टूटने न दें इस रिश्ते को

टूटने न दें इस रिश्ते को

विवाह के बाद दंपति की आशाएं भिन्न हो सकती हैं जिससे दोनों के संबंधों पर प्रभाव पड़ सकता है। बड़े मुद्दों पर सहमति न होने पर गंभीर संघर्ष तथा जीवन को खतरा हो सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि दंपति परस्पर वार्तालाप करें। एक दूसरे को अपने विचार, भावनाएं तथा भविष्य के लिए अपने उद्देश्यों व कल्पनाएं भली-भांति समझा देनी चाहिए।

किसी भी अच्छे संबंध में झगड़े और मतभेद स्वाभाविक हैं। अलग-अलग मनोवैज्ञानिक पक्ष बताते हैं कि दंपति को यह समझना चाहिए कि वे एक दूसरे के स्वामी नहीं बल्कि सहायक हैं। विवाह एक साझेदारी है, स्वामित्व नहीं। व्यक्ति विवाह कर सबसे बड़ा जोखिम लेता है। एक सफल विवाह दिल, दिमाग, आत्मा और शरीर का मिलन है। वैवाहिक जीवन में समायोजन संपूर्ण जीवन में चलने वाली प्रक्रि या है।

शुरूआत में परिवर्तन पुरूष की अपेक्षा स्त्री के लिए अधिक नए होते हैं। उसे अनेक चीजों के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए अधिक समायोजन करना पड़ता है। महिलाएं अपने घर को छोड़कर एक नए घर में प्रवेश करती हैं जहां हर चेहरा नया होता है। माहौल अलग होता है। वहीं पुरूष के लिए यह समायोजन अधिक नहीं होता। उसे सिर्फ अपनी पत्नी के साथ मिलना होता है, अत: पति-पत्नी दोनों को समझदारीपूर्वक कोई भी कदम उठाना चाहिए ताकि पूरी जिंदगी नरक न बन जाए।

वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाने के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है:-

- जिंदादिल बनने की कोशिश करें। यह आपकी जिंदगी को स्वर्ग बना देगा।

- कुछ आशातीत व मधुर कार्य कर एक दूसरे को चकित कर दें।

- अपने यौन जीवन में आनन्द लाएं।

- संपूर्ण दांपत्य जीवन में प्यार से रहिए। हंसी-खुशी तो इसके अनमोल मोती हैं।

- समय के अनुरूप बदलना चाहिए। जीवन में दोनों में परिवर्तन आता है।

- छोटी मोटी समस्याओं को आपसी बातचीत से तुरंत सुलझाएं। एक दूसरे पर दोषारोपण करने से समस्या और बढ़ जाती है।

- वैवाहिक वचनबद्धता को निभाया जाए।

- मिलकर भविष्य की योजना बनाएं। बिना हुकूमत अथवा ईर्ष्या के एक दूसरे को विकास का अवसर प्रदान करें।

- एक विषय को सामने रखें। पिछले झगड़े को न रखें। सबके सामने न झगड़ें। एक दूसरे को ठेस पहुंचाने वाले शब्द न बोलें, कही हुई बात वापस नहीं ली जा सकती।

- स्थिति के अधिक तनावपूर्ण होने पर थोड़ा समय लेकर ठंडे दिमाग से सोचें, सूत्र को पकड़ें तथा यथाशीघ्र समस्या को सुलझाएं।

- कभी भी संबंध समाप्त करने की धमकी न दें। इससे रिश्ते में स्थायी दरार पड़ सकती है।

- यदि समस्याओं का समाधान नहीं होगा तो दोनों का जीवन अप्रसन्न व दुखदायक हो सकता है।

- पंकज भूषण पाठक

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