पति की पूर्व प्रेमिका को लेकर कलह न करें

पति की पूर्व प्रेमिका को लेकर कलह न करें

सुमन को अपनी खूबसूरती पर बहुत घमंड था। माता पिता समृद्ध थे, सुमन की हर ख्वाहिश पूरी करते। सुमन के पापा की फैक्ट्री में संजीत बतौर इंजीनियर कार्यरत था। संजीत हैंडसम तो था ही, खुशमिजाज प्रभावशाली व्यक्तित्व भी रखता था। सुमन ने पहली ही नजर में उसे अपना दिल दे दिया। अब रात दिन सोते जागते वह संजीत को सपने में देखने लगी। उसने पापा को फैसला सुना दिया कि शादी करेगी तो सिर्फ संजीत से।

हालांकि स्टेटस में फर्क होने की वजह से सुमन के पापा आसानी से इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं हुए लेकिन बेटी की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा। संजीत अपने साथ कार्यरत मोना से प्यार करता था लेकिन वह कंपनी के मालिक को नाराज नहीं करना चाहता था। उसने सुमन से विवाह कर लिया।

अभी शादी को दस दिन ही हुए थे कि वह एक दिन मोना के संजीत को लिखे प्रेम पत्र और उसका फोटोग्राफ सुमन के हाथ लग गये। बस फिर क्या था। सुमन का फ्यूज उड़ गया। स्वभाव से घमंडी सुमन ने नम्रता, झुकना या समायोजन करना कभी सीखा ही नहीं था। उसने अपनी अटैची उठायी और टैक्सी करके मायके चली गई। उसके बाद उसे मनाने के सारे प्रयत्न विफल रहे। एक दिन संजीत को सुमन के वकील द्वारा भेजा तलाक का नोटिस मिल गया।

कुछ वर्ष बाद ही सुमन के पापा का देहांत हो गया। सुमन की मां स्वयं बेटे पर निर्भर हो गई। भाभी को सुमन बोझ प्रतीत होने लगी थी। भाई ने सुमन के लिए अलग मकान खरीद कर उसे वहां चले जाने को कह दिया। एक पहाड़ सी जिन्दगी और निपट अकेलापन। सुमन का वक्त काटे न कटता। जरा सी बात को लेकर उसने अपने हरे भरे संसार में आग लगा ली थी। अब सिवाय पछतावे के उसके पास क्या रहा जबकि संजीत पुनर्विवाह करके एक खुशहाल जिन्दगी बसर कर रहा था।

प्रेम करना बुरा नहीं। जिससे प्रेम किया जाए, उसी से विवाह भी हो, यह जरूरी नहीं। ऐसे में पति की पूर्व प्रेमिका को लेकर उसे दुष्चरित्र करार देना केवल नासमझी ही कहलाएगी। आजकल चंूकि विवाह की उम्र ज्यादा होने लगी है, इतनी उम्र तक पुरूष किसी स्त्री की तरफ आकर्षित न हो, यह मुमकिन नहीं। फिर यह पति के रोमांटिक होने का प्रमाण भी तो माना जा सकता है।

अगर पति पत्नी की उपेक्षा नहीं करता, उसे पत्नी के अधिकार प्राप्त हैं, तब केवल भूतकाल की बातों को लेकर अपना वर्तमान नष्ट करना बुद्विमानी नहीं है। होना यह चाहिए कि पत्नी को पति के दिल से प्रेमिका की याद भुलाने के लिए स्वयं को उससे बेहतर साबित कर के दिखाना चाहिए।

कई पत्नियां किशोरावस्था के अपने अफेयर्स की बात बिलकुल भूल जाती है। पति को लेकर इतनी पजेसिव हो जाती हो जाती है कि उसकी जिन्दगी में किसी अन्य स्त्री चाहे वो उसकी मां क्यों न हो - की छाया भी देखना पसंद नहीं करती। दूसरी तरफ पति से सिर्फ इसलिए तलाक चाहती हैं कि उसका विवाह से पूर्व किसी लड़की से इश्क था।

उन्हें दोहरे मापदंड भुलाकर पति को सच्चे अर्थो में अपना जीवन साथी मान लेना चाहिए। पत्नी के रिश्ते में वो शक्ति है कि पति उसी का होकर रहता है बशर्ते वह उपर्युक्त बातों का पालन करें।

- उषा जैन 'शीरीं'

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