उत्तर प्रदेश: विपक्ष के बायकाट के चलते सूना सा है उप्र विस का बजट सत्र

उत्तर प्रदेश: विपक्ष के बायकाट के चलते सूना सा है उप्र विस का बजट सत्र

लखनऊ । उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्षी दलों के सदन की कार्यवाही का बहिष्कार के कारण बजट सत्र सूना सा है। इस दौरान वर्ष 2017-18 का बजट तथा विपक्ष की गैर हाजिरी में कल 69 मदों के प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित किये गये। 11 विभागों का बजट अनुदान भी पारित कर दिया गया। तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार 11 जुलाई से शुरू हुअा बजट सत्र 28 जुलाई तक चलना था । इसमें कुल 14 बैठकें होनी थी।
विपक्ष के 20 जुलाई से पूरे बजट सत्र के बायकाट के निर्णय के बाद विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने सत्र को छोटा कर आगामी 24 जुलाई कर दिया है। सदन की 20 तथा 21 जुलाई को हुई बैठकों में विपक्षी दल उपस्थित नहीं रहे।
दीक्षिन ने सदन को बताया कि अब केवल एक बैठक आगामी सोमवार को होगी। पिछले 11 जुलाई से शुरू हुये बजट सत्र के दौरान गत 19 जुलाई को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट चर्चा के दौरान राज्य लोक सेवा आयोग की 2012 से हुई नियुक्तियों की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) से कराने की घोषणा की थी।
उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की नियुक्तियों में व्यापक पैमाने पर धांधली हुई है, इसलिए 2012 से अब तक हुई नियुक्तियों की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो से करायी जायेगी। जांच होगी, कार्रवाई होगी।
हरियाणा के एक मुख्यमंत्री नियुक्तियों में धांधली के आरोप में ही दस वर्षों से जेल में हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी(सपा) सरकार के कार्यकाल में आयोग की नियुक्तियों पर कई बार सवाल खड़े किये। उन्होंनेे कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय तक को इस मामले में दखल देना पड़ा था।
योगी ने कहा था प्रदेश के नौजवानों का हक मरने नहीं देंगे। नियुक्तियों में उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा रखी थी। नियुक्तियों के कागजातों में आग भी लगा दिये गये। अब ऐसा नहीं होगा। जांच होगी और दोषी बख्शे नहीं जायेंगे।
सदन में मुख्यमंत्री एक घण्टा 36 मिनट दिये अपने भाषण के दौरान काफी आक्रामक दिखे। उन्होंने सपा पर तीखे वार किये। उनका कहना था कि बहुजन समाज पार्टी(बसपा) विधानमण्डल दल के नेता लालजी वर्मा कह रहे थे कि फाइलें जलायी गयीं। वास्तव में भर्तियों में यही हुआ। पुलिस भर्तियों में व्यापक धांधली की गयी। तीन वर्ष में डेढ़ लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती की जायेगी।
इसी वर्ष 33 हजार करेंगे जिसमें तीन हजार उपनिरीक्षक और 30 हजार सिपाहियों की भर्ती होगी। भर्ती पूरी तरह पारदर्शी होगी। योगी ने कहा कि दस वर्षों में जितनी भी नियुक्ति हुई सब पर अंगुली उठी।
क्योंकि, नियुक्ति करवाने वालों की नीयत साफ नहीं थी। युवाओं को उनके हक से वंचित किया गया। नेता विरोधी दल और सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविन्द चौधरी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा था, "आप लोग वित्तविहीन विद्यालय के शिक्षकों को उकसाकर बवाल मचवाते हैं।
शिक्षक भर्ती नहीं हुए तो इसके दोषी आप हैं। मेरी सरकार नहीं। मुझे आये तो अभी चार महीने ही हुए हैं। उनके माध्यम से आप लोग अराजकता फैला रहे हैं। " उन्होंने कहा कि सरकार यदि वित्तीय मदद देगी तो विद्यालय का अधिग्रहण करना होगा। यह प्रबंध तंत्र के स्वायत्तता में हस्तक्षेप है। आप लोग शिक्षितों को क्यों भिखमंगा बना रहे हैं। उनकी सरकार तो युवाओं को स्वावलम्बी बनाना चाहती है।

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