आप और आपका सहकर्मी

आप और आपका सहकर्मी

प्रत्येक कार्यालय में कार्यकर्ता होते हैं। इनमें वाद विवाद रहता है क्योंकि हरेक इंसान के विचार अलग होते हैं। हमें किसी कार्य क्षेत्र में काम करते हुए संयम, सहनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए। इसके लिए निम्न बातों का रखें ख्याल:-
- व्यर्थ के वाद विवाद में न पड़ कर अपने काम से मतलब रखें।
- जिस जगह विचारों में तालमेल न बैठे, वहां बहस आदि छोड़कर उठ जाना ही बहतर होगा।
- अपने में न तो हीन भाव पैदा होने दें और न ही ईगो पैदा होने दें।
- मेल जोल बनाए रखें। जिस सहयोगी संग काम कर रहे हो, अगर वह आपके साथ ठीक ढंग से पेश न आएं अर्थात् ईगो में रहे तो उसका जवाब पत्थर से देने की बजाए शांत भाव रखें। उसे उसके हाल पर छोड़ दें। हो सके तो कुछ देर बातचीत कम करें।
- प्रत्येक इंसान अपने को बेहतर समझता है और दूसरों में ही दोष ढूंढ़ता है। बेशक कमी खुद में है, इसलिए किसी को उसकी गलती का अहसास नहीं कराया जा सकता।
- अपने कार्य में मगन रहें। किसी के कार्य में ध्यान न दें। अपना कागजी काम अप टू डेट रखें। दूसरों के लिए मिसाल बनें न कि निठल्ले बनें।
- आपको जो कार्य सौंपा गया हो उसे पूर्ण करें न कि रख कर समय पर पूछने पर न कह दें।
- अपने आपको सर्वश्रेष्ठ मानने की चेष्टा न करें। दूसरे आपसे बेहतर हो सकते हैं।
- अपने पहनावे पर ध्यान रखें। सभ्य पहरावा रख कर उम्र पर भी ध्यान दें।
- प्रत्येक छोटे, बड़े सहकर्मी को सम्मान से पुकारें न कि अपशब्द या नाम से बुलाएं।
- जो आपके साथ सहयोग दें। उसका धन्यवाद अवश्य करें। अपने से जूनियर सहकर्मी को नीचा दिखाने की कोशिश न करके सहयोगी बनें।
- माना आपका तजुरबा अधिक हो सकता है लेकिन नए सहकर्मी भी आपसे अधिक प्रतिभा रख सकते हैं
- किसी की तारीफ होने पर जलें नहीं, उसके कार्य से सीख लें।
-श्वेता कोहली

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