पति-पत्नी के बीच तीसरा क्यों

पति-पत्नी के बीच तीसरा क्यों

पारिवारिक जीवन में यदा-कदा ऐसी समस्याएं आ जाती हैं जो देखने में मामूली सी लगती हैं पर इनकी जड़ें इतनी गहरी होती हैं कि संपूर्ण खुशहाल जिंदगी को विषाक्त कर देती हैं।

ऐसी ही एक गंभीर समस्या है पति-पत्नी के मधुर संबंधों के बीच किसी तीसरे का आना या हस्तक्षेप करते रहना। पति-पत्नी का संबंध जितना गहरा और अटूट प्रतीत होता है उतना ही नाजुक भी होता है। उनके बीच कोई दखलअंदाजी करे चाहे वह अत्यंत प्रिय व्यक्ति ही क्यों न हो, वे उसे सहन नहीं कर पाते हैं।

जीवनसाथी जब किसी तीसरे को वही प्रेम और सम्मान देने लगते हैं तो आपसी कटुता बढऩे लगती है लेकिन कभी-कभी तो महज शक के आधार पर परिवार टूट जाते हैं। अधिकतर महिलाएं इसकी शिकार होती हैं लेकिन यह भी तो नहीं कहा जा सकता कि पुरूष इसके अपवाद हैं। स्त्री भावुक होती है पर अपनी भावनाएं स्वयं में समेटे रखती है तथा भीतर ही भीतर घुटती रहती है। कई बार तो उसकी यह मानसिकता उसे ही बर्बादी के कगार पर पहुंचा देती है।

रेखा सहाय, जो एक स्कूल शिक्षिका हैं, उनकी समस्या कुछ इस प्रकार है। वे अपने एक पुरूष मित्र पर पूर्णत: निर्भर होती चली गई। हर छोटे-मोटे काम और जायज-नाजायज बातों को उनके द्वारा अपने परिवार पर लादने की कोशिश करती हैं।

'पहले तो गोपी सहाय भी यह सब सहन करते रहे तथा उन्होंने हमारा समर्थन कियाÓ रेखा कहती हैं, पर अब तो वह घर में हंसते-बोलते ही नहीं। आखिर मैं बुरी तो नहीं। अपने ही परिवार के लिए तो करती हूं।

रेखा जैसी अनेक महिलाएं हैं जो जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई से मुंह मोड़ती हैं। विवाह जैसे पवित्र रिश्ते और परिवार जैसी संस्था आपसी प्रेम और विश्वास के आधार पर चलती है। कभी-कभी हल्की चुहलबाजी तथा अनपेक्षित व्यवहार भी भारी गंभीर तथा माहौल को दुख भरा बना देते हैं।

मिसेज नीतू कहती हैं-मैं कुछ भी करूं, उन्हें बुरा लगता है। चाहे जितने अच्छे ढंग से खाना बनाऊं उन्हें मुझ में कमी ही नजर आती है लेकिन मेरी पड़ोसिन के घर से चाय भी पीकर आते हैं तो कहते हैं 'वाह क्या कमाल का जादू है उसके हाथों में'। मुझे लगता है कि वे मुझे जलील करते हैं। उससे मेरी तुलना करने की कोशिश करते रहते हैं।

नीतू अब अपने ही परिवार में ऊबने लगी है। नीतू जैसी बहुत सी महिलाएं अपने ही घर में स्वयं को अलग-अलग पाती हैं तथा स्वभाव से भीरू होने के कारण न तो समझौता करती हैं और न ही विद्रोह।

हो सकता है कि आपके जीवनसाथी दिनभर कठिन या दिमागी कार्यों में व्यस्त रहते हों, तभी तो वे आपके सुस्त और वजनदार व्यवहार को वहन करने के बजाय किसी हल्के और आकर्षक और चुलबुले व्यक्ति को तलाशते हों। जरा सोचिए आप इसके विपरीत तो नहीं?

