सहारनपुर : संविधान को उसकी भावना के अनुरूप लागू किया जाए तो सभी वंचितों को न्याय मिल सकेगा

सहारनपुर : संविधान को उसकी भावना के अनुरूप लागू किया जाए तो सभी वंचितों को न्याय मिल सकेगा

सहारनपुर (गौरव सिंघल)। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डा. विवेक कुमार ने कहा कि अनुसूचित जातियों और जन-जातियों के लिए संविधान में आरक्षण की जो व्यवस्था की गई है। उसे समाप्त नहीं किया जा सकता है। प्रोफेसर विवेक कुमार सहारनपुर में जागृति फाउंडेशन की ओर से आयोजित विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
गोष्ठी का विषय था बाबा साहब डा. भीम राव आंबेडकर का राष्ट्र निर्माण में योगदान। प्रोफेसर विवेक कुमार ने इस विषय पर तो अच्छी तरह से प्रकाश डाला ही साथ ही उन्होंने देश के दलित समाज के सम्मुख खडे ज्वलंत सवालों पर भी अपना मत व्यक्त किया। उन्होंने दो टूक कहा कि हिंसा और उग्र आंदोलन के जरिए कोई भी समाज या वर्ग अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता है।
सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भीम सेना की मौजूदगी और पिछले एक-डेढ साल से उसके द्वारा जारी हिंसक आंदोलन पर डा. विवेक कुमार की स्पष्ट राय थी कि दलितों को हिंसा के मार्ग पर चलने से कुछ भी हांसिल नहीं होगा। उन्हें लोकतंत्र मेंदिए मताधिकार का विवेक पूर्ण ढंग से इस्तेमाल करना चाहिए। इसी से सत्ता और समाज बदलाव आ सकता है। किसी भी हिंसा और उग्रता को शासन-प्रशासन कानून सम्मत तरीके से आसानी से निपट सकता है।
डा. विवेक कुमार ने कहा कि डा. अंबेडकर की कोशिशों के कारण भारत की एकता और अखंडता बनी रही। ब्रिटिश शासन ने स्वतंत्रता से पहले देशी रिसासतों को स्वतंत्र करते हुए भारत या पाकिस्तान के साथ जाने से छूट दे दी थी। लेकिन डा. आंबेडकर साहब ने अंतर्राष्ट्रीय प्रसे कांफ्रेस कर ब्रिटिश सरकार की सोच को चुनौती देते हुए कहा था कि उसे ऐसा करने का कोई कानूनी और नैतिक अधिकार नहीं है। भारत एक सार्वभौमिक और गणतांतिक देश है। उसे इस तरह से विभाजित नहीं किया जा सकता। डा. साहब के इस कदम के बाद भारत सरकार ने सभी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कर लिया था।
उन्होंने कहा कि 1935 में भारतीय रिर्जव बैंक की स्थापना भी डा. साहब के विचारों के आधार पर हुई थी। उन्होंने सरकारी दफ्तरों में काम करने के घंटे 12 से 8 कर दिए थे। वेतन आयोग, टीएडीए का प्रावधान का भी अंबेडकर ही देन है।
पत्रकारों से बातचीत से प्रोफेसर विवेक कुमार ने कहा कि यदि संविधान को उसकी मूल भावनाओं के साथ लागू कर दिया जाता है तो उससे समाज के सभी तबको को न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि आजादी के 71 साल बाद भी सिस्टम पर एक जाति विशेष का ही वर्चस्व बना हुआ है। अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधियों को सत्ता में कही भी भागीदारी नहीं मिली हुई है। जागृति फाउंडेशन के संरक्षक केडी गौतम, अध्यक्ष रतिराम गौतम, सलाहकार राजेश कुमार , अनुज कुमार, एसके गौतम, सुरेंद्र सिंह, राजेश्वर बंधू और राकेश आदि ने भी विचार रखे।

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