दलित सशक्तिकरण के मकसद से भीम आर्मी ने शुरू की पाठशालायें

दलित सशक्तिकरण के मकसद से भीम आर्मी ने शुरू की पाठशालायें

सहारनपुर (गौरव सिंघल)। दलितों के अधिकारों को लेकर देश भर में छिडी बहस के बीच दलित संगठन भीम आर्मी ने इस समुदाय के लिये पाठशाला खोलने की अभिनव पहल की है। सहारनपुर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भीम आर्मी पाठशाला अस्तित्व में आ चुकी है। पाठशाला का मकसद दलित बच्चों को मुफ्त कोचिंग देकर उनका भविष्य संवारना है। पाठशाला में दलित विभूतियों के संघर्षशील जीवन का परिचय भी कराया जायेगा।
भीम आर्मी के सहारनपुर जिलाध्यक्ष कमल वालिया ने आज बताया कि राज्य भर में एक हजार से ज्यादा भीम पाठयशालायें खुलेंगी। उन्होने पत्रकारों से कहा " गरीब दलित अभिभावक पैसे की किल्लत के कारण अपने बच्चों का दाखिला अच्छे स्कूल में नही करा पाते जबकि सरकार विद्यालयों की हालत बेहद दयनीय है। हमने 21 जुलाई 2015 को ऐसी पाठशालायें खाेलने का फैसला किया था।
अब बच्चे पाठशालाओं में हर रोज दो घंटा बिताते हैं। इन पाठशालओं में बच्चे अध्ययन अध्यापन पेड़ों की छांव में करने हैं। इसके अलावा पाठशालायें रविदास मंदिर अथवा भीम आर्मी के किसी कार्यकर्ता के घर पर आयोजित होती है।
पाठशाला का संचालन करने वाले वालिया ने कहा कि भीमआर्मी इन विद्यालयों के लिये हर महीने 3000 रूपये खर्च करती है हालांकि अध्यापक इस नेक काज के लिये पगार नही लेता है। स्नातक और परास्नातक दलित छात्र पाठशाला में अध्यापन की मुफ्त सेवा देते है जबकि इन पाठशालाओं के लिये दलित सदस्य हर महीने 50 से 300 रूपये खर्च करते है।
उन्होने कहा कि ये पाठशालायें दलित सशक्तिकरण का साफ राजनीतिक संदेश समाज को दे रही है। कक्षाओं की शुरूआत से पहले छात्र जय भीम का उदघोष करते है। भीम आर्मी के नेता इन पाठशालाओं में अध्ययनरत बच्चों के लिये किसी विभूति से कम नही है।

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