दामाद जब प्रथम बार ससुराल जाये

दामाद जब प्रथम बार ससुराल जाये

हर पुरूष के जीवन में वह दिन आता है जब वह विवाहोपरान्त अपनी पत्नी के साथ अपनी ससुराल या पत्नी के मायके जाता है। वैसे यह एक यादगार दिन होता है ससुराल वालों और दामाद दोनों के लिए।
यदि दामाद अधिक नाज नखरों वाला हो तो ससुराल वालों को अधिक ध्यान देना पड़ता है। जैसे कांच की नाजुक चीज़ों पर लिखा होता है 'हैन्डल विद केअर', इसी प्रकार ससुराल वालों को अपने दामाद को बहुत केअर देने की जरूरत होती है पर यह ठीक नहीं है। ससुराल भी आपका दूसरा अपना घर है, फिर यहां नाज़ नखरे क्यों?
यदि आप दामाद बन प्रथम बार ससुराल जा रहे हैं तो अपना इम्प्रेशन अच्छा बनायें। किसी को यह कहने का अवसर न दें कि दामाद कुछ ज्यादा नाज़ नखरों वाला है।
- ससुराल मेंं जाकर किसी भी व्यक्ति की बुराई या आलोचना न करें।
- ससुराल में स्वयं को 'विशिष्ट व्यक्तिÓ न मानें। न ही ऐसी उम्मीद रखें कि परिवार के सभी सदस्य आपके इर्द-गिर्द घूमते रहें।
- ससुराल के सदस्यों को नीचा न दिखाएं, न ही उन पर दोष थोपें।
- अपने परिवार की शानो शौकत के पुल न बांधें। उनकी हैसियत का मजाक न उड़ायें।
- शिष्टता के साथ परिवार के सभी लोगों से बातचीत करें। अपने व्यवहार को नार्मल रखें ताकि आपके स्वभाव से सभी प्रसन्न रहें और आपके स्वभाव की प्रशंसा करें। यदि कुछ कमी खातिरदारी में रह जाये तो नाराज़ होने की जरूरत नहीं क्योंकि हर इंसान आदर्श नहीं होता।
- ससुराल में उन बातों को लेकर बखेड़ा न डालें जो कमियां विवाह के समय रह गई थी। पुरानी बातोंं से मनमुटाव और कटुता बढ़ती है।
इन थोड़ी सी बातों पर ध्यान रख जब दामाद ससुराल जायें तो संबंध अधिक स्नेहिल होंगे।
- नीतू गुप्ता

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