एक दूजे को समझना जरूरी है

एक दूजे को समझना जरूरी है

दो व्यक्ति कभी बिलकुल एक सी विचारधारा के नहीं हो सकते, न ही उनकी पसंद, हॉबीज बिलकुल एक जैसी हो सकती हैं। फिर स्त्री और पुरूष के शौक कुछ तो भिन्नता लिए होंगे ही। दंपति को चाहिए कि वे एक दूसरे की खुशी को ध्यान में रखते हुए एक दूसरे के शौक और जज्बात की कद्र करें। अपने शौक और जज्बात दूसरे पर न थोपें। तभी वे अपनी गृहस्थी सुचारू ढंग से चला पाएंगे।

दांपत्य की सफलता के लिए पति पत्नी दोनों को ही एक दूसरे को समझना चाहिए। यह समझ दो चार दिन में प्राप्त नहीं होती। इसमें कुछ समय लगता है। साथ रहते-रहते वे एक दूसरे के बारे में बहुत कुछ जानते हुए भी कई बार मानसिक रूप से जुड़ नहीं पाते व दूरी बनी रहती है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए नियमित एवं स्पष्ट संवाद होना जरूरी है।

जहां पति पत्नी में संवादहीनता की स्थिति बनी रहती है, वे जीवन भर एक दूसरे को समर्पित होते हुए भी समझ नहीं पाते हैं। यह नहीं कि उनमें प्यार नहीं होता या वे एक दूसरे के वेलविशर, भला चाहने वाले नहीं होते किंतु अपनी नासमझी के कारण वे जीवन का असली सुख नहीं भोग पाते और उन्हें इस बात का अहसास तब होता है जब उनमें से एक अकेला रह जाता है।

पति पत्नी एक दूसरे के बात कहने के तरीके को समझ लें तो उनमें झगड़ा होने का मौके कम ही आयें। पति पुरूष मनोविज्ञान, स्त्री मनोविज्ञान पर कई पुस्तकें लिखी गई हैं जिन्हें लाखों लोगों ने पढ़ा भी होगा। उसके बावजूद वे अपने दांपत्य में उलझाव पैदा करते रहते हैं जबकि कई गंवई गांव के दंपतियों में परफैक्ट अंडरस्टैडिंग देखने को मिलेगी। इससे यह तो सिद्ध हो ही जाता है कि यह समझ केवल किताबें पढऩे से ही नहीं आती। इसके लिए बेसिक चीज जो है वो है निश्छल सच्चे प्यार का जज्बा। जिसके लिये दिल में प्यार है उसे व्यक्ति कभी गलत नहीं समझता।

पति पत्नी भी तो आखिर इंसान ही हैं। मानवीय कमजोरी उनमें भी होना लाजमी है। क्र ोध, ईष्र्या, शको सुबहा, स्वार्थ लालच थोड़ा बहुत हर स्त्री पुरूष में होता ही है। ये नकारात्मक प्रवृत्तियां हैं जिन्हें पूरी तरह तो साधु संत ही जीत पाते हैं यह बात मानकर चलें और पति पत्नी एक दूसरे को वो जैसे भी हैं स्वीकार कर चलें तभी दांपत्य सफल हो सकता है। अधिकतर झगड़ों का कारण अनावश्यक, लैक्चरबाजी और अपनी ओर से आंखें मूंद दूसरे को सुधारने की पुरजोर कोशिश होती है। उससे जीवन साथी विद्रोह पर आकर ठीक विपरीत व्यवहार करने लगता है।

अक्सर झगड़े की वजह आपस में होने वाली गलतफहमी होती है और होता है इगो। जीवन में निस्संदेह ईगो का भी महत्त्व है लेकिन यह पति पत्नी के बीच नहीं होना चाहिए। कोई भी पति पत्नी हों, उन्हें यह बात कभी नहीं भूलनी चाहिए कि एक खुशहाल दांपत्य वो नेमत है कि जिसके होने से वे हर कठिनाई, परेशानी आसानी से पार कर सकते हैं।

-उषा जैन शीरीं

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