भदोही:सचिन के बेटे संग श्रीलंका में क्रिकेट का जलवा दिखाएगा यशस्वी

भदोही:सचिन के बेटे संग श्रीलंका में क्रिकेट का जलवा दिखाएगा यशस्वी


भदोही। उत्तर प्रदेश के भदोही के यशस्वी का चयन भारतीय टीम की अंडर-19 के लिए हुआ है। मामूली परिवार से आने वाले इस युवक पर यह शेर फिट बैठता है कि कामयाबी मिल जाएगी एक दिन निश्चित तुम्मे, बस खुद को बढ़ने के लिए तैयार रखना। मुंबई के आजाद मैदान पर पानीपुड़ी की दुकान पर काम भी किया। यह युवा अब मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन के साथ श्रीलंका दौरे पर जा रहा है।
हालांकि अर्जुन का चयन अंडर-19 टेस्ट मैच के लिए हुआ है जबकि इसका चयन वन-डे के लिए। अर्जुन वहाँ पहुँच गया है। यशस्वी की टीम 24 जुलाई को जाएगी। कोच ज्वाला सिंह बताते हैं की उसके अंदर क्रिकेट की एक दीवानगी है। वह पैसे के लिए नहीं नाम के लिए खेलना चाहता है। वह हमारे बेटे जैसा है। गुरुवार को सुबह दस बजे वह अभ्यास पर था।
पूरा परिवार बेटे की इस उपलब्धि पर खुश है। सुरियावां नगर में पेंट की दुकान चलाने वाले पिता ने भूपेंद्र जायसवाल उर्फ गुड्डन ने बताया की क्रिकेट यशस्वी के जिंदगी का सपना था। उसने कहां था बुट पालिश करना पड़ेगा तो भी करुंगा, लेकिन एक दिन अच्छा क्रिकेटर बन कर दिखाउंगा। उसकी इस काबिलियत को देखते हुए क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलर ने यशस्वी को घर बुलाया था और खले के गुर सिखाने के बाद खुद के हस्ताक्षर से युक्त बल्ला सौंपा था।
पांच साल की उस उम्र में जब जुबान की भाषा भी पढ़ना आसान नहीं होता, उस दौर में इंडिया अंडर-19 में चयनित यशस्वी की नींद में क्रिकेट मैदान, बल्ला और बाल दिखता था। पापा से कहता था एक दिन मैं भारत का बड़ा स्टार बन कर दिखाउंगा। पिता भूपेंद्र उसके मास्टर कोच थे। वह भी एक अच्चे क्रिकेटर थे अहमदाबाद की सिल्वर कंपनी के लिए कभी खेला करते थे। भारत की अंडर-19 टीम बंग्लौर में कैंप कर रही है। उसी टीम में देश के महान क्रिकटर सचिन तेंदुलकर का बेटा अर्जुन तेंदुलकर भी है। जिसका चयन अंडर - 19 टेस्ट टीम के लिए हुआ है।
यशस्वी की कामयाबी के पीछे क्रिकेट अकादमी चलाने वाले सर ज्वाला सिंह का हाथ हैं। जिन्होंने 10 साल की उम्र में उसकी प्रतिभा को समझा और उसे आजाद मैदान उठाकर अपने पास ले गए। उन्हें पूरा परिवार भगवान कहता है। यशस्वी के पिता के मोबाइल में इनका नाम मेरे भगवान नाम से सेव है। 11 साल की उम्र में यशस्वी आजाद मैदान का डालना बन गया। उसे लोग मोंटी के नाम से बुलाने लगे। इसके पूर्व इसका दाखिला बाम्बे सेंटल के अंजुमन क्रिकेट स्कूल में करा दिया गया।
यशस्वी और तेजस्वी दोनों सगे भाई हैं और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के जिले भदोही के सुरियावां नगर से आते हैं जिस जिले की कारेपट पूरी दुनिया में मशहूर है। तेजस्वी भी अच्छा खिलाड़ी था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। बचपन में यशस्वी को क्रिकेट से इतना लगाव था कि उसने घर में ही मैदान बना रखा था। रात के कड़ाके ठंड में भी पापा को जगाता और खुद के हाथ में बल्ला लेता और पिता को बाल थमा प्रैक्टिस करता। पिता दोनों को 2009 में एक साथ मुंबई में लेकर और यशस्वी ने जिंदगी सारी जद्दो जहद को झेला और सफल हुआ।
मुंबई के घरेलू मैंच में 319 रन का जहां रिकार्ड बनाया वहीं 13 विकेट भी लिए। 2017 में इसका चयन मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन में अंडर-16, 19 और 23 के लिए हुआ। मुंबई प्रीमियर लीक के लिए भी इसने खेला। फिर कभी मुड़कर नहीं देखा। भारत के मशहूर क्रिकेटर दिलीप बेंगसरकर इसे अंडर-14 में खिलाने के लिए इंडलैंड लेकर गए। जहां इसने दोहरा शतक जड़ा और 10 हजार पाउंड का इनाम जीता।
मोंटी को जब समय मिलता तो वह आजाद मैदान पर पानीपूड़ी वाले अंकल की मदद करता और मैदान में होने वाले क्रिकेट की वह स्कोरिंग भी करता। इसके अलावा जब बाउंड़ी की वजह से गेंद मैदान के बाहर चली जाती तो टीम के खिलाड़ी खोजने के लिए उसे खोजने के लिए भेजतें है। पिता की आर्थिक हालात ठीक नहीं थी। उसे 2000 हजार रुपये किसी तरह हर माह भेजतें। वह 10 साल की उम्र में मुम्बई को अपने दिल में बसा लिया था। आज सचिन तेंदुलकर का बेटा अर्जुन उसका दोस्त है। वह कहता भी है कि हम दोनों में खूब जमती है। जिसके लिए उसे पैसे मिल जाते, जिससे वह अपने खेल की तैयारियां करता था। बेटे की इस उपलब्धि से मां कंचन और एकता, नम्रता के साथ बड़ा भाई तेजस्वी बेहद खुश हैं। उसकी इस कामयाबी पर सभी को गर्व है।

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