जब दांपत्य में ऊष्मा घटने लगे

जब दांपत्य में ऊष्मा घटने लगे

अनुभूति और तथागत के विवाह को अभी सात वर्ष पूरे नहीं हुए हैं पर 'सेवन ईयर्स इच' की स्थिति उन्हें बुरी तरह सालने लगी है। जीवन को नीरसता ने आ घेरा है। वही रूटीन-वही भागदौड़ वाली जि़न्दगी। कार्यभार होने के कारण अनुभूति अपनी दोनों बेटियों सीता और मीता को भी समय नहीं दे पाती। उनकी परवरिश उसे मात्र बोझ प्रतीत होती है। अनुभूति स्कूल में टीचर है। वह क्लास के बच्चों पर भी खीज ही निकालती है। पढ़ाने में उसे कोई दिलचस्पी नहीं। पैसों के लिए जॉब करना उसकी मजबूरी है।

मनोचिकित्सक डॉ. रश्मि बजाज कहती हैं 'वैवाहिक जीवन में यह नितांत आवश्यक बात है कि नयापन बरकरार रखा जाए। रूटीन तोड़कर एक दूसरे के लिए समय निकालें, कुछ देर के लिये जीवन की जद्दोज़हद पूरी तरह भुलाकर एक दूसरे के प्यार में आकंठ डूब जाएं। पुराने रोमांस को फिर जगाएं।'

दरअसल बाह्य जगत की छोटी-छोटी बातों को पति पत्नी कई बार अनावश्यक अहमियत देकर अपना तथा अपने साथी का सुख चैन बर्बाद करते हैं। उसमें जरूरत से ज्यादा 'इन्वॉल्व' होने की जरूरत नहीं। जीवन कभी रूकता नहीं। वह अपनी गति से आगे बढ़ेगा। इसके साथ ही आपके काम भी रूकेंगे नहीं। उन्हें बोरियत का सामान न बनने दें। उन्हीें में खुशियां छुपी हैं, यह मानकर चलें। नज़रिया बदलते ही आप 'रिलेक्स' फील करेंगे।

प्यार का इजहार करें:- प्यार को 'गूंगे का गुड़' न बनाएं। इस मधुर एहसास का समय-समय पर इज़हार जरूर करें। आई लव यू, कहने से संस्कारों के कारण झिझकते हों तो कोई बात नहीं। अपना एक्सप्रेशन स्वयं ईजाद करें। जब आंखें बोलती थी, वो जमाना तो रहा नहीं, इसलिए प्यार के मीठे शब्द तो आपको बोलने ही होंगे। पति की 'ईगो' कभी-कभी संतुष्ट करती रहें।

इसी तरह पति को भी पत्नी के सौंदर्य की तारीफ में कमी नहीं लानी चाहिए। उसके गहने कपड़ों की ओर ध्यान दें और रूप सज्जा की भरपूर प्रशंसा करें। आप उन्हें किस रूप में ज्यादा पसंद करते हैं, कौन सा कलर, कौन सी डेऊस, साड़ी उस पर ज्यादा अच्छी लगती है, पत्नी को अवश्य बताते रहें।

उपहारों का आदान प्रदान करें:- उपहार किसे अच्छे नहीं लगते? खासकर अपने प्रिय की दी वस्तु का मोल अनमोल है। जरूरी नहीं कि उपहार दामी ही हों। चीज काम में आनेवाली हो, पसंद की हो, यह उपहार देते वक्त जरूर ध्यान रखें।

याद रखें कि उपहार के लिए किसी मौके की तलाश में वक्त न गुजर जाने दें। प्रिय के लिए कोई भी वक्त मौका बन जाएगा।

छोटी-छोटी कमियां नजरअंदाज करें:- हर व्यक्ति का अपना व्यक्तित्व होता है। अपने व्यक्तित्व को दूसरे पर न लादें चाहे वे पति पत्नी ही क्यों न हों। अक्सर झगड़े का कारण अपने को दूसरे पर थोपना ही होता है। दूसरे की पसंद अलग है तो उसका मजाक न बनाएं। ऐसा अपने को 'सुपीरियर' समझने की भूल के कारण होता है। कोई भी व्यक्ति संसार में संपूर्ण नहीं हो सकता। कमियां सब में होती हैं। आपके साथी में भी हैं तो कोई असामान्य बात तो नहीं है।

जो बातें आप शुरूआती दौर में नजरअंदाज कर जाते थे, वे बाद में क्यों नहीं कर पाते? इसका जवाब स्वयं ढूंढिए। प्यार की घटती लौ में कुछ मधुर अहसासों का तेल और डालिए। फिर देखिए आपके दांपत्य में प्यार की लौ फिर से जगमगा कर ऊष्मा बढ़ाएगी।

अकेलापन बांटें:- हर समय साथ रहते हुए भी पति पत्नी भीतर से कई बार नितांत एकाकी होकर रह जाते हैं, अपने-अपने द्वीप में कैद। डरे-सहमे, असुरक्षित, डिप्रेस्ड और बहुत उदास एवं तनावग्रस्त। अपना सलीब अकेले ढोते हुए।

पति पत्नी दो जिस्म एक जान बनकर रहें तो जीवन आनंदमय हो सकता है। लाइफस्टाइल कैसा भी हो, हाईफाई या मध्यवर्गीय, सरल सीधी सादी क्वालिटी ऑफ लाइफ बढिय़ा होनी चाहिए और यह तभी संभव है जब आपसी ताल मेल बढिय़ा हो। अपनी आकांक्षाओं को दिल के कोने में छिपा कर न रखें। उन्हें अपने साथी से शेयर करें। उन्हें समझें। समझते रहने की लगातार 'सिंपेथेटिक' कोशिशें करें। आपकी समझ जितनी परिपक्व होगी, उन्हें समझना उतना ही आसान होगा।

कामकाजी पति पत्नी व्यस्त रहने के कारण एक दूसरे को बहुत वक्त नहीं दे पाते और इस कारण कई बार आपसी संबंधों में दरार आने लगती है लेकिन इससे पहले कि यह दरार आपके आशियां को चूर-चूर कर दे, अपने दांपत्य में जोश, आनंद और प्यार का मसाला भर उसे पुख्ता बना लें।

- उषा जैन शीरीं

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