संकल्पों की रात

संकल्पों की रात

सुहागरात भावी जीवन की शुरूआत की रात होती है क्योंकि सुहागरात के रूप में सैक्स का तूफान इतना तीव्र होता है कि उसे जीवन में सब से ज्यादा मजबूत संवेग के रूप में स्वीकार किया जाता है। कुछ युवक युवतियां कॉलेज में एक दूसरे से प्रेम करते हुए विवाह कर लेते हैं लेकिन सुहागरात से पहले उन में इतना अंतरंग संबंध नहीं होता।
सुहागरात को नव विवाहित दंपति सुहाग कक्ष में एक दूसरे को स्पर्श करते या आलिंगनबद्ध हुए भावी जीवन की कल्पना को साकार कर सकते हैं लेकिन इससे पहले यह जान लेना चाहिए कि सुहागरात क्या है एवं एक सही वैवाहिक जीवन चलाने के लिए मिलन की पहली रात में क्या रवैया अपनाना चाहिए? सुहाग सेज पर जाने को तत्पर वर वधू को इसकी विशेष जानकारी होना आवश्यक है। खास तौर से पति के लिए तो इस की परिभाषा समझना आवश्यक है ही। इस शब्द की सार्थकता तभी है जब वर वधू सम्मिलित रूप से सैक्स के साथ जीवन की अन्य मूलभूत आवश्यकताओं को भी प्राथमिकता दें।
सुहाग सेज पर पत्नी को अपने आगोश में लेने के साथ पति को यह बात याद रखनी चाहिए कि पति पत्नी का कोई एक रात का साथ नहीं, जीवन भर का साथ है। एक रात के बाद दूसरी, फिर तीसरी, कितनी ही रातें आती हैं और फिर शारीरिक सौन्दर्य आकर्षण वस्त्रों के आवरण में ही अधिक आकर्षक लगता है। यदि उसे पहली रात को ही निर्वस्त्र कर दिया जाए तो फिर अगली रात के लिए क्या शेष रह जाता है? पहली रात को सब कुछ पा लेने से उस रात को आखिरी रात समझने की भूल आगे आने वाली रातों की सारी खुशियां छीन सकती है।
यह बात खासतौर से समझ लेने की है कि पत्नी में भी सैक्स की चाहत होती है और वह भी सुहागरात के क्षणों में पति के साथ सहवास में लीन हो कर पूर्ण आनन्द भोग लेना चाहती है। अब चूंकि इस प्रक्रिया में अपनी शारीरिक संरचना के कारण पति ही मूल चालक होता है, उस का दायित्व हो जाता है कि संतुलित सैक्स जीवन के लिए सुहागरात की उपयोगिता को महत्त्वपूर्ण मानते हुए वह सहवास क्रिया को पत्नी के अनुकूल बनाये।
औरत के कुछ विशेष अंग होते हैं जिन के द्वारा वह सर्वाधिक कामोत्तेजना महसूस करती है। यह जान लेने पर और पति की सहवास पूर्व इस क्रिया से पत्नी में सहज रूप से मदहोश कर देने वाली आकुलता व तड़प का भाव पैदा होगा और वह खुद किसी संकेत से पति को कह सकेगी-अब आओ भी। तब किन्हीं पलों में उतर जाने वाले सैक्स के इस तूफान में समझदार पति पत्नी के सहयोग से आजीवन भोग सकता है।
एक दूसरे के प्रति निष्ठावान व विश्वसनीय बने रहने का संकल्प भी आवश्यक है। पति पत्नी जब तक एक दूसरे के प्रति विश्वसनीय नहीं बनेंगे, उन में एक दूसरे के प्रति प्यार भी नहीं होगा। पति पत्नी के बीच कोई तीसरा न आ पाए जो उन के दांपत्य की खुशियों को नष्ट कर दे। ऐसे किसी तीसरे को रोकने के लिए पति पत्नी सुहागरात को एक दूसरे के विश्वासपात्र बन कर निष्ठावान बने रहने का प्रण कर सकते हैं।
पति पत्नी को एक दूसरे का सहयोगी बन कर आजीवन साथ रहना है। इसलिए पहली रात को एक दूसरे के हृदय में गहराई से उतरने के लिए एक दूसरे का सहयोगी बनना आवश्यक है। एक दूसरे का अधिक से अधिक विश्वासपात्र बनकर पति पत्नी अपने दांपत्य के भविष्य को अधिक सुखी बना सकते हैं।
सुहागरात तो सचमुच जीवन के लम्बे रास्ते पर नव विवाहित पति पत्नी के यात्र प्रारंभ करने का एक दोराहा है। उस दोराहे पर खड़े होकर पति पत्नी एक दूसरे से परामर्श करके आगे चलने के लिए संकल्प कर सकते हैं। ऐसे संकल्प जो उनके जीवन में सुख समृद्धि बनाये रख सकते हैं। उनकी सुख समृद्धि में यौन संबंध भी बहुत सहायक बन कर आजीवन साथ चलते हैं पर यदि मिलन की इस रात को संकल्पों की रात भी माना जाए तो यह वैवाहिक जीवन की सुदृढ़ आधारशिला भी बन सकती है।
- वीर सुरिन्दर डोगरा

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