अच्छी जीवन साथी बनें

अच्छी जीवन साथी बनें

पत्नी ही पति की एक ऐसी करीबी दोस्त होती है जिसके साथ वो अपने गम और खुशियां बांट सकता है। पत्नी ही बच्चों और घर की देखभाल करती है। वह हर कदम में पति के साथ है किंतु कई बार वह पति की भावनाओं को ठीक से समझ नहीं पाती जिससे वो दुखी हो जाती है हालांकि वह खूबसूरत है, बुद्धिमान है और हर चीज में बेहतर है।

पति-पत्नी को एक दूसरे पर विश्वास होना चाहिए। उन्हें अपनी समस्याएं मिल बांट कर सुलझानी चाहिए। यदि पत्नी घर में ही रहती है तो जब तक उसका पति कार्यालय नहीं चला जाता, उसे पति के साथ रहना चाहिए और तैयार होने में उसकी मदद करनी चाहिए। उसके दफ्तर जाने के बाद वह आराम से गृहकार्य कर सकती है। शाम को खाना खाते समय भी दिन भर के कार्यों के बारे में बातचीत करनी चाहिए।

अपने पति का इतना ध्यान रखना चाहिए कि वह मजबूर हो जाये यह कहने को कि मैं तुम्हें अत्यधिक प्यार करता हूं और तुम्हारे बिना मेरा जीवन अधूरा है। एक अच्छा साथी होने के नाते पत्नी को पति की भावनाओं का आदर करना चाहिए।

पति का प्यार पाने के लिए पत्नी को अपने सास-ससुर का भी ध्यान रखना चाहिए। औरतें सास-ससुर की छोटी-छोटी बातों को पति के सामने समस्या बनाकर रखने लगती हैं तथा उन्हें हर बात में गलत सिद्ध करती हैं जो बिलकुल गलत बात है। औरतों की सहनशक्ति और प्रसन्नता बढ़ सकती है यदि वे सास-ससुर को पति के माता-पिता न समझकर अपने माता-पिता समझें। औरत यदि आशावादी रहें, हर चीज की साफ तस्वीर ईमानदारी से पति के समक्ष रखें, विचारों का सकारात्मक आदान-प्रदान हो तो दांपत्य जीवन और भी खुशहाल हो सकता है।

जहां तक संभव हो सके, दिन में न सोयें और हां, यदि घर के बाकी सदस्य गृहकार्यों में लगे हों और आप बहाना बनाकर सो रही हों तो आप अपने आप को धोखा दे रही हैं। ऐसा करने से आपके सास ससुर और पति के मन में आपके प्रति प्यार, आदर और रिश्तों का अपनापन कम हो सकता है। अपने पति और परिवार के प्रति आपके व्यवहार में सभ्यता, नम्रता और प्यार का विशेष स्थान रहना चाहिए।

कुछ औरतें शादी के बाद पति की पोशाक आदि पर ज्यादा ध्यान नहीं देती क्योंकि उनके दिल में नकारात्मक सोच जन्म ले चुकी होती है कि अगर मेरे पति सज-धजकर रहेंगे तो उनके साथ काम करने वाली महिलाएं उनकी तरफ ज्यादा आकृष्ट होंगी। पति के दिल को जीतिये। वह आपकी खूबसूरती पर नहीं बल्कि आपके व्यवहार पर खुश होंगे। साथ-साथ बाहर घूमने जाइये। इस तरह आपके संबंध घनिष्ठ होंगे। बिना कारण नाराज न हों। एक दूसरे की आलोचना न करें। ऐसा करके ही आप इस पवित्र रिश्ते को बरकरार रख सकती हैं और एक खुशहाल जिंदगी जी सकती हैं।

- सुरेन्द्र डोगरा निर्दोष

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