पत्नी से बलात्कार अमानवीय

पत्नी से बलात्कार अमानवीय

सीमा के विवाह को दस बरस हो चुके हैं। चार बच्चे हैं। उनका संयुक्त परिवार है और घर इतना बड़ा नहीं जहां बहुत प्राइवेसी हो। पति को यह दिखाई नहीं देता। बिजऩेस होने से समय की ऐसी खास पाबंदी भी नहीं है। पति महोदय को वक्त बेवक्त हमबिस्तर होने का जुनून चढ़ा रहता है। कमरे से निकलने के बाद सीमा जवान ननदों और सास से आंख नहीं मिला पाती लेकिन पति महोदय को इस बात से कोई सरोकार नहीं। उन्हें तो बस अपनी इच्छा पूर्ति चाहिए।

आखिर हम सभ्य समाज में रहते हैं जहां सबसे शालीनता के दायरे में रहना अपेक्षित है मगर चूंकि समाज में पुरूषों का ही वर्चस्व रहा है, सेक्स के मामले में भी पति की चाहत ही सर्वोपरि है। स्त्री को अपनी इच्छा अनिच्छा प्रकट करने का अधिकार नहीं।

सेक्स के साथ मर्दों की मर्दानगी जुड़ी होती है। उनका अहम उन्हें यह मानने पर उकसाता है कि वे जितने ज्यादा सेक्सुअली एक्टिव होंगे, वे उतने ही बड़े मर्द सिद्ध होंगे। कई प्रसिद्ध हस्तियां जैसे गायक, कलाकार, लेखक, खिलाड़ी, लाइमलाइट में रहने वाले ग्लैमरवल्र्ड से जुड़े लोग अपने विवाहेत्तर संबंधों का बड़े फख्र से ढिंढोरा पीटते हैं। इसके पीछे भी यही कारण है, अपनी मर्दानगी का एजर्शन।

सेक्स करना या न करना पति पत्नी दोनों की सम्मिलित रज़ामंदी पर निर्भर होना चाहिए। इसमें पति द्वारा जबर्दस्ती बलात्कार की श्रेणी में आती है। माना यह पति पत्नी का वैयक्तिक मामला है और भारतीय नारी में असीम सहनशीलता होती है। कुछ समय तक वह हर अपराध को माफ भी करती है और ऐसा करना शायद कुछ हद तक उसके हक में ही होगा। जरा सी बात का बतंगड़ बनाना या बनाने के लिये उकसाना कतई ठीक नहीं लेकिन हर चीज की सीमा होती है। पति अगर ज्यादती पर उतर आये तो उसे सबक सिखाना ही चाहिये। यहां कानून भी स्त्री के हक में है।

एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 35 प्रतिशत पत्नियां बलात्कार की त्रासदी से गुजरती हैं लेकिन वे इसे एक अत्यंत व्यक्तिगत गोपनीय मामला मानकर कानून की शरण में जाने से साफ इंकार करती हैं।

इंडियन पीनल कोड की धारा 375 के अधिनियम के अंतर्गत बलात्कार के जुर्म में पति को अपराधी माना जायेगा और धारा 375 के तहत दोषी साबित होने पर पति को सात या चौदह वर्ष तक की कठोर सजा हो सकती है।

इसके अलावा पत्नी को उसकी इच्छा के विरूद्ध सेक्स के लिये प्रताडि़त करना, खामोशी से अपनी बात मानने के लिये धमकाना भी काननून अपराध है। इसके लिये इंडियन पीनल कोड की धारा 3०2 लागू हो सकती है। यह पति पत्नी दोनों के संदर्भ में समान रूप से लागू होगी।

सेक्स आज भी सभ्य समाज में वर्जित विषय है। शर्म और 'लोग क्या कहेंगेÓ सोचकर पति द्वारा बार-बार बलत्कृत होने पर भी स्त्रियां कोर्ट में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाती। यहां तक कि वे किसी से भी उसका जिक्र तक नहीं करती। चाहे वे बाह्य रूप से कितनी ही आधुनिक ही क्यों न दिखती हों, भीतर से वे इतनी बोल्ड कहां हो पाती हैं।

