बेरोजगारों को नौकरी और लोन के नाम पर ठगने वाले 9 को पुलिस ने दबोचा

बेरोजगारों को नौकरी और लोन के नाम पर ठगने वाले 9 को पुलिस ने दबोचा

नोएडा। कोतवाली फेज थ्री पुलिस ने बेरोजगार लोगों को नौकरी और लोन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने गिरोह के 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिराफ्तार सभी आरोपित सेक्टर 63 के बी ब्लॉक में एक किराए की बिल्डिंग में अपना ऑफिस चला रहे थे। जांच में पता चला है कि आरोपित अब विभिन्न राज्यों के 100 से अधिक लोगों से नौकरी और लोन दिलाने के नाम लाखों की ठगी कर चुके हैं। पांच महीने पहले ही आरोपितों ने सेक्टर 63 में आफिस खोलकर ठगी शुरू की थी। पुलिस ने इनके पास से दर्जनों मोबाइल, लैपटॉप, प्रिंटर सहित सहित कई लोन दिलाने और नौकरी दिलाने के फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। एसपी सिटी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि शुक्रवार को ऑफिस में छापेमारी कर 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान जावेद, रविंद्र, सोहनवीर, विपिन कुमार, अनित कुमार, फरमान, जौली उर्फ यतन, तजामूर उर्फ कासिम व आकाश रूप में हुई है। गिरोह में जावेद मास्टरमाइंड है। ये सभी आरोपी मेरठ और मुजफ्फरनगर जिले के रहने वाले हैं। सभी आरोपियों में 12वीं से लेकर पोस्ट ग्रेजूएट तक है। नौकरी न मिलने पर इन लोगों ने ठगी का धंधा शुरू किया था। एसपी सिटी ने बताया कि इन लोगों ने मेरठ में एक अपना एक कॉल सेंटर खोला था। वहां भी सेकड़ों लोगों से ठगी कर फरार हो गए थे। वहां भी इन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एसपी सिटी ने बताया कि राजस्थान के उदयपुर निवासी अर्जुन लाला ने गुरुवार को सेक्टर-63 स्थित एग्रो बिजनेस सोल्यूशन कंपनी के खिलाफ साढ़े तीन लाख रुपये की ठगी का केस दर्ज कराया था। कंपनी के द्वारा पीड़ित को एजेंट बनाकर लोन दिलाने के लिए लोगों को जोडने का काम सौंप रखा था।

एजेंट के माध्यम से फंसाते थे लोगः एसपी सिटी ने बताया कि ये लोग दिल्ली, हरियाण, यूपी, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड आदि राज्यों में अपने एजेंट बनाकर अधिक-अधिक ग्राहक बनाने पर मोटी रकम का लालच देते थे। एजेंट के माध्यम से नौकरी या लोन दिलाने के नाम पर लोगों से 15 से 20 हजार रुपए सिक्योरिटी फीस के तौर पर अपने खाते में जमा करवा लेते थे। आरोपी जब एजेंट के माध्यम से काफी लोगों से ठगी कर लेते थे तो उसका अपना नंबर बदल लेते थे।

वेबसाइट से डाटा चोरी कर ठगते थे लोगों कोः गिरफ्तार सभी आरोपित नौकरी की विभिन्न वेबसाइटों से डाटा चोरी करते थे। आरोपियों के पास चोरी किए गए एक हजार से अधिक फोन नंबर मिले हैं। इन नंबरों पर कॉल कर आरोपी बिजनेस लोन दिलाने और नौकरी का झांसा देते थे। ठगी करने के बाद नंबर बंद कर देते थे।

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