दूसरी परियोजना में पैसा लगाने पर बायर्स ने बिल्डर के खिलाफ किया प्रदर्शन

दूसरी परियोजना में पैसा लगाने पर बायर्स ने बिल्डर के खिलाफ किया प्रदर्शन

नोएडा। गार्डिनिया ग्लैमर फेज 2, वसुंधरा, गाजियाबाद के फ्लैट बायर्स ने अपने हक की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतर कर गार्डिनिया इंडिया लिमिटेड ग्रुप के स्पेक्ट्रम कमर्शियल प्रोजेक्ट, सेक्टर 75 नोएडा के गेट पर एकत्र होकर बैनरों के साथ नारेबाजी की। फ्लैट बायर्स ने बताया कि गार्डिनिया ग्लैमर फेज-2 प्रोजेक्ट पर लगभग 100 करोड़ के देनदारी है जिसमे बिल्डर पर आवास एवं विकास परिषद् और कारपोरेशन बैंक का करोडो रुपए बकाया है बिल्डर ने उनसे तो पूरा पैसा ले लिया परन्तु आगे पैसा नहीं चुकाया है और वह पूरा पैसा मनोज राय (बिल्डर) ने स्पेक्ट्रम कमर्शियल सेक्टर 75 नोएडा में लगा दिया है इससे लोग बहुत उत्तेजित और नाराज हैं उन्होंने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, आवास एवं विकास परिषद् में भी शिकायत की है। बिल्डर, बैंक और अथॉरिटी की मिली भगत होने के कारण। फ्लैट बायर्स कोई मदद मिलती प्रतीत नहीं हो रही। कुछ लोगो ने बताया की यह लड़ाई अब सड़क पर ही लड़ी जाएगी जब तक बिल्डर इस प्रोजेक्ट की सभी समस्याएं सुलझा नहीं देता। बिल्डर पर फ्लैटस की रजिस्ट्री नहीं करवाने की वजह से सरकार को स्टाम्प ड्यूटी की रूप में राजस्व की जो हानि हो रही है उसके विरुद्ध स्टाम्प एवं राजस्व विभाग द्वारा बिल्डर के खिलाफ एफआईआर भी कराई गयी है, परन्तु सरकारी ढुलमुल रवैये से बिल्डर आजादी के साथ सरकारी तंत्र को अंगूठा दिखाते हुए आजाद घूम रहा है और उस पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। विदित हो कि फ्युटेक शेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी जिसके डायरेक्टर संजीव शर्मा और मनोज राय हैं, को आवास एवं विकास परिषद् से प्लाट बहुमंजिला इमारत बनाने के लिए अलॉट हुआ। उस पर गार्डिनिया इंडिया लिमिटेड, जिसमे भी दोनों संजीव शर्मा एवं मनोज राय डायरेक्टर हैं, के द्वारा निर्माण शुरू किया गया कि फ्लैट्स दिसंबर 2०12 तक ग्राहकों को रहने के लिए दे दिए जायेंगे। लेकिन बिल्डर समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर पाया और इस प्रोजेक्ट को चार साल लेट कर दिया है। अभी कुछ फ्लैट बायर्स ने सूचना के अधिकार के अंतर्गत आवास एवं विकास परिषद से जानकारी एकत्र की है कि फ्युटेक शेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड पर आवास एवं विकास परिषद् की 64 करोड़ बकाया राशि है जो बिल्डर ने आवास एवं विकास परिषद् को नहीं चुकाई है। इसी कारण से प्लाट का रजिस्ट्रेशन बिल्डर के पक्ष में आवास एवं विकास परिषद् के द्वारा हस्तानांतरण नहीं हुआ है। अतः इसकी वजह से फ्लैटस की रजिस्ट्री नहीं हो सकी है जिसकी वजह से प्रदेश की सरकार को स्टाम्प ड्यूटी की रूप में राजस्व की प्रा'ि भी नहीं हुई है।

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