पति की तरफ से सेक्स में अति होने पर स्त्री के शरीर और मन दोनों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अगर स्त्री न कहती है तो पति को इस पर विचार करना चाहिए कि जरूर कोई कारण होगा। जहां खुशनुमा सेक्स पति पत्नी दोनों के स्वास्थ्य के लिये अच्छा माना जाता है, वहीं पति द्वारा की गई जबर्दस्ती स्त्री को बेहद तनावग्रस्त, डिप्रेस्ड और चिड़चिड़ा बना देती है। उसे लगता है मानो उसकी कोई अहमियत ही नहीं। पति की हवस शांत करने का माध्यम भर है।

उसे शारीरिक व्याधियां घेर सकती हैं। उचित हारमोनल स्राव के अभाव में उसे लोकल घाव और यूरिन इंफेक्शन सकता है। गर्भाशय की प्रॉब्लम्स हो सकती हैं।

कई पति सेक्स को लेकर मनोविकृतियों के शिकार होते हैं। अप्राकृतिक सेक्स में वे आनंद ढूंढते हैं चाहे पत्नी को कितनी ही तकलीफ क्यों न हो।

कई बार पति से ज्यादा कमाने वाली, उससे ज्यादा इंटेलिजेंट पत्नी को नीचा दिखाने के लिये पति सेक्स को हथियार की तरह इस्तेमाल करता है।

स्त्री का कसूर यहां पति से वनअप होना है। यह महज पति के दिमाग का फितूर हो सकता है।

स्त्री के लिये सेक्स महज शारीरिक क्रिया ही नहीं, पति से लगाव व प्यार का इजहार है। पति जब इसे पावर गेम मानकर या मेकेनिकल एक्ट बनाकर अपनी असंवेदनशीलता का परिचय देते हुए रौंदता है तो वह तड़प उठती है। जबर्दस्ती तो जानवर भी नहीं करते, फिर पति तो पुरूष है जिसके पास ईश्वर प्रदत्त अहसास होते हैं, सोचने समझने की शक्ति होती है। वह बलात्कार द्वारा पत्नी की नजरों में अपने को नीचे गिरा लेता है।

कई बार ओवर सैक्स्ड या नॉर्मल होना किसी पति के अपने वश की बात नहीं होती। वह पत्नी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता, न ही उसका दिल दुखाने जैसी उसकी मंशा होती है पर उसका अपने पर नियंत्रण नहीं होता। ऐसे में उसे जरूरत है कुछ काउंसलिंग, कुछ डॉक्टरी सलाह की। आयुर्वेद में भी ऐसी समस्याओं का समाधान है।

पत्नी की भी इच्छा-अनिच्छा हो सकती है, पति को यह नहीं भूलना चाहिए। पति पत्नी की शरीर की मांग अलग-अलग वक्त में हो सकती है। जैसे और बातों में पति पत्नी तालमेल बिठाकर चलते हैं, सेक्स में तालमेल होना जरूरी है। तभी वैवाहिक जीवन सफल हो पाएगा।

उसमें पूर्णता आ सकेगी। सेक्स दोनों की बायलॉजिकल नीड है। यह भी एक किस्म की भूख है जिसे तृप्ति चाहिए। एक खूबसूरत अहसास को सिर्फ थोड़ी सी नासमझी के कारण बदमज़ा न करें।

बलात्कार एक नेगेटिव एक्ट है जो नफरत से जुड़ा है। जहां सच्चा प्यार है वहां समन्वय परमानंद बन जाता है, बलात्कार की तरह एक के लिये सेडिस्टिक प्लेजर और दूसरे के लिये चोटिल अहसास नहीं।

- उषा जैन 'शीरीं'

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