पज़ेसिव ब्वॉयफ्रैंड: तौबा

पज़ेसिव ब्वॉयफ्रैंड: तौबा

अमन जस्ट बी केयरफुल, मैं तुम्हारी बीवी नहीं हूं। यू कान्ट डिक्टेट मी- प्रेरणा ने अमन पर नाराजगी प्रगट करते हुए कहा। हुआ यह था कि प्रेरणा सतीश के किसी जोक पर दिल खोलकर हंस रही थी। अमन ने दूर से उन्हें देखा और सतीश के जाते ही अपनी गर्लफ्रैंड प्रेरणा पर बरस पड़ा। उसने जब यह कहा कि आगे से उस लोफर सतीश से बात करने की जरूरत नहीं, इस पर प्रेरणा ने उपर्युक्त शब्दों में रिएक्ट किया।

अमन दो पल को तो हक्का-बक्का रह गया। बात सच थी, प्रेरणा उसकी फ्रैंड ही तो थी, बीवी तो नहीं।

अमन जैसे कई लड़के अपनी गर्लफ्रैंड को लेकर इतने पजेसिव रहते हैं कि वे भूल जाते हैं कि कोई भी रिश्ता अविश्वास पर नहीं टिकता। हर रिश्ते में सांस लेने की जगह होनी चाहिए, कुछ स्पेस होनी चाहिए वर्ना रिश्ता दम तोडऩे लगता है।

मोनिका और रजत का रिश्ता इसीलिए टूट गया। उनकी दोस्ती तीन साल तक जरूर खिंचती रही लेकिन साल भर बाद से मोनिका को रजत का उसे लेकर जुनून की हद तक पजेसिव होना नागवार लगने लगा था।

पहले तो वह इसे उसका अपने प्रति प्यार समझकर बेहद खुश होती अपनी सहेलियों में डींगे मारती कि रजत उसे दीवानगी की हद तक चाहता है लेकिन उसकी आंखें तो तब खुली जब एक बार पार्टी में नक्श के साथ डांस करने पर रजत ने बेदर्दी से उसे खींचते हुए सबके सामने दो तीन थप्पड़ जड़ दिये। उनका ब्रेकअप तो तभी हो जाता लेकिन रजत ने फिर रोकर गिड़गिड़ाकर उससे मॉफी मांगते हुए भविष्य में कभी उसके आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचाने का वादा किया लेकिन अपने पजेसिव नेचर के कारण वो अपना वादा निभा नहीं पाया।

यह प्रॉब्लम सिर्फ लड़कों में ही देखते में नहीं आती। बहुत सी लड़कियां भी अपने बॉयफ्रैंड को लेकर अत्यंत पजेसिव होती हैं। दरअसल यह एक साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम है। कई बार तो वे एग्रेसिव होकर भी रिएक्ट करती हैं। कोई दूसरी लड़की उनके ब्वॉयफ्रैंड के करीब आने लगे तो एक्सट्रीम केसेज में वे सुपारी किलर हायर कर उस लड़की का काम तमाम करवाने की साजिश तक रच डालती हैं। हालांकि, ऐसा बहुत ही कम होता है मगर हो रहा है।

आजकल के युवा काम के साथ पूरी मौज मस्ती भी करना चाहते हैं। सच्चे प्यार में विश्वास रखने वाले अब बहुत कम लोग रह गए हैं। वे किसी एक से ज्यादा समय तक बंधकर रहना नहीं चाहते लेकिन जो पजेसिव होते हैं उन्हें यह बर्दाश्त नहीं होता। वे मरने मारने पर उतारू हो जाते हैं। इस तरह वे स्वयं तो मुश्किल में पड़ते ही हैं, फ्रैंड के साथ उसके फ्रैंड को भी मुश्किल में डाल देते हैं।

यह खुलेपन का जमाना है। बिंदास पीढ़ी का हंगामा और बोलबाला है। लाइफ को सिर्फ मौजमस्ती और एंटरटेनमेंट मानते हुए वे एक साथ कई-कई दोस्त रखते हैं जिसे उन्हें सहज रूप में स्वीकार करना चाहिए। समझदारी को ताक पर रख ऐसे रिश्तों पर पजेसिव हो एतराज करना किसी भी तरह उचित नहीं। अगर एक जोड़ी फ्रैंड्स शादी प्लान कर रहे हैं तो इसी बात को लेकर उनमें ब्रेकअप हो जाने की पूरी संभावना रहती है।

युवतियां कई बार शंकालु होने में युवकों को भी मात देती हैं जब कि उन्हें खुले दिमाग का परिचय देते हुए ब्रॉडमाइंडेड बनकर बॉयफ्रैंड की महिला दोस्तों के साथ कूल रहना चाहिए। तभी वे बॉयफ्रैंड को इंप्रैस कर पाएंगी।

इसी तरह युवकों को भी संकुचित मानसिकता छोड़कर गर्लफ्रैंड को अपनी पर्सनल प्रॉपटी न समझते हुए उसे बंधनमुक्त रखना चाहिए। तभी उनके रिश्ते मधुर रहेंगे।

युवाओं को अपनी सोच विस्तृत रखनी चाहिए, तभी वे लाइफ पूरी तरह एंजाय कर पाएंगे। जो अपना नहीं, उसे जबर्दस्ती अपना नहीं बनाया जा सकता। हां, अपने संतुलित, अच्छे व्यवहार से उसे जीतने की कोशिश जरूर की जा सकती है। पजेसिव बनकर तो सिर्फ गंवाया ही जाएगा।

एक सफल और सार्थक रिश्ता कायम करना है तो पजेसिवनेस से बचें ताकि आपकी फ्रैंड यह न कहे - पजेसिव ब्वॉयफ्रैंड, तौबा, तौबा।

- उषा जैन शीरीं

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