उत्तर प्रदेश: विपक्ष के विरोध के चलते बजट सत्र हुआ छोटा

उत्तर प्रदेश: विपक्ष के विरोध के चलते बजट सत्र हुआ छोटा

लखनऊ । उत्तर प्रदेश राज्य विधानसभा में लगातार दूसरे दिन विपक्ष द्वारा सदन का बायकाट करने के कारण योगी सरकार ने बजट सत्र को छोटा करते हुये साेमवार तक चलाने का फैसला किया है।
समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस के अलावा राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के सदस्यों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषण से आहत विपक्ष ने कल सदन की कार्रवाई का बहिष्कार किया था।
विपक्ष का आरोप है कि बजट सत्र में चर्चा के दौरान योगी ने विरोधी दलों को धमकाने की कोशिश की। विपक्ष के सदस्य आज भी विरोध स्वरूप काली पट्टी बांध कर सदन के बाहर धरने पर बैठे। चौधरी ने कहा " हम पूरे बजट सत्र का बहिष्कार करने की घोषणा करते है और हम इस पर एक सुर से कायम हैं।
" कांग्रेसी नेता अजय कुमार लल्लू ने चौधरी का समर्थन करते हुये कहा " इस मुद्दे पर समूचा विपक्ष एकजुट है और किसी सदस्य पर कोई दवाब नही है। भाजपा के नेता हमे बोलने नही दे रहे है जबकि मुख्यमंत्री विपक्ष को धमका रहे है। एेसी स्थिति में हमें यह अप्रिय फैसला लेने के लिये विवश होना पडा। " विपक्षी सदस्यों ने मांग की कि मुख्यमंत्री को बजट सत्र में चर्चा के दौरान अलोकतांत्रिक भाषा का इस्तेमाल करने के लिये खेद प्रकट करना चाहिये।
हालांकि भाजपा अौर उसके घटक दलों ने विपक्ष की मांग को नकारते हुये कहा कि विपक्ष सदन की कार्रवाई में भाग न लेकर अपनी भूमिका का निर्वहन नही कर रहा है।
संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि मुख्यमंत्री ने किसी भी तरह कोई अलोकतांत्रिक टिप्पणी नही की। विपक्ष का आरोप निराधार है। जब विपक्ष सदन की कार्रवाई में भाग नही ले रहा है तो इस दशा में सदन के मौजूदा सत्र को 28 जुलाई तक जारी रखने का कोई औचित्य नही है। अाज बजट के सभी प्रस्ताव पारित हो चुके हैं अौर सत्र का समापन किया जाये।
खन्ना के प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने अविलम्ब स्वीकार कर लिया। सपा और कांग्रेस सदस्यों ने विधानभवन परिसर में लगे चौधरी चरणसिंह की प्रतिमा के सामने मुंह पर पट्टी बांधकर प्रदर्शन भी किया। विपक्ष के नेता रामगोविंद चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार उन्हे जेल भेजने की धमकी दे रही है। विपक्ष को सदन में अपनी बात रखने की इजाजत नही दी जा रही है।
ऐसे में सदन की कार्रवाई में भाग लेने का कोई औचित्य नही है। बाद में खन्ना ने घोषणा की कि योगी विपक्ष को अपनी भूल सुधारने का एक और मौका देना चाहते हैं। इसलिये गृह और नागरिक प्रशासन विभाग के दो प्रस्ताव 24 जुलाई को पारित किये जायेंगे।
उनकी विपक्ष से अपील है कि स्वस्थ लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुये वे सदन की कार्रवाई में भाग लें। इस बीच विपक्ष की गैर हाजिरी में आज 69 मदों के प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित किये गये। 11 विभागों का बजट अनुदान कल पारित हुआ था।
इससे पहले खन्ना ने आरोप लगाया था कि विपक्ष साजिश कर रहा है। उन्होने कहा " यदि मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को जेल भेजने की घोषणा करते है और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग घोटाले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूराे से कराने की अनुशंसा करते हैं, तो इसमे गलत क्या है।
उनका कोई निजी एजेंडा नही है। वह भ्रष्टाचार का सफाया कर राज्य के लोगों का जीवनस्तर अच्छा करना चाहते हैं। " उन्होने कहा कि विपक्ष की भूमिका सरासर गैर जिम्मेदाराना है। जनता ने उन्हे चुनकर सदन भेजा है ताकि वे उनकी समस्यायों के बारे मे आवाज उठा सकें और समाधान निकाल सके।
इसके बजाय विपक्ष अपने दायित्व से बच रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने कल 40 मिनट तक विपक्ष को मनाने की कोशिश की मगर वे अपनी बात पर अडे रहे। यह दर्शाता है कि विपक्ष को सदन की कार्रवाई में कोई रूचि नही है।


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