समय की मांग है स्त्री-पुरूष मित्रता

समय की मांग है स्त्री-पुरूष मित्रता

पिंकी को अपने दोस्त अनुराग पर नाज़ है। उसने न सिर्फ आगे पढऩे के लिए प्रेरित किया अपितु परीक्षा के लिए स्तरीय नोट्स भी उपलब्ध कराए जिसके कारण वह प्रथम श्रेणी से बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण कर पाई। वहीं मीना और अभिलाषा जैसी उसकी सहेलियां पाठ्यक्रम की पुस्तक देने में हमेशा ना-नुकुर करती। मनोविश्लेषकों का मानना है कि जैसे सामान्य तौर से एक पुरूष दूसरे पुरूष की तरक्की देखकर ईष्र्या करता है, वैसे ही युवतियां भी अपनी सहपाठी या सहकर्मी की तरक्की पसंद नहीं करती। ऐसे में वक्त की मांग है कि पुरूष मित्र बनाए जाएं। हां, यह आवश्यक है कि मित्र बनाते समय सावधानी भी बरती जानी चाहिए मसलन आपका मित्र आपका दुरूपयोग न करे, साथ ही साथ वह किसी लत का शिकार न हो। मित्रता के लिए हाथ बढ़ाने से पहले उसके व्यक्तित्व की परख आवश्यक है किन्तु एक अच्छा मित्र मिल जाता है तो वह न सिर्फ आपके प्रति सहानुभूति रखता है बल्कि अनेक मौकों पर आपकी परेशानी को दूर करने में मदद भी करता है। वैसे भी माना जाता है कि पुरूष विषय पर अधिक गम्भीरता से सोचने में सक्षम होते हैं जबकि स्त्रियां किसी गम्भीर विषय को भी हल्के फुल्के अंदाज से सोचती हैं। भावनात्मक और मानसिक रूप से प्रगाढ़ इस रिश्ते के अनेक सकारात्मक पक्ष देखने को मिले हैं। अब तो हमारा समाज इस नायाब रिश्ते की इजाजत भी देने लगा है। पर-पुरूषों को देखकर घूंघट को नाक की फुनगी पार कर देने के दिन लद गए क्योंकि आज की लड़कियां रसोईघर से निकलकर देश को नई दिशा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वर्तमान समय में पुरूष मित्र कई प्रकार से उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।
- कुछ बातें जिसके प्रचार-प्रसार से युवतियां डरती हैं तथा अपनी महिला मित्रों से कहने में झिझक महसूस करती हैं, वे निस्संकोच अपने पुरूष मित्र से कह सकती हैं क्योंकि पुरूषों को बात अधिक पचती है।
- महिलाओं की अपेक्षा पुरूष अधिक खुले होते हैं अत: पुरूष मित्रों के साथ किसी विषय पर खुलकर बातचीत की जा सकती है।
- जीवन में आने वाली कठिनाइयों से अक्सर महिलाएं घबरा जाती हैं। ऐसे में पुरूष उसके लिए संबल का काम करता है।
- पुरूष मित्र एक आइने की तरह होता है जो आपके गुण-दोषों को बताकर आपके व्यक्तित्व को निखार सकता है।
- पुरूष मित्र में एक बड़ी विशेषता यह होती है कि वह अपनी महिला मित्र को कभी उपेक्षित महसूस होने नहीं देता।
- इस मित्रता में अपेक्षाएं कम तथा पारस्परिक समझ तथा त्याग की भावना प्रबल होती है।
- यदि आप कैरियर संबंधी कोई निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति में हैं तो ऐसे में पुरूष मित्र आपकी मदद कर सकते हैं तथा आप उचित कैरियर का चुनाव कर सकती हैं। इस प्रकार पुरूष मित्रता में कोई बुराई नहीं है पर अपनी मर्यादा की सीमा रेखा तय करना आप पर निर्भर करता है क्योंकि ऐसी मित्रता उचित दूरी, आपसी सामंजस्य तथा विचारों के धरातल पर ही टिकी होती है।
- रंजना लाल

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