प्रदूषण के चलते ईट भट्टों के संचालन पर लगी रोक

प्रदूषण के चलते ईट भट्टों के संचालन पर लगी रोक

ग्रेटर नोएडा। दिल्ली और एनसीआर में दीपावली के बाद प्रदूषण न केवल चरम सीमा पर पहुंच गया बल्कि खतरे की सीमा को भी पार गया था। एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लाख प्रयासों के बाद प्रदूषण का स्तर जितना कम होना चाहिए था वैसा नही हो पाया। वायु प्रदूषण में ईंट भट्ठों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। प्रदूषण विभाग की ओर से ईंट भट्ठों के मानक तय किए गए हैं। गौतमबुद्धनगर में ईंट भट्ठों की संख्या सैकडों में हैं जिनमें से ज्यादातर भट्ठे सरकारी मानकों की धज्जिया उठाते हुए हवा में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। जब कि कुछ ईंट भट्ठे सरकारी मानकों पर खरा उतरने का प्रयास कर रहे हैं। गौतमबुद्धनगर ईंट निर्माता समिति के अध्यक्ष ओमवीर सिंह भाटी एडवोकेट और महामंत्री रजनीकांत अग्रवाल से ईंट भट्ठा और प्रदूषण नियंत्रण मुद्दे पर बताया कि बढते हुए वायु प्रदूषण को देखते हुए अब जिग जेग भट्ठे ही चलेंगे। सरकार ने गत 30 जून 2018 तक सभी भट्ठों को जिग जेग ड्राफ्ट बनाए जाने के निर्देश दिए थे। इनमें से 40 भट्ठें हैं जो जिग जेग ड्राफ्ट में बदल गए हैं। उन्होंने बताया कि गौतमबुद्धनगर में कुल 85 भट्ठें हैं जो जिग जेग ड्राफ्ट में बनाए जाने हैं इनमें से 40 भट्टे जिग जेग बन गए हैं। दीपावली के बाद 12 नवंबर 2018 से प्रदूषण खतरनाक स्तर पर सीवियर चल रहा है।

रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

जिसमें भट्टों को बंद किए जाने का प्रावधान है। कई बार प्रदूषण का स्तर सीवियर प्लस ईमरजेंसी भी हो गया है। ऐसे में दिल्ली और पूरे एनसीआर के भट्ठों को बंद किए जाने का आदेश है। प्रदूषण का स्तर पूअर और वैरी पुअर हो जाता है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भट्टों पर पानी का छिडकाव किए जाने और कोयले तथा मिट्टी आदि को तिरपाल से ढकते हुए सावधानियां बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि एनसीआर क्षेत्र के अलावा उत्तर प्रदेश में ईंट भट्ठों को 1 फरवरी 2019 से चलाया जाएगा। इस संबंध में लखनउ में हाल के दिनों में एक बैठक संपन्न हुई थी जिसमें संबंधित अधिकारियों और मुख्यमंत्री ने भी भाग लिया था। उन्होंने कहा कि गौतमबुद्धनगर ईंट निर्माता समिति के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि हवा में जिस प्रकार जहर घुल रहा है प्राण वायु पर संकट की स्थिति आने में कोई कमी नही है इसलिए सरकार द्वारा तय मानकों का अक्षःरस पालन किया जाना चाहिए। स्वच्छ वातावरण भी स्वच्छ वायु मंडल से ही बनता है यह हम सब की जिम्मेदारी बनती है कि वायु मंडल को दूषित न होने दें और वातावरण को भी स्वच्छ और स्वस्थ बनाए रखें। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

Share it
Top