'वाह, वाकई बहुत चुलबुली है, लेकिन मेरे पति के साथ उसका उठना-बैठना, हंसना-बोलना कुछ अजीब सा लगता है मुझे। कहीं वह मुझे ही परिवार से दूर तो नहीं कर रही?' एक ग्रामीण किस्म की साक्षर महिला का कहना है 'मेरे पति बहुत क्रोधी हैं। मैं क्या करूं सिवाय अपने मैके रहने के।'

यह तो आपके पति की समस्या का हल हो सकता है, आपका नहीं। ऐसे लोगों में ही कहीं कोई कमी जरूर रहती है पर उसे देखने सुधारने के बजाय एक दूसरे पर दोषारोपण करते हैं तथा स्वयं से ही आंखें चुरा कर बचने की कोशिश करते हैं।

बदलते परिवेश में मानसिकता का बदलना स्वाभाविक है पर कब, कितना, उचित-अनुचित, इसका ध्यान रखना भी बहुत जरूरी हो गया है। वैसे भी आजकल विकृत मानसिकता और उच्च सभ्यता को छोड़ और नकल में जाने कितने परिवार विगलित हो रहे हैं। अत: इस परिप्रेक्ष्य में निम्न बातें सामने आती हैं जिन्हें समझना हितकर होगा:-

आज के बदलते सामाजिक परिवेश में महिलाएं पुरूषों के साथ हर क्षेत्र में कार्यशील हैं। दोनों एक-दूसरे को दोस्त समझते हैं तथा साथ देते हैं लेकिन अपोजिट सेक्स में हमेशा आकर्षण बना रहता है। थोड़ी सी भी लापरवाही और असंयमित व्यवहार संबंधों को बिगाड़ सकता है।

हो सकता है कि आप एक सजग तथा समझदार जीवनसाथी हैं। फिर भी आपका साथी भटक रहा हो या मूलत: उसकी प्रकृति ऐसी हो, तब भी धैर्य न खोयें तथा सब कुछ सहजता से लें ताकि आपका जीवनसाथी यह जान भी न पाये कि आपका इरादा इसकी वृत्तियों पर नजर रखने का है।

साहसपूर्ण कार्य होगा कि आप अपनी भावनाओं पर काबू रखें। फिर भी कोई भी व्यक्ति नहीं चाहेगा कि छोटी सी गलती के कारण परिवार में बिखराव आये।

कहा भी गया है कि औरत घर की लक्ष्मी है। थोड़ी सी समझदारी और सावधानी से वह घर को स्वर्ग बना सकती है। तो क्यों नहीं आप परिवार को राहुओं से बचा सकती।

आखिर क्या कारण है कि पति का झुकाव किसी दूसरी औरत की तरह होने का? आप पायेंगी कि कोई न कोई खूबी इस औरत में जरूर है। तो आप भी स्वयं को निखारिये उस ढांचे में। अपने साथी को विश्वास में लीजिए और यह जताइये कि आप उनकी गलतियों को भूल सकती हैं क्योंकि आप उन्हें बहुत प्यार करती हैं।

कहीं आप लापरवाह तो नहीं हो गयी हैं क्योंकि सौंदर्य, मृदुता और आकर्षण पुरूषों की कमजोरी होती है। अत: इन बातों पर ध्यान जरूर दें।

अगर आपके पति की कोई ऐसी दोस्त है जिसे आप पसंद नहीं करती या ऐसा लगता हो कि आपके हित में नहीं है तो उससे कतराइये नहीं। नफरत जाहिर करने के बजाय उससे बातें कीजिए, करीब जाइये तथा बातों-बातों में घुमा-फिरा कर या फिर स्पष्टत: अपनी पसंद या नापसंद की बातें कह डालिये। यदि आप सजग हैं तो आपका मधुर रिश्ता हमेशा मधुर रहेगा।

- तारा 'सत्याग्रही'

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