सफल दांपत्य जीवन - अनुभव के मोती

सफल दांपत्य जीवन - अनुभव के मोती

हर दंपति चाहता है कि उनके बीच सदैव मधुर संबंध बने रहें। कुछ दंपतियों के मध्य इतना प्रेम होता है कि उनका दांपत्य जीवन सदैव खुशगवार बना रहता है तो कुछ दंपतियों में हमेशा कुछ न कुछ खटपट होती ही रहती है। उनके दांपत्य जीवन में कड़वाहट भर जाती है। परिवार का माहौल बिगड़ जाता है।

आखिर ऐसा क्यों होता है? पति-पत्नी में मधुर संबंध कैसे कायम रखे जा सकते हैं?

दांपत्य जीवन परस्पर विश्वास, आत्मसमर्पण की भावना, खुली किताब की तरह जीवन का होना तथा एक दूसरे की पसंद नापसंद आदि का ख्याल रखना आदि पर आधारित होता है। जब इसमें कमी आने लगती है तब दांपत्य जीवन में कड़वाहट आने लगती है। यदि आप चाहते हैं कि आपके दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहे तो यहां प्रस्तुत टिप्स को अपने जीवन में अवश्य उतारें।

विश्वास:- दांपत्य जीवन की सफलता के लिए पति-पत्नी का एक-दूसरे के प्रति विश्वास बनाए रखना अत्यंत जरूरी होता है। यह सुखी दांपत्य के लिए आधारशिला का काम करता है। अगर पति-पत्नी को एक दूसरे पर विश्वास नहीं होगा तो दांपत्य जीवन को ध्वस्त होते देर नहीं लगेगी। यदि आप चाहते हैं कि आपके दांपत्य जीवन में सदा मधुरता बनी रहे तो एक-दूसरे का विश्वास न खोएं। एक-दूसरे पर विश्वास रखेंगे, तभी पति-पत्नी में प्रेम बढ़ेगा।

समर्पण:- पति-पत्नी का एक दूसरे के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हो जाना ही उनके बीच प्रगाढ़ता और स्नेह कायम रखता है। जब पत्नी अपना अस्तित्व पति में विलीन कर देती है तब उसे पति का भरपूर प्यार मिलता है। एक दूसरे की भावनाओं को समझना, प्रोत्साहित करना, सफलता पर बधाई देना तथा एक-दूसरे के भीतर छिपी प्रतिभा को निखारने में सहायता करना आदि छोटी-छोटी बातें सफल दांपत्य जीवन के राज हैं।

सहनशीलता:- कई बार पति-पत्नी के स्वभाव में अंतर होने से वे बार-बार एक-दूसरे पर नाराज होते हैं। इससे आपस में तनाव पैदा होता है। इससे बचने के लिए आवश्यक है कि वे आपस में सहनशक्ति रखें। सहनशील बनें। यदि पति किसी बात पर नाराज होते हैं तो पत्नी को चुप रहकर सहनशीलता का परिचय देना चाहिए। इसी तरह अगर पत्नी नाराज हो तो पति को भी चुप रहना चाहिए। जवाब देने से बात आगे बढ़ती है। आपस में कलह होता है। इसलिए दोनों (पति-पत्नी) को चाहिए कि अगर दोनों के बीच कोई अप्रिय अवसर आ जाय तो तू-तू मैं मैं न करके सहनशीलता का परिचय दें।

दोनों के बीच में अहं न आने दें:- पति-पत्नी को चाहिए कि वे एक दूसरे के प्रति ईमानदार रहें। एक दूसरे से कभी झूठ न बोलें। एक दूसरे की भावनाओं को समझें और उनका सम्मान करें। अपने अंदर अहं को कभी पनपने न दें। गलती होने पर माफी मांग लें। ऐसा करने से आप छोटे नहीं हो जाएंगे वरन ऐसा करने से एक दूसरे की नजरों में आदर व सम्मान ही बढ़ता है। आपसी संबंधों में कभी भी अहं की भावना को नहीं आने दें। इससे आपस में प्रेम बढ़ेगा।

दिनचर्या में परिवर्तन लाएं:- आपस में प्रेम प्रगाढ़ करने के लिए आवश्यक है कि दोनों (पति-पत्नी) अपनी-अपनी दिनचर्या में थोड़ा परिवर्तन लाएं। साल में एक-दो बार दोनों साथ घूमने बाहर जाएं। पुराने दिनों की याद ताजा करें। इससे प्रेम में और वृद्धि होगी। एक ही जीवन शैली जीते हुए व्यक्ति ऊब जाता है इसलिए जीवन शैली में बदलाव लाना जरूरी होता है।

समय-समय पर उपहार दें:- पति-पत्नी दोनों को चाहिए कि समय समय पर एक दूसरे को उपहार देते रहें। एक दूसरे के जन्मदिन, सालगिरह व अन्य पर्व त्योहारों के अवसर पर एक दूसरे को उपहार देने से आपस में प्यार बढ़ता है। यदि दोनों (पति-पत्नी) में से कोई भी बाहर घूमने जाए तो दूसरे के लिए कोई अच्छी चीज उपहार के लिए जरूर लाएं और अपने सहभागी को दें। फिर देखें कि आपके सहभागी को उपहार पाकर कितनी खुशी होती है।

एक दूसरे के प्रति प्यार प्रदर्शित करें:- एक लम्बे मौन से भी आपसी संबंधों में खाई पैदा हो जाती है इसलिए एक-दूसरे को अहसास दिलाते रहें कि आपको उनसे बेहद प्यार है। उनसे अलग रहने की आप कल्पना भी नहीं कर सकते। कभी-कभी शब्दों के माध्यम से बताया गया प्यार पति-पत्नी को एक दूसरे के बहुत करीब ला देता है।

एक दूसरे की पसंद-नापसंद का अवश्य ध्यान रखें:- प्रेम को बढ़ाने के लिए जरूरी है कि पति-पत्नी को एक दूसरे की पसंद नापसंद का ध्यान जरूर रखना चाहिए। एक-दूसरे की पसंद नापसंद को ध्यान में रखकर ही कोई काम करना चाहिए। किसी काम को करने से पहले आपस में सलाह-मशवरा जरूर करना चाहिए।

एक-दूसरे के हमराज बनें:- पति-पत्नी को एक दूसरे से कोई बात नहीं छिपानी चाहिए। पति-पत्नी का संबंध ही ऐसा होता है जिसमें राज या पर्दे के लिए कोई स्थान नहीं होता। शादी के पश्चात् पति-पत्नी के रूप में दोनों एक हो जाते हैं। साथ-साथ जीवन बिताना होता है। दोनों एक-दूसरे के सुख दुख के साथी होते हैं, इसलिए दोनों को मन में भी किसी प्रकार का मन-मुटाव या छिपाव नहीं रखना चाहिए।

अगर किसी बात को लेकर एक-दूसरे के प्रति मन में कोई विकार है तो उसे प्रकट कर देना चाहिए। उससे मन का गुबार दूर हो जायेगा। बीती बातों को याद करके वर्तमान को गंवाना उचित नहीं होता इसलिए दोनों को चाहिए कि बीती बातों को भुला दें तथा वर्तमान में प्राप्त खुशियों से खुशी-खुशी जीवन व्यतीत करें। एक दूसरे के विचारों का अवश्य सम्मान करें।

यदि आप रीता आंटी द्वारा बताए गये उपरोक्त टिप्स को ध्यान में रखकर एक दूसरे के साथ आचरण करेंगे तो आपका दांपत्य जीवन सदैव मधुर बना रहेगा।

- राजा तालुकदार

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