नोएडा: विरोध में सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर फेंका कचरा

नोएडा: विरोध में सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर फेंका कचरा

नोएडा। अपनी खूबसूरती व हरियाली के लिए एनसीआर के उम्दा शहरों में गिना जाने वाला नोएडा इन दिनों कूड़े के ढेर में तब्दील हो गया है। कचरे ने साफ. सुथरे शहर को बदबूदार बना दिया है। आलम यह है कि जगह जगह कूड़े के ढेर लगे पड़े है। इससे फैली गंदगी से लोगों को जीना दुश्वार हो गया है। जिधर देखो वहीं गंदगी के ढेर लगे हैं। दुकान, मकान, पार्क व सड़कों किनारे फैली गंदगी से बदबू उठ रही है। लोग घरों से निकलने वाले कूड़े को पॉलीथिन के बैग में मौका देखकर जहां.तहां फेंक रहे हैं। सबसे बुरी स्थिति प्राथमिक कचरे घरों की है। यहा कूड़े के पहाड़ बन चुके है।
मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन व अन्य सामाजिक संगठनों ने सिटी मजिस्ट्रेट आफि स के बाहर कूड़ा फेंककर विरोध दर्ज किया। यह विरोध प्रदर्शन सेक्टर-123 में प्रस्तावित डंपिंग ग्राउंड के लिए किया गया। किसान व सामाजिक संगठनों ने सेक्टर-54 से ट्रेक्टर में कचरा लेकर सेक्टर-20 तक पैदल रैली निकाली। उद्देश्य था क्षेत्रीय विधायक के कार्यालय के बाहर कचरा फेंक विरोध दर्ज कराना था। लेकिन वहां ऐसा हो नहीं सका। पुलिस बल के चलते किसान वहां से चले गए। वहां मुख्य कार्यपालक अधिकारी का पुतला फूंका गया। इसके बाद कचरा लेकर सेक्टर-19 स्थित सिटी मजिस्ट्रेट आफिस पहुंचे। यहा कचरा फेंककर विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वह सेक्टर-123 में डंपिंग ग्राउंड नहीं बनने देंगे। इस सेक्टर के आसपास 50 हजार से ज्यादा लोग निवास कर रहे है। यहा से उठने वाली बदबू से लोगों का रहना दूभर हो जाएगा। गांव का स्वच्छ वातावरण दूषित हो जाएगा। लिहाजा वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
सेक्टरों के बाहर लगे कचरे के ढेरः प्राधिकरण के पास विकल्प नहीं है कि वह कचरा कहा फेंके। लिहाजा प्राथमिक सेंटरों के अलावा सेक्टरों के बाहर व सड़कों से कचरा साफ ही नहीं किया जा रहा। सेक्टर-21, 25, 40, 39 के अलावा करीब एक दर्जन सेक्टरों के बाहर कचरे के पहाड़ जमा है। बदबू से लोगों का हाल बेहाल है। लोग राह चलते कचरा फेंक रहे है। साफ सफाई नहीं होने से ग्रीन नोएडा क्लीन नोएडा को कचरा मय नोएडा बना दिया है। सेक्टरवासियों ने बताया कि पहले तो प्राधिकरण कर्मचारी कचरा उठाकर ले भी जाते थे। लेकिन अब वह भी नहीं उठाया जा रहा।
प्राधिकरण ने नहीं बनाया प्लान अब शहरवासी परेशानः प्राधिकरण की स्थापना 1976 में हुई। वर्तमान की आबादी करीब 12 लाख है। लेकिन कचरे निस्तारण की व्यवस्था आज तक नहीं की गई। मास्टर प्लान में भी कचरे के निस्तारण के लिए कोई ठोस कदम शामिल नहीं किया गया। अब सोसाइटी के बीच में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट बनाने की योजना बनाई गई। लोगों ने इसका विरोध शुरु कर दिया। आलम यह है कि प्राधिकरण लोगों से सामाजिक संगठनों, आरडब्ल्यूए से पूछ रही है कि कचरे कहां फेंके। जवाब किसी के पास नहीं है। इसका खामियाजा आम लोगों को गंदगी व बदबू से उठाना पड़ रहा है।

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