प्रेमिका का बयान सुन कोर्ट ने प्रेमी को दी जमानत

प्रेमिका का बयान सुन कोर्ट ने प्रेमी को दी जमानत

हमीरपुर। यूपी के हमीरपुर जिला मुख्यालय में आठ माह बाद प्रेमी का साथ मिलने से प्रेमिका ने अपनी फैमिली को ही ठुकरा दिया। अदालत में उसने बयान भी दिया कि वह सिर्फ अपने प्रेमी संग ही जिन्दगी बितायेगी।
हमीरपुर जिले के जरिया थाना क्षेत्र के पवई गांव के भागीरथ का एक लड़की से प्रेम प्रसंग था। बीते साल 2 नवम्बर को वह अपनी प्रेमिका को भगा ले गया था। दोनों ने अहमदाबाद में शादी भी रचायी थी। इधर लड़की के पिता ने बेटी के अपहरण के मामले में प्रेमी के खिलाफ जरिया थाने में मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने इस साल 18 मई को प्रेमी युगल को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था। अदालत में कानूनी कार्यवाही के बाद प्रेमी को जेल भेजा गया था। वहीं प्रेमिका को अदालत के आदेश पर नारी निकेतन भेजा गया था। प्रेमी पक्ष की ओर से प्रेमिका की उम्र 18 वर्ष होने का प्रमाणपत्र पेश किया गया जबकि लड़की के पिता ने 13 वर्ष की उम्र का सर्टिफिकेट कोर्ट में दाखिल किया। अदालत में एक लड़की की उम्र के दो-दो प्रमाणपत्र देख न्यायाधीश दंग रह गये और हमीरपुर के बीएसए को आदेश जारी कर दोनों जन्म प्रमाण पत्रों की जांच कर पूरी रिपोर्ट तलब की थी।
बीएसए की जांच में लड़की की उम्र 18 वर्ष पायी गयी। अदालत ने जांच रिपोर्ट देख माना कि लड़की बालिग है। अदालत ने लड़की के बयान के आधार पर आरोपी को जमानत मंजूरी कर दी। इस मामले में अदालत ने कड़ेे तेवर अख्तियार कर लड़की व उसके माता पिता को कोर्ट में तलब किया था। लड़की ने न्यायाधीश के सामने अपने मां और पापा को ही ठुकराते हुये कहा कि वह प्रेमी के संग ही रहेगी। इस बयान के बाद न्यायाधीश सैय्यद वाइस मियां की अदालत ने फैसला देते हुए कहा कि लड़की को नारी निकेतन भेजा जाये जहां से वह जिसके साथ जाना चाहे, वह जा सकती है। उस पर किसी का कोई दबाव नहीं रहेगा।
इधर, लड़की की उम्र के फर्जी प्रमाणपत्र को लेकर अदालत ने मामले के विवेचक रविन्द्र कुमार को कड़ी फटकार लगाते हुये उसके खिलाफ कार्यवाही करने तक का अल्टीमेटम दिया है। अदालत ने कहा कि विवेचक की लापरवाही के कारण ही निर्दाेष लोगों को जेल जाना पड़ता है। मालूम हो कि प्रेमी पक्ष की ओर से लड़की का जन्म प्रमाणपत्र प्राथमिक विद्यालय पवई का दिया गया था। वह बीएसए की जांच में सही पाया गया वहीं लड़की के पिता ने गोहांड विद्यालय से जो प्रमाणपत्र कोर्ट में दिया गया था वह फर्जी निकला।

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