आरोप-प्रत्यारोप दांपत्य कटु बताते हैं

आरोप-प्रत्यारोप दांपत्य कटु बताते हैं

यह एक निर्विवाद सत्य है कि सुखद दांपत्य जीवन ही सुखी परिवार की नींव है। जिस घर में पति पत्नी हर समय आपस में उलझते लड़ते-भिड़ते रहते हों, वहां का वातावरण तनावपूर्ण हो उठता है जिससे घर में रहनेवाले दूसरे सदस्य भी सहमे से रहते हैं चाहे वे बच्चे हो या बूढ़े मां बाप।
इंसान को अपनी गलतियां नजर नहीं आती। हमेशा वह दूसरे में कमियां ढूंढने में ही अपनी समस्त ऊर्जा खर्च देता है। यही हाल पति पत्नी का भी है। चूंकि वे क्लोज प्रॉक्सिमटी में रहते हैं अत: एक दूसरे के गुण दोष अच्छी तरह जान जाते हैं।
इंसान की फितरत है कि उसमें नकारात्मक पहलू हमेशा ज्यादा शक्तिशाली होता है। वह उसकी सकारात्मक भावना पर हावी होता है। ऐसे में पति पत्नी एक दूसरे के गुणों से आंखें मूंद कमियों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। यही आपसी झगड़े और कलह का कारण बन जाता है।
पति पत्नी जब जीवन भर साथ हैं तो यह तो संभव नहीं कि वे एक दूसरे की आलोचना कभी न करें, न टोकें, न कोई गलती बतायें लेकिन यहां ध्यान देने योग्य बात है कि वे कैसे टैक्टफुली अपनी बात जीवन साथी के सामने रखते हैं।
अब रजनी की ही बात लें। अक्सर मध्यवर्गीय पत्नियां पति से इस विषय को लेकर उलझ पड़ती हैं फिर से आप वही सड़े टमाटर उठा लाये। कल तो इतने फेंके ही थे मैंने, पैसे की बर्बादी की आपको जरा भी चिंता नहीं। 'यह रजनी थी किंतु यही बात शांताजी ने इस तरह कही-ये सब्जीवाले भी कितने चालू होते हैं। अंधेरे का फायदा उठा उसने सड़े टमाटर भेड़ दिये। पति देव ने हां में हां मिलाते हुए मिले सुर मेरा तुम्हारा गाया और वातावरण हल्का फुल्का बना रहा।
क्रोध करने से सड़े टमाटर तो ताजे होने से रहे, हां, तरोताजा मूड जरूर सड़ जाता है। यह बात समझने की है। महज टोन से ही जिंदगी में बहुत सी कटुताओं से बचा जा सकता है।
दांपत्य में आरोप लगाइए, जी भर के पति पत्नी पर, पत्नी पति पर लेकिन दोस्ताना और मजाकिया लहजे में जिससे कि गुबार भी निकल जाए और दूसरे को बुरा भी न लगे। यार, जानम प्रिये, श्रीमती/श्रीमान, डियर आदि संबोधन से कोई आलोचनात्मक बात भी कहनी हो तो इसकी आधी कटुता धुल जाती है।
बाकी आधी बात को मजाकिया पुट दे देने से दांपत्य में गलतफहमियां पैदा नहीं होगी क्योंकि जब वातावरण तनावयुक्त न होकर सहज ही होगा तो आरोप लगाये जाने पर दूसरा साथी भड़केगा नहीं बल्कि अपनी बात सहज रूप से समझा सकेगा।
- उषा जैन 'शीरीं'

Share it
Top