सहारनपुर :भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण ने कहा कि भीम आर्मी और वह खुद चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे

सहारनपुर :भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण ने कहा कि भीम आर्मी और वह खुद चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे


चंद्रशेखर ने रहस्योद्घाटन किया कि भाजपा उनकी रिहाई के बदले चाहती थी कि वह कैराना लोकसभा उपचुनाव में उतरे

चंद्रशेखर से आशंका जताई कि उन्हें फिर गिरफ्तार किया जा सकता है

सहारनपुर (गौरव सिंघल)। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण ने जेल से रिहाई के बाद ऐसे कई सवालों के जवाब दिए जिनको उनकी 15 माह की जेलबंदी के दौरान धुंध छाई हुई थी। चंद्रशेखर ने अपने कस्बा छुटमलपुर स्थित आवास पर पत्रकारों को आज बताया कि ना तो भीम आर्मी और ना ही वे स्वयं ही चुनाव में उतरेंगे। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि वे बहुजन समाज पार्टी और मायावती के खिलाफ नहीं हैं। चंद्रशेखर से दो टूक कहा कि वह भाजपा के निकट कभी नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ 2019 के लोकसभा चुनावों में महागठबंधन बनता है तो वे उनका समर्थन करेंगे और देशभर में घूमकर शोषितों, पीड़ितों, दलितों को संगठित करेंगे। उनकी आवाज को मुखर करेंगे। चंद्रशेखर ने उनसे मिलने आए प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष इमरान मसूद, कांग्रेस विधायक नरेश सैनी और मसूद अख्तर का उनके संकट की घड़ी में साथ देने के लिए उनका आभार जताया।

चंद्रशेखर ने रहस्योद्घाटन करते हुए कहा कि भाजपा नेतृत्व ने उनसे आग्रह किया था कि वह कैराना लोकसभा उपचुनाव में उतरे। ऐसा करने पर उनकी रासुका से रिहाई करा दी जाती लेकिन उन्होंने यह शर्त मंजूर नहीं की। इसी कारण उनकी रिहाई को योगी सरकार और उसका प्रशासन लटकाता रहा। उन्होंने समय पूर्व रिहाई के बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था। इसलिए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से डरकर 45 दिन पूर्व रिहा कर दिया। चंद्रशेखर ने खुलकर कहा कि वे ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे दलितों में फूट पड़े और उसका लाभ दलित विरोधी भाजपा जैसे राजनीतिक दल उठाने का काम करे। चंद्रशेखर ने यह आशंका भी जताई कि उनको राज्य सरकार कोई ना कोई साजिश कर फिर से जेल भेज सकती है।

चंद्रशेखर ने अपनी सुरक्षा को खतरा बताते हुए सरकार और प्रशासन से मांग की है कि उन्हें मजबूत सुरक्षा प्रदान की जाए। चंद्रशेखर की रिहाई पर उनके बगल में बैठी उनकी मां कमला देवी ने सफाई दी कि वह बेटे की रिहाई के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने नहीं गई अलबत्ता वे स्वीकार किया कि चार माह पहले मुख्यमंत्री को बेटे की रिहाई के लिए पत्र जरूर भेजा था। चंद्रशेखर की रिहाई पर पूरे जनपद में दलितों ने जमकर जश्न मनाया लेकिन डीजीपी ओपी सिंह के सर्तकता बरतने के निर्देशों के चलते जिला पुलिस प्रशासन सतर्कता बरत रहा है और आज सहारनपुर में भीम आर्मी के लोगों को रविदास छात्रा आवास में भीम आर्मी के नेताओं को प्रेस कांफ्रेंस नहीं करने दी गई। थाना जनकपुरी पुलिस ने मौके पर जाकर यह कहते हुए प्रेस कांफ्रेंस रूकवा दी कि उन्होंने पुलिस से अनुमति नहीं ली है। खास बात यह है कि चंद्रशेखर की रिहाई और दलितों में जोशो-खरोश का भाव दिखने के बावजूद जिलेभर में सामाजिक सौहार्द्र और भाईचारा बना हुआ है। हालांकि कुछ राजपूत नेताओं ने चंद्रशेखर की रिहाई पर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कड़ी आलोचना की है।

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