कानपुर। जिला अस्पताल उर्सला के निदेशक कार्यालय में तैनात घूसखोर बाबू को विजिलेंस की टीम ने बुधवार को रंगें हाथों धरदबोचा। टीम ने घूस में दिये गये 10 हजार रूपये के साथ बाबू को गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद विजिलेंस टीम ने साक्ष्यों सहित कोतवाली में बाबू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
सरसौल ब्लॉक में तैनात क्लर्क रविन्द्र प्रताप को किडनी में परेशानी है, जिसका वह इलाज करा रहा हैं। इधर कई दिनों से वह डेढ़ लाख के मेडिकल बिल के भुगतान के लिए लगातार जिला अस्पताल उर्सला के निदेशक कार्यालय के चक्कर काट रहा था और हर बार अगली बार आने के लिये बोल दिया जाता था। मेडिकल बिल के भुगतान के लिये कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक नीरज द्विवेदी जब समझ गय कि अब यह परेशान हो गया है तो डेढ़ लाख के बिलों को पास करने के एवज में 10 हजार रूपयों की घूस मांग ली। जिस पर रविन्द्र ने मामले की शिकायत विजिलेंस से की। जिसके बाद विजिलेंस टीम ने तय रणनीति के तहत रविन्द्र को घूस के 10 हजार रूपये देने को कहा। टीम घूस के रूपयों में पहले से ही पाउडर लगा रखा था। बुधवार को दोपहर जब रविन्द्र निदेशक कार्यालय गया तो बाबू ने पूछा कि व्यवस्था हो गयी है तो उसने हामी भर दी। जिसके बाद घूसखोर बाबू ने उसकी फाइल निकाला और रूपया देने की बात कही। जिस पर रविन्द्र ने विजिलेंस द्वारा दी गई 10 हजार रूपये की गड्डी दे दी और कुछ ही समय में टीम ने कार्यालय के अंदर बाबू को रंगे हाथों धर दबोचा। शिकायत कर्ता ने आरोप लगाया कि यह बाबू बिना रूपयों के काम ही नहीं करता चाहे कर्मचारी जितनी बड़ी मुसीबत में हो। इसी को देखते हुये विजिलेंस से संपर्क किया। विजिलेंस इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार ने बताया घूसखोर बाबू को सबूतों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराते हुये उसे कोतवाली पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया है।
कोतवाली इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार शुक्ला ने बताया कि अभियुक्त बाबू को जेल भेजा जा रहा है। वहीं विजिलेंस की इस बड़ी कार्यवाही को देख जिला अस्पताल उर्सला के कर्मचारियों व अधिकारियों में खौफ साफ देखा जा रहा था।

Share it
Share it
Share it
Top