Read latest updates about "राज काज" - Page 2

  • मुझे पप्पू क्यों कहते है ,राहुल ने दिया लाजवाब जवाब !

    एक अकेले राहुल और हम नब्बे पत्रकार... एक पत्रकार के तौर पर नेताओं से मिलना-जुलना और उनकी राजनीति को समझना हमेशा अच्छा लगता है। ऐसे में जब कहा गया कि इंदौर में राहुल गांधी पत्रकारों से मिलेंगे तो इंदौर जाने की ललक बढ़ गई थी। इंदौर के रेडिसन ब्लू के बड़े हॉल में करीब नौ बड़ी टेबल लगाकर राहुल से...

  • बिजनेस रैंकिंग में सुधार के बड़े मायने

    -डॉ. दिलीप अग्निहोत्रीभारत ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में एक बार फिर छलांग लगाई है। इसका मतलब है कि भारत के आर्थिक सुधार कारगर हो रहे हैं। ऐसे में अर्थव्यवस्था से जुड़ी रिजर्व बैंक सहित अन्य सभी संस्थाओं को सुधार कार्यो में साझा प्रयास करने चाहिए। यह नहीं भूलना चाहिए कि संवैधानिक संस्थाएं लोगों के कल्याण...

  • शर्म करो अज़ीम की मौत को सांप्रदायिक कहने वालों!

    -आर.के.सिन्हा... दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में एक मुहल्ला है बेगमपुर। यहाँ के एक मदरसे में बहुत से बच्चे रहते और पढ़ते हैं। ये अधिकतर हरियाणा के मेवात इलाके से संबंध रखते हैं। इस मदरसे से सटी हुई है एक झुग्गी-झोपड़ी बस्ती। इसमें करीब-करीब सभी वाल्मीकि समाज के परिवार रहते हैं। ये...

  • सोशल मीडिया पर झूठ का जंजाल

    हाल ही में सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैलाने की चर्चाओं के बीच फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का बयान आया। जुकरबर्ग ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि इस मामले में उनकी कंपनी बेहद गंभीरता से काम कर रही है। दरअसल, फेसबुक व व्हाट्स एप जैसे सॉफ्टवेयर आने से जहां एक ओर इनकी सकारात्मकता बढ़ी है, वहीं...

  • जो गले मिलोगे तपाक से...!

    एक मशहूर शेर है कि 'जो गले मिलोगे तपाक से तो कोई हाथ भी न मिलाएगा। ये नए मिजाज का शहर है थोड़ा फासले से मिला करो।।' यहां इस शेर की याद यूं आ गई कि मोदी सरकार के आमंत्रण को ठुकराते हुए अमेरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारत के गणतंत्र दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि आना अस्वीकार्य कर दिया है। मीडिया...

  • मोदी-आबे मुलाकात के रणनीतिक सबब

    :-सियाराम पांडेय 'शांत' भारत में विपक्ष एक ओर तो मोदी हटाओ-मोदी भगाओ अभियान चला रहा है, जबकि नरेंद्र प्रधानमंत्री के तौर पर वैदेशिक स्तर पर भारत की कीर्तिलता को निरंतर बढ़ा रहे हैं। उनकी हालिया जापान यात्रा को भी इसी रूप में लिया जा सकता है। यह क्या कम है कि कोई देश भारत को अपना भरोसेमंद...

  • सोशल मीडिया पर झूठ का जंजाल

    -योगेश कुमार सोनीहाल ही में सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैलाने की चर्चाओं के बीच फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का बयान आया। जुकरबर्ग ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि इस मामले में उनकी कंपनी बेहद गंभीरता से काम कर रही है। दरअसल, फेसबुक व व्हाट्स एप जैसे सॉफ्टवेयर आने से जहां एक ओर इनकी सकारात्मकता बढ़ी...

  • विधानसभा चुनाव - 2018 : हाथ और हाथी पर कमल की सवारी

    छतरपुर- यह जिला देश के 115 पिछड़े जिलों की सूची में है।छतरपुर जिले के छह विधानसभा सीट आती हैं महाराजपुर, चांदला, राजनगर, छतरपुर, बीजावर और मलहेरा। यह जिला प्रदेश की राजनीती में महत्वपूर्ण स्थान रखता है यहाँ कांग्रेस और भाजपा के अलावा सपा बसपा का भी खासा प्रभाव है चुनावी समीकरण पर विकास से ज्यादा...

  • किसके इशारे पर सीबीआई में मची उथल-पुथल

    -आर.के. सिन्हानिश्चित रूप से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के दो शिखर अफसरों के बीच कुत्तों-बिल्ली की तरह एक-दूसरे पर सरेआम आक्रमण करने से देश की प्रमुख जांच एजेंसी सी.बी.आई. की छवि तार-तार हो गई है। अगर इनमें आपस में कोई विवाद और टकराव के बिन्दु थे, तब भी उन्हें मिल-बैठकर आसानी से सुलझाया जा...

  • उच्चतम न्यायालय त्योहारों के मुहूर्त भी निकालेगी..?

    -राजीव खण्डेलवाल उच्चतम न्यायालय के ताजा निर्णय ने एक बार फिर न्यायालय के निर्णयों पर प्रश्नवाचक चिह्न लगा दिया है। उच्चतम न्यायालय ने अपने इस निर्णय द्वारा विभिन्न धार्मिक आयोजनों के अवसरों पर पटाखे जलाने की समयावधि, गुणवक्ता की डेसीबल व मात्रा तय की है। आखिर उच्चतम न्यायालय को आज कल हो क्या गया...

  • नाम में बहुत कुछ रखा है श्रीमन् !

    - लक्ष्मीकांता चावलाउत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने बहुत साहसिक और राष्ट्रीय गौरव का सम्मान करते हुए मुगलों की गुलामी के दौर में प्रयागराज से इलाहाबाद बने तीर्थ राज को पुनः प्रयाग बना दिया। कौन नहीं जानता कि अयोध्या नगरी को भी एक छोटे से गांव कस्बे में बंद करके विशाल नगर का नाम फैजाबाद मुस्लिम...

  • केरल का नन दुष्कर्म कांड..न्याय की हत्या से कम नहीं गवाह का मरना

    -सियाराम पांडेय 'शांत' मुद्दई सुस्त, गवाह चुस्त का जुमला तो खूब सुना है। सुनने में यह बहुत अच्छा भी लगता है लेकिन व्यावहारिक जीवन में भी क्या गवाह चुस्त रहता है, इसका जवाब किसी के भी पास नहीं है। पहले लोग गवाही देने को हर क्षण तैयार रहते थे। आज स्थिति यह है कि आपराधिक मामलों में कोई गवाही देना...

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