अधूरा कांवड़ मार्ग बना कांवड़ियों और आम लोगों की परेशानी का सबब

अधूरा कांवड़ मार्ग बना कांवड़ियों और आम लोगों की परेशानी का सबब

मेरठ। सावन महीने की शिवरात्रि पर लाखों कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लेकर एनएच-58 से गुजरते हैं। एक दशक से अधिक समय पहले कांवड़ यात्रा को सुगम करने के लिए बना गंगनहर किनारे का कांवड़ मार्ग आज भी बदहाल है। इस कारण करीब दस से 15 दिन जन जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाता है। इस बार भी कांवड़ मार्ग का निर्माण अधूरा होने से कांवड़िए और लोग परेशान है।
कांवड़ मार्ग को सुगम करने के लिए पुरकाजी से लेकर मुरादनगर तक 108 किलोमीटर लंबा चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग बनाया गया था। ऐन कांवड़ से पहले सावन मास में अधिकारियों को कांवड़ मार्ग की सुध आती है और सब कुछ औपचारिकता निभाने में बीत जाता है। इस बार कांवड़ मार्ग को दो लेन करने का काम बहुत पहले शुरू हो गया था, लेकिन मामला सरकारी लालफीता शाही में फंसकर उलझ गया है। कांवड़ मार्ग के चौड़ीकरण में वन विभाग के अड़ंगे ने वेस्टर्न यूपी को जाम में फंसा दिया। प्रदेश सरकार ने कांवड़ मार्ग को 7.5 मीटर चौड़ा करने को मंजूरी दी थी लेकिन केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की एनओसी समय पर नहीं मिलने से पेड़ नहीं कट पाए और काम अटक गया। कांवड़ मार्ग का एक लेन का हिस्सा बन गया है लेकिन दूसरे हिस्सा ना बनने से बहुत कम कांवड़िए इस मार्ग से गुजर रहे हैं।
प्राधिकरण बनाने की मांग भी खारिज
कांवड़ यात्रा के महत्व को देखते हुए कांवड़ यात्रा प्राधिकरण बनाने की मांग लंबे अर्से से की जा रही है लेकिन इस मांग को ठंडे बस्ते में डाला जाता रहा है। मोदीपुरम के समाजसेवी शीलेंद्र चौहान का कहना है कि कांवड़ प्राधिकरण बनने से जहां कांवड़ियों को सुविधा रहती वहीं हाईवे पर यातायात चालू रहने से जनजीवन भी अस्त-व्यस्त नहीं होता। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रांतीय महामंत्री लोकेश अग्रवाल का कहना है कि कांवड़ मार्ग बदहाल होने के कारण हाईवे पर चलना कांवड़ियों की मजबूरी है। प्राधिकरण बनने से कांवड़ यात्रा के दौरान वाहनों को बंद करने की नौबत नहीं आएगी। ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट करके हाईवे को ठप करने से मुक्ति मिल सकती है। सरकारी मकड़जाल में महत्वपूर्ण योजनाएं उलझ जाती हैं।
सुरक्षा के चलते हाईवे पर रहते हैं कांवड़िए
अगर कांवड़ मार्ग को मानकों के अनुसार बना दिया जाए तो लाखों कांवड़िए उससे गुजरेंगे। फिलहाल कांवड़ मार्ग पर जहरीले जीव-जंतुओं और चोर-उचक्कों से सुरक्षा के कोई साधन नहीं है। रात में कांवड़ मार्ग पर चलने पर कांवड़ियों के साथ कई बार लूटपाट हो चुकी हैं तो कई बार सांप भी उन्हें डंस चुके हैं। ऐसे में सुविधाओं के अभाव में कांवड़िए हाईवे पर चलते हैं।

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