आडवाणी केंद्रित हो रही है राजनीति

आडवाणी केंद्रित हो रही है राजनीति

इसे विरोधियों की साजिश के सफल होने का संकेत माना जाए या फिर भाग्य का लेखा कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को जबकि उनकी अपार मेहनत का फल मिलना चाहिए था तब उन्हें नेपथ्य में पहुंचा दिया गया। पूरे पांच साल होने को आए हैं उन्हें पर्दे के पीछे खामोशी से बुरा कहे जाने वाले वक्त को काटते-काटते। अब जबकि उन्हें रणनीतिकारों और समीक्षकों ने करन थापर की पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में देखा तो अनेक सवालों की झड़ी लगा दी। यहां तक की इसकी जद में थापर को भी ले लिया गया। दरअसल थापर से पूछा गया था कि यदि उन्हें आडवाणी जी का साक्षात्कार लेना हो तो वो उनसे क्या पूछेंगे। इस पर थापर ने कहा कि 'आडवाणी जी क्या आप ऐसा सूट पहनना पसंद करेंगे, जिस पर आपका नाम धारीदार ढंग से उकेरा गया हो? इस सवाल के पीछे जो संदेश छुपा है उसे देखने वाली बात है। दरअसल अब जबकि आम चुनाव करीब आ रहे हैं तो एक बार फिर आडवाणी जी सियासत के केंद्र में आते जा रहे हैं बल्कि कहने वाले तो यह कह रहे हैं कि भाजपा की राजनीति एक बार फिर से आणवाणी केंद्रित होती जा रही है, क्योंकि मोदी जी के कार्यकाल में घटित घटनाओं ने उनके जादू को फीका कर दिया है।

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