सहारनपुर में मशहूर बासमती धान की बाजार में कीमत गिरने से किसान तनाव में

सहारनपुर में मशहूर बासमती धान की बाजार में कीमत गिरने से किसान तनाव में


सहारनपुर (गौरव सिंघल)। सहारनपुर की मशहूर बासमती धान की लागत तो बढ़ी है लेकिन इस बार उसके बाजार भाव में पिछले वर्ष की तुलना में 400 रूपए प्रति क्विंटल गिरावट होने से बासमती उत्पादक किसान तनाव में हैं। सहारनपुर जनपद में बोए जाने वाले धान का कुल क्षेत्रफल 59586 हेक्टेयर है। जिसमें इस बार बासमती धान का क्षेत्रफल 38201 हेक्टेयर था। मंडी समिति सहारनपुर की सचिव नीलिमा गौतम ने आज बताया कि पिछले साल की तुलना में बासमती धान की कीमत में गिरावट उसकी डिमांड में कमी होने से है। पिछले वर्ष बाजार में पूसा नं-1 बासमती धान की कीमत 2800 से 2900 रूपए प्रति क्विंटल थी। इस बार 2400 रूपए प्रति क्विंटल है। बासमती 1121 प्रजाति की बासमती बाजार भाव इस बार 2600 रूपए प्रति क्विंटल तक है। पिछले वर्ष यह भाव 3000 से 3100 रूपए था और 1509 प्रजाति की बासमती का बाजार भाव 2400 रूपए प्रति क्विंटल है, जबकि पिछली बार 2700 रूपए प्रति क्विंटल था। देवबंद के बड़े आढ़ती बलराम सिंघल और मोहित सिंघल मैसर्स मंगलसैन मामचंद ने आज बताया कि जिले में बहुत अच्छी क्वालिटी की बासमती की पैदावार में भारी कमी आई है। सहारनपुर जिले में ज्यादातर चावल और बासमती हरियाणा से आ रही है। हिंदू समाज के लोग कच्ची बासमती खरीदना और खाना पसंद करते हैं।

जबकि मुस्लिम समाज के लोग सैला बासमती खाना पसंद करते हैं। बलराम सिंघल ने बताया कि किसानों ने बासमती धान की फसल में कीटनाशकों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। जिससे बासमती चावल की गुणवत्ता व स्वाद दोनों ही कम हुआ है। बलराम सिंघल के मुताबिक ज्यादातर बासमती उत्पादक किसान अपने खुद के इस्तेमाल के लिए बोते हैं। बहुत अच्छी क्वालिटी की बासमती सही मायनों में बाजार में उपलब्ध ही नहीं है। बासमती उत्पादक किसान सही बाजार भाव नहीं मिलने से तनाव में है और धीरे-धीरे बासमती की पैदावार और क्षेत्रफल को घटा रहे हैं जबकि एक वक्त ऐसा था जब सहारनपुर जिला अपनी श्रेष्ठ बासमती के लिए विश्वभर में विख्यात था। अब लोग उस जैसी बासमती को तरस गए। जबकि उस बासमती की मांग बाजार में कायम है।

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