज्ञानिक प्रोफेसर प्रकाश कोठारी के अनुसार, उम्र के ढलते दौर में जो पति पत्नी अपनी जवानी को लेकर सवाल उठाते हैं और अधिक आयु के होते ही अपने को बुढ्ढा घोषित कर दंापत्य जीवन के आनंद को निष्क्रिय कर डालते हैं, वे मनोविकार के शिकार होते हैं। सेक्स जीवन के बारे में प्रचलित आम धारणा भी उनकी जवानी के भाव का सत्यानाश कर डालती है।
कुछ पतियों का यह भी भ्रम बना रहता है कि वे अपनी काम क्रिया से अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पाते जबकि वास्तविक स्थिति ऐसी नहीं रहती, पर ताज्जुब तो तब होता है जब महज ऐसे ही भ्रम को लेकर लोग अपने काम जीवन की समाप्ति तक मान लेते हैं। इस प्रकार वे काम जीवन के बिलकुल योग्य होते हुए भी नपुसंकता की ओर बढ़ जाते हैं। यदि किसी को लगे कि अब उम्र शारीरिक सुखों के उपभोग लायक नहीं रही या उसे भय सता रहा है कि उसके जीवनसाथी की मानसिक और शारीरिक रूचि कम हो रही है तो बगैर कोई चिंता पाले इस परिवर्तन का सूक्ष्म अध्ययन करना चाहिए। यौन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में प्राय: एक जैसे ही कारण होते हैं। इस कारण के मूल में होता है वैवाहिक जीवन के पहले वर्ष जैसे गरम गरम प्रेम और शारीरिक संबंधों को भोगने की मृग मरीचिका। इसी मृग मरीचिका की वजह से अक्सर 35 से 45 साल की उम्र के बीच का वैवाहिक जीवन संकटपूर्ण हो जाता है। यह संकट उस समय और घने रूप में सामने आ जाता है जब पति पत्नी मानसिक और शारीरिक दोनों रूपों में अपने को जवान नहीं महसूस कर पाते।
यौन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस अवस्था में भी पति सावधानी और चतुराई से प्रारंभिक दिनों जैसे प्रेम का प्रतिदिन न सही, कभी-कभी भी इजहार पत्नी से कर दिया करें तो पत्नी के मन में प्रेम और आनंद की गुदगुदी सी उठती रहेगी। ऐसी अपेक्षा पत्नियों से भी की जा सकती है, मसलन दफ्तर से घर लौटे पति को प्रेम से चाय देने के साथ ही अपनी बातों के मीठे अहसास से पति के मन को सहला दिया करें जबकि पति, आज तुम गजब ढा रही हो या ऐसे अन्य जुमले बोल कर पत्नी को यह अहसास करा सकता है कि पत्नी के हुस्न में अब भी पुरानी ताजगी बरकरार है और वह उसके हुस्न का अब भी दीवाना है। दांपत्य जीवन में उल्लास और मीठी उत्तेजना को बरकरार रखने के लिए प्रेम निहायत जरूरी चीज है। अक्सर देखा जाता है कि दांपत्य जीवन के इस दौर में प्रेम सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह जाता है। इसकी वजह से ही पति अपनी पत्नी हेतु सिर्फ कीमती साडिय़ां, गहने वगैरह खरीद कर या जन्मदिन व विवाह की वर्षगांठ आदि मना कर ही अपने प्रेम की इतिश्री मानने लगते हैं। कुछ लोग जो इससे आगे होते हैं, पत्नी को फूलों का गुलदस्ता देकर ही अपने प्रेम कर्तव्य का पालन कर लेते
हैं। सिर्फ यही काफी नहीं, पत्नी की आकांक्षा इससे भी आगे होती है। उसे सिर्फ इन्हीं औपचारिकताओं से पूरा नहीं किया जा सकता। उसे और गहरे प्रेम की जरूरत होती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए पत्नी का चुंबन लेने के साथ साथ उसके विशेष अंगों को प्यार से सहलाइए। किसी हसीन शाम को घर से बाहर निकल कर पार्क इत्यादि में चले जाइए। छुट्टी इत्यादि के दिन फिल्म व मनोरंजन का कार्यक्रम बनाइए। घर परिवार, बच्चों की जिम्मेदारी पूरी करने के बाद अपना ज्यादा से ज्यादा समय घर में बिताइए और इस समय में बातों की मिठास से पत्नी के सोए मन को जगाइए। उसे लगने लगेगा कि पति अब भी उसे पूरे मन से प्यार करता है। इस अहसास से सिर्फ दांपत्य प्रेम में वृद्धि नहीं होगी बल्कि उत्तेजना भी बढ़ेगी। पत्नी भी ऐसा ही व्यवहार करके अपने पति के मानसिक भाव प्रोत्साहित कर सकती है। बढ़ती आयु में सेक्स से अरूचि और प्रेम और उत्तेेजना में कमी आने का मूल कारण जीवन की समस्याओं से पैदा हुई उदासी, शारीरिक संबंधों से परहेज, दैनिक कामों की एकरसता, शारीरिक रूप रंग में परिवर्तन और सेक्स के बारे में और भी गलत धारणाएं हैं। इनसे निजात पाने के लिए मन का स्वस्थ होना जरूरी है। जिस प्रकार शरीर के ढीलेपन को चुस्त दुरूस्त करने के लिए व्यायाम या योग जरूरी है, उसी प्रकार एकरसता या अरूचि को दूर करने के लिए दैनिक योजनाओं में फेरबदल करके विविधता लाई जा सकती है। मनोवैज्ञानिकों और यौन विशेषज्ञों के अनुसार सेक्स से अरूचि होने का मूल कारण भी एकरसता ही है। पर सबके लिए जरूरी यही है कि मन को जवान रखा जाए। यदि मन जवान हो तो ढलती उम्र और शारीरिक परिवर्तन भी कोई अवरोध पैदा नहीं कर सकते। प्रेम और सेक्स, जीवन की ऊर्जा हैं। इनसे परहेज मुनासिब नहीं बल्कि इनका अधिक से अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। जवान बने रहने के लिए भी एकमात्र यही इलाज है।
- जमील अन्जुम

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