Read latest updates about "राज काज" - Page 2

  • इंदिरा ने इमरजेंसी में बदल दिया था संविधान का चेहरा और चरित्र

    आपातकाल के 44 साल पूरे होने पर विशेष - रामबहादुर राय इंदिरा गांधी की इमरजेंसी को इस समय याद करना इसलिए बहुत जरूरी है क्योंकि कांग्रेसी और उनके साथी उसे भुलाकर अकारण और निराधार आरोप पिछले कई सालों से उछाल रहे हैं कि संविधान खतरे में है। उसे बचाना है। इमरजेंसी ने संविधान के साथ क्या किया?...

  • जरूरी है शिक्षा का भारतीयकरण

    सुरेश हिंदुस्थानी शिक्षा प्रणाली का किसी भी देश के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान होता है। भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद जिस प्रकार की शिक्षा दी जानी चाहिए थी, उसका हमारे देश में नितांत अभाव महसूस किया जाता रहा है। शायद, स्वतंत्रता मिलने के बाद हमारे नीति निर्धारकों ने शिक्षा नीति बनाने के...

  • बसपा में परिवारवाद का नया अध्याय

    सियाराम पांडेय 'शांत' वर्ष 2003 में एक वरिष्ठ पत्रकार का विश्लेषण छपा था कि भारतीय राजनीति मात्र 300 परिवारों तक सीमित है। अंग्रेजों के दौर में भारत में 565 राजघराने थे जो लोक कल्याण की कम, अपने हितों की ज्यादा चिंता करते थे। आज भी कुछ उसी तरह का माहौल है। राजनीति के इस वंशवादी आचरण से इस देश को...

  • भारत-पाकिस्तान संबंधः नई दृष्टि

    डॉ. राकेश राणा भारत-पाकिस्तान संबंध अपने जन्म के समय से ही उलझे हुए हैं। छोटे से जीवन काल में छोटे-बड़े कई युद्धों की विभीषिका को झेल चुके हैं दोनों देश। भारत-पाकिस्तान के इन उलझे संबंधों के केन्द्र में कश्मीर का मुद्दा मुख्य है। दोनों देशों के संबंधों में कश्मीर का मसला क्षेत्रीय सहयोग के लिए बड़ी...

  • 'एक देश-एक शिक्षा' वक्त की जरूरत'

    मनोज ज्वाला 'एक देश-एक चुनाव' अगर समय की मांग और विकास का रास्ता है, तो 'एक देश-एक शिक्षा' राष्ट्रीय एकता-अखण्डता-समता एवं विकास के अवसर की समानता का माध्यम है। शिक्षा की असमानता ही वह कारक है जिसके कारण हमारे देश में शिक्षितों का एक वर्ग भारत राष्ट्र को टुकड़े-टुकड़े कर देने के लिए आंदोलित हो उठता...

  • भ्रष्ट नौकरशाहों पर सरकार का चाबुक

    रमेश ठाकुर बदलाव प्रकृति का नियम है। भ्रष्ट नौकरशाहों ने शायद ही कभी सोचा हो कि उनकी मौजमस्ती और आजादी के दिनों पर डाका पड़ेगा। कोई आकर करारी चोट मारेगा। लेकिन अब ऐसी परिकल्पना सच में परिवर्तित हो गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रत्यक्ष रूप से अफसरशाहों से भिड़ गए हैं। मंत्रालयों में सालों से...

  • आपातकाल : भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय

    सियाराम पांडेय 'शांत' आपातकाल यानी भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय। जिसमें एक झटके में लोगों के नागरिक अधिकार रद्द कर दिए गए। मीडिया पर सेंसर लगा दिया गया। आज से 44 साल पहले वह सब हुआ जो संविधान और जनविरोधी था। बैंकों के राष्ट्रीयकरण और प्रिवीपर्स की समाप्ति के जरिए देश में गरीबों की मसीहा की छवि...

  • गांधी परिवार के नेतृत्व में कांग्रेस अवसान की ओर?

    मृत्युंजय दीक्षित लोकसभा चुनाव के बाद नई सरकार बने लगभग एक माह बीत रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी सरकार ने अपने कदम भी आगे बढ़ाने शुरू कर दिये हैं लेकिन कांग्रेस व राहुल गांधी के हालात सुधरने की बजाय और खराब ही होते जा रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व अपनी गलतियां सुधारने की...

  • बच्चों के लिए कहर बना चमकी बुखार, कहां हो सरकार

    योगेश कुमार गोयल बिहार में अब तक चमकी बुखार से 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। मौतों का यह आंकड़ा कहां जाकर थमेगा, कोई नहीं जानता। बिहार में इस बीमारी का सर्वाधिक कहर मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, मोतिहारी, बेतिया और वैशाली जिलों में देखा गया है। इन जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बदतर...

  • राजनीति से परे कुछ सवाल उठाती डॉक्टरों की हड़ताल

    विरोध करने और अपने हक के लिए लड़ने के और भी तरीके हो सकते हैं जैसे काली पट्टी बांध कर आना या सफेद की जगह काला एप्रन पहनना या फिर कोई अन्य तरीका लेकिन उन्हें इतना तो सुनिश्चित करना ही चाहिए कि उनके कारण देश में अराजकता का माहौल पैदा ना हो क्योंकि उनका चिकित्सक धर्म उन्हें इस बात की अनुमति नहीं देता। ...

  • मोदी के रवैए में सुधार

    - डॉ. वेदप्रताप वैदिकचार दिन पहले मैंने लिखा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना आत्म-सम्मान क्यों घटा रहे हैं ? उन्हें शांघाई सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेना है और उन्हें किरगिजिस्तान की राजधानी बिश्केक जाना है तो क्या यह जरुरी है कि वे पाकिस्तान की हवाई-सीमा में से उड़कर जाएं, जैसे कि...

  • स्मृतिशेष : पत्रकारिता का 'सूर्य' अस्त

    सियाराम पांडेय 'शांत' वरिष्ठ पत्रकार राजनाथ सिंह सूर्य नहीं रहे। 82 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। जाते-जाते अपने साथी पत्रकारों और पत्रकारिता की नई खेप को एक संदेश भी देते गए- 'कर चले हम फिदा जाने तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों।' उन्होंने लंबी जिंदगी पाई। अच्छा होता...

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