लालकिले की प्राचीर से दिखा दम

लालकिले की प्राचीर से दिखा दम

-दिव्य उत्कर्ष


स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट संकेत दे दिया कि इस स्थान से मौजूदा कार्यकाल के इस आखिरी भाषण को वो अपने अगले कार्यकाल की नींव बनाना चाहते हैं। उनके भाषण से स्पष्ट था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भी 2014 की तरह ही उनका मुख्य मुद्दा करप्शन ही होगा। बीजेपी कांग्रेस को 'साठ साल बनाम पांच साल' की प्रमुखता के साथ उठाकर चुनौती देगी और आने वाले पांच सालों के लिए अपना रोडमैप भी पेश करेगी।

प्रधानमंत्री की रणनीति जल्दी होने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के दौरान यूपीए सरकार के कार्यकाल के आखिरी साल 2013 की स्थिति और एनडीए सरकार के कार्यकाल के आखिरी साल 2018 की स्थिति को तुलनात्मक रूप से पेश करने की है। वे यूपीए शासनकाल के दौरान भारत में बने निराशाजनक माहौल की तस्वीर जनता के सामने रखेंगे, वहीं 2018 में दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की बात भी जनता के सामने रखकर इसे सरकार की उपलब्धि के रुप में दर्शायेंगे। मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने भाषण में रेड टेप और रेड कार्पेट को माध्यम बनाते हुए 2013 बनाम 2018 की तस्वीर भी स्पष्ट की और ये समझाने का भी प्रयास किया कि पिछले चार सालों के दौरान देश किस तरह निराशाजनक माहौल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर अपना जलवा दिखाने में सक्षम हो सका है।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जो कुछ भी कहा, उससे देशवासियों के मन में उठने वाले कई सवालों का जवाब भी मिला, साथ ही सरकार के आने वाले दिनों में रहने वाले रुख का खुलासा भी हुआ। उन्होंने अपने संबोधन से यह जताने का भी प्रयास किया की एनडीए सरकार जनहित से जुड़े मुद्दों का तो समाधान कर ही रही है, देश को आगे ले जाने के लिए भी कई अहम योजनाओं पर काम कर रही है। इस कार्यकाल में लाल किले की प्राचीर से नरेंद्र मोदी का यह आखिरी भाषण था, इसलिए स्वाभाविक रूप से केंद्र सरकार की ओर से अभी तक किए गए काम को विस्तार से जनता के सामने रखना उनके लिए आवश्यक था। साथ ही इस भाषण में नरेंद्र मोदी की निगाह आने वाले चुनावों पर भी टिकी हुई थी, तभी उन्होंने अपने संबोधन में अपनी व्यग्रता, आतुरता और अधीरता का जिक्र किया।

ऐसा नहीं है कि नरेंद्र मोदी इसके पहले अपनी सरकार की कामयाबियों का उल्लेख नहीं की करते रहे हैं। लेकिन लाल किले के प्राचीर से सरकार की कामयाबियों को जनता के सामने प्रस्तुत करने का अपना एक अलग महत्व है। मोदी पहले भी कहते-कहते रहे हैं कि वह अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने जरूर पेश करेंगे और लाल किले से उन्होंने अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड ही जनता के सामने पेश किया है। साथ ही अपनी भावी महत्वाकांक्षी योजनाओं का भी ऐलान किया है। प्रधानमंत्री की घोषणाओं में सबसे महत्वपूर्ण योजना 'आयुष्मान भारत' है, जिसे 25 सितंबर से लागू किए जाने की बात कही गयी है।

शुरुआत में ये योजना निम्न आय वर्ग के 10 करोड़ परिवारों के लिए होगी, लेकिन बाद में निम्न मध्यम, मध्यम और उच्च वर्ग के लोगों को भी इसके दायरे में लाया जायेगा। आयुष्मान भारत योजना की जानकारी देकर नरेंद्र मोदी ने गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले लोगों के मन में एक बड़ी उम्मीद जगायी है। इस योजना के प्रारंभिक दौर में ही लगभग 10 करोड़ निर्धन परिवारों के लगभग 50 करोड़ लोगों को इसका फायदा मिल सकेगा। निश्चित रूप से पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिलना निर्धन वर्ग के लोगों के लिए एक बहुत बड़ी राहत की वजह बनेगा।

आयुष्मान भारत के अलावा प्रधानमंत्री ने शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिये नियुक्त होने वाली महिला अधिकारियों को पुरुषों की तरह ही परमानेंट कमिशन दिये जाने का ऐलान कर महिलाओं को एक बड़ी खुशखबरी दी है। अधिकतर महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए आती हैं और कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें सेना की नौकरी से मुक्त कर दिया जाता है। फिलहाल महिलाओं को आर्मी एजुकेशन कोर और लीगल सर्विस में ही परमानेंट कमीशन दिया जाता है, लेकिन अब महिलाएं सेना के अन्य क्षेत्रों में भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर सकेंगी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने बलात्कार की घटनाओं को लेकर जिस तरह चिंता जतायी, उससे भी स्पष्ट है कि एनडीए सरकार महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों को के प्रति सख्त रुख अपनाए जाने की पक्षधर है।

प्रधानमंत्री ने किसानों के उत्थान को भी अपनी सरकार की जिम्मेदारी माना है। इन सब बातों से यही संकेत मिलता है कि प्रधानमंत्री किसानों, महिलाओं और गरीबों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी सरकार की नजर में इन वर्गों का उत्थान बड़ी प्राथमिकता है। गरीब, किसान और महिलाएं अपने आप में इतना बड़ा वोट बैंक है कि वह किसी भी चुनाव में उलटफेर कर सकता है। अपने 82 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने कश्मीर नीति को भी स्पष्ट करने की कोशिश की। महबूबा मुफ्ती की सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद से ही बीजेपी की कश्मीर नीति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया कि उनकी सरकार कश्मीर की समस्या को गोली और गाली से नहीं, बल्कि गले लगा कर हल करना चाहती है और इसे सुलझाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के सुझाव इंसानियत, कश्मीरियत और जम्हूरियत के सूत्रों का ही सहारा लेना चाहती है। साफ है कि मौजूदा सरकार कश्मीर को मुख्यधारा में लाने के बाद को लेकर प्रतिबद्ध है। हाल के दिनों में घाटी में जिस तरह से आतंकवाद के खिलाफ स्थानीय लोगों ने आवाज उठायी है, वह अपने आप में केंद्र सरकार की नीतियों की बड़ी सफलता है।

विज्ञान के क्षेत्र में भी नरेंद्र मोदी ने 2022 तक स्वदेशी अंतरिक्ष यान द्वारा भारतीय वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में भेजने का ऐलान कर साफ कर दिया की स्पेस मिशन के मामले में भी उनकी सरकार देश को आगे रखना चाहती है। अगर स्वदेशी अंतरिक्ष यान से भारतीय अंतरिक्ष में पहुंच सके तो ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन जायेगा।

बहरहाल, प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से जो कुछ भी कहा, उसके निहितार्थ को समझने की जरूरत है। इसका राजनीतिक नफा-नुकसान की दृष्टि से आकलन करने की जगह विकास और विकास की योजनाओं के नजरिए से इसे देखा जाना चाहिए। निश्चित रूप से इस सरकार ने अभी तक के कार्यकाल में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। नरेंद्र मोदी ने आगे की भी जो योजनाएं बतायी हैं, यदि उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सका, तो भारत आने वाले कुछ सालों में विश्व के शीर्षस्थ देशों में से एक होगा।


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