मुलायम के गढ़ में अकेले पड़े शिवपाल, साफ दिखी गुटबाजी

मुलायम के गढ़ में अकेले पड़े शिवपाल, साफ दिखी गुटबाजी

आजमगढ़। समाजवादी कुनबे में सब कुछ ठीक होने का दावा भले ही किया जा रहा हो लेकिन हकीकत यही है कि सपा में अब पूर्व सीएम अखिलेश यादव के चाचा और सहकारी ग्राम विकास बैंक के सभापति शिवपाल यादव के लिए कोई जगह नहीं है। यही नहीं कल तक जो लोग शिवपाल यादव के नाम की माला जपते थे अब वे इनकी परछाई से भी कतराने लगे हैं। इसकी बानगी पिछले 24 घंटों के बीच मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में देखने को मिली। कभी जिन चौराहों पर शिवपाल के आगमन पर सड़कें फूलों से पट जाती थी, आज वहां सन्‍नाटा दिखा। सपा के पूर्व मंत्री, विधायक या संगठन के लोग तो दूर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी शिवपाल यादव से किनारा कर लिया।
सपा में अलग-थलग पड़ने के बाद शिवपाल यादव पहली बार आजमगढ़ दौरे पर आये हैं। उन्‍होंने यहां आने के लिए वह क्षेत्र चुना जहां उनके बेहद करीबी थे। माना जा रहा था कि अतरौलिया में उनके करीबी पूर्व मंत्री बलराम यादव कम से कम उनका स्‍वागत करेंगे। अंबेडकर नगर में बवाल के कारण शिवपाल का रूट बदला और उन्‍हें शाहगंज होकर आजमगढ़ आना पड़ा लेकिन इसके बाद भी शिवपाल अतरौलिया गए। रामप्‍यारे यादव, फूलचंद यादव के नेतृत्‍व में लोगों ने शिवपाल का स्‍वागत किया और पूर्व मंत्री बलराम यादव, उनके पुत्र विधायक संग्राम यादव और उनके समर्थक कहीं नजर नहीं आये। जबकि यह वहीं शिवपाल है जो बलराम यादव की बर्खास्‍तगी के बाद अखिलेश से लड़े थे और मुलायम सिंह पर दबाव डालकर उन्‍हें दोबारा मंत्री बनवाया था।
यहीं नहीं सपा जिलाध्‍यक्ष हवलदार यादव, विधायक दुर्गा प्रसाद यादव, पूर्व विधायक श्‍यामबहादुर यादव सहित सभी पूर्व मंत्री और विधायक शिवपाल से दूर रहे। बल्कि यूं कह सकते हैं कि अखिलेश खेमा पूरी तरह शिवपाल को नजरअंदाज करता दिखा, मुलायम के करीबी भी उनके साथ नहीं खड़े हुए।
पूर्व जिलाध्‍यक्ष राम दर्शन यादव टिकट कटने से नाराज थे और टिकट न मिलने से नाराज बसपा छोड़कर सपा में आये पूर्व विधायक मलिक मसूद शिवपाल यादव के साथ नजर आये। यही वजह है कि शिवपाल के आगमन से ज्‍यादा जिले में चर्चा उनके राजनीतिक भविष्‍य की रही। राजनीति के जानकारों की माने तो शिवपाल के लिए सपा में अब कोई जगह नहीं है। यही वजह है कि वे इशारों में ही सही लेकिन अपने समर्थकों को यह समझाने का प्रयास करते नजर आए कि वह मोर्चा गठन के लिए कटिबद्ध हैं।

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