Read latest updates about "राज काज" - Page 1

  • मोदी के रवैए में सुधार

    - डॉ. वेदप्रताप वैदिकचार दिन पहले मैंने लिखा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना आत्म-सम्मान क्यों घटा रहे हैं ? उन्हें शांघाई सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेना है और उन्हें किरगिजिस्तान की राजधानी बिश्केक जाना है तो क्या यह जरुरी है कि वे पाकिस्तान की हवाई-सीमा में से उड़कर जाएं, जैसे कि...

  • स्मृतिशेष : पत्रकारिता का 'सूर्य' अस्त

    सियाराम पांडेय 'शांत' वरिष्ठ पत्रकार राजनाथ सिंह सूर्य नहीं रहे। 82 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। जाते-जाते अपने साथी पत्रकारों और पत्रकारिता की नई खेप को एक संदेश भी देते गए- 'कर चले हम फिदा जाने तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों।' उन्होंने लंबी जिंदगी पाई। अच्छा होता...

  • जो घाटे में रहा उसी पर ठीकरा

    डॉ. दिलीप अग्निहोत्री सपा और बसपा का गठबंधन एक सुखद परिकल्पना पर आधारित था। इसमें माना गया था कि लोकसभा चुनाव में किसी को बहुमत नहीं मिलेगा। सीटों के हिसाब से सपा-बसपा गठबंधन सबसे आगे होगा। इस आधार पर मायावती को प्रधानमंत्री बनाने में अखिलेश यादव सहयोग करेंगे। फिर इस गठबंधन का संयुक्त नारा होगा कि...

  • आर्थिक मोर्चे पर केंद्र सरकार की चुनौतियां

    डॉ.मयंक चतुर्वेदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में आज आर्थ‍िक मोर्चे पर देश के सामने कई चुनौतियां हैं। इन संकटों से निपटते हुए देश को निरंतर गतिशीलता के उच्‍च पायदान तक पहुंचाना एनडीए नीत भाजपा सरकार के लिए कोई सामान्‍य बात नहीं है, इसलिए सरकार इन दिनों जैसा निर्णय ले रही है,...

  • नया इतिहास रचेगी मोदी-शाह की अटूट दोस्ती!

    -योगेश कुमार गोयललोकसभा चुनाव में पिछली बार के 31 फीसदी मतों के मुकाबले इस बार 50 फीसदी से भी अधिक मत हासिल कर देश की हिन्दी पट्टी की 226 लोकसभा सीटों में से 202 पर परचम लहराते हुए भाजपा ने जिस प्रकार अपने ही बलबूते पर 303 सीटें हासिल की और पूर्ण बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सरकार बनाने में सफल...

  • मायामुक्त अखिलेश

    - डॉ. वेदप्रताप वैदिकसमाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन यदि चुनावी हार के बाद भी चलता रहता तो मुझे आश्चर्य होता। अब उत्तरप्रदेश की ये दोनों प्रमुख पार्टियां उप्र विधानसभा के 13 उप-चुनाव अलग-अलग लड़ेंगी और हो सकता है कि एक-दूसरे से टक्कर लेते हुए भी लड़ें। खुशी की बात यह है कि मायावती और...

  • डिग्री से नौकरी की मानसिकता ने बढ़ाई भारत में बेरोजगारी

    -सनत जैनभारत में पिछले 45 वर्षों की तुलना में वर्ष 2019 में बेरोजगारों की संख्या सबसे ज्यादा है। 2000 के बाद से वैश्विक व्यापार संधि के चलते कर्ज लेकर विकास करने की नई सोच के कारण, भारत में पिछले 20 वर्षों में बड़ी तेजी के साथ आर्थिक विकास हुआ। भारत की जीडीपी 2004 के बाद से बड़ी तेजी के साथ बढ़ना...

  • क्या जगन मोहन से सीख लेंगे राहुल गांधी?

    विकास बंसल पिछले दो आम चुनावों के बाद कांग्रेस की शाख जिस तरह कमजोर हुई है, उससे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी काफी निराश हैं। असल में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी अब भी सीख लेंगे? मेरा मानना है कि उन्हें कुछ छोटे और नए स्तर पर उभर तेजी से रहे नेताओं से भी सीखना चाहिए। क्योंकि,...

  • इस ओर से भी सावधानी जरूरी

    डॉ. प्रभात ओझा कहते हैं कि घर में घुसे सांप के फन उठाने से पहले उसे कुचल देना चाहिए। इस कहावत को याद करने के कारण हैं। यह महज संयोग नहीं हो सकता कि ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के दो-चार दिन पहले आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से संबंध रखने वाले खूंखार आतंकवादी पकड़े जाएं। इसी दौरान अमृतसर के...

  • सपा-बसपा गठबंधन की खुली गांठ

    सियाराम पांडेय 'शांत' उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन करीब-करीब टूट चुका है। बस घोषणा होने की औपचारिकता बाकी है। भाजपा के छोटे से लेकर बड़े नेता इस गठबंधन को बेमेल और केर-बेर का संबंध बता रहे थे। वे कह रहे थे कि यह गठबंधन तभी तक चलेगा जब तक चुनाव नतीजे नहीं आ जाते। उनके दावे सच हो रहे हैं...

  • जय श्रीराम के नारे से क्यों चिढ़ने लगीं ममता

    योगेश कुमार सोनी पिछले दिनों दो बार ऐसा देखा गया कि पश्चिम बंगाल में कुछ लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए जिससे ममता बनर्जी इतनी नाराज हो गईं कि गाड़ी से उतरकर ऐसे लड़ रही थीं कि जैसे वो उनकी चिढ़ हो। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति मानी जा रही है। कभी बचपन में ऐसा होता था कि मजाक में किसी के...

  • नए राजनीतिक प्रयोग का शुभारम्भ

    सतीश कुमार दीक्षित मोदी सरकार-2 में दो सांसदों तेजस्वी सूर्या और प्रताप चन्द्र सारंगी की जीत ने भारतीय राजनीति में मेहनत, ईमानदारी और सादगी का जीवन जीने वालों का हौसला बढ़ा दिया है। राजनीति के पिछले पांच दशकों में ऐसा प्रतीत होने लगा था कि राजनीति केवल धनाढ्य और बाहुबलियों की दासी है। चुनावों में...